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मऊ के दो चचेरे भाई-बहन बने असिस्टेंट प्रोफेसर, एक ही दिन बिहार में मिली सफलतासक्सेस स्टोरी
4 अग॰ 2026, 8:33 am (45 दिन पहले)· 1

मऊ के दो चचेरे भाई-बहन बने असिस्टेंट प्रोफेसर, एक ही दिन बिहार में मिली सफलता

मऊ के दतौली गांव के रहने वाले चचेरे भाई-बहन शिव प्रताप सिंह और श्वेता सिंह का चयन बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुआ है। लंबे संघर्ष और तानों के बावजूद दोनों ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है।

कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प के सहारे इंसान अपनी मंजिल को हासिल कर ही लेता है, और यह बात मऊ जिले के दतौली गांव के दो चचेरे भाई-बहन ने साबित कर दी है। लंबे संघर्ष के बाद जब इन दोनों युवाओं को एक ही दिन सफलता मिली, तो पूरे परिवार और इलाके में जश्न का माहौल बन गया।

बिहार में मिली एक साथ दोहरी सफलता

दतौली ग्राम सभा के रहने वाले शिव प्रताप सिंह और उनकी चचेरी बहन श्वेता सिंह का चयन बिहार राज्य में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुआ है। परिवार के सदस्य विजय प्रताप सिंह के अनुसार, शिव प्रताप सिंह का चयन बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से अर्थशास्त्र विषय में सहायक प्रोफेसर के रूप में हुआ है। वहीं, श्वेता सिंह का चयन इसी आयोग के तहत राजनीति विज्ञान विषय में सहायक प्रोफेसर पद के लिए किया गया है। दोनों भाई-बहन की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।

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इलाहाबाद और वाराणसी से पूरी की शिक्षा

इन दोनों युवाओं ने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव के ही एक स्कूल से इंटरमीडिएट तक पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने प्रयागराज और वाराणसी का रुख किया। ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने के बाद दोनों ने पीएचडी की पढ़ाई पूरी की और फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गए। पढ़ाई के लंबे सफर के दौरान उन्हें सात से आठ साल का समय लग गया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

ताने कसने वाले लोग पहुंचे बधाई देने

जब ये दोनों युवा घर से बाहर रहकर तैयारी कर रहे थे, तो इलाके के कुछ लोग तरह-तरह की बातें करते थे और परिवार पर दबाव बनाते थे कि इन्हें वापस बुला लिया जाए। हालांकि, परिवार ने कभी उनका हौसला टूटने नहीं दिया और उनका लगातार समर्थन करते रहे। आखिरकार, जब एक ही दिन दोनों के चयन की खबर आई, तो वही लोग सबसे पहले उनके घर बधाई देने और मिठाई लेकर पहुंचे, जो कभी ताने मारा करते थे।

माता-पिता और परिवार का मिला मजबूत साथ

सफलता के बाद बातचीत करते हुए शिव प्रताप सिंह और श्वेता सिंह ने बताया कि यह मुकाम सिर्फ उनका नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और बड़े भाई के भरोसे का नतीजा है। शुरुआती दौर में लगातार आलोचनाएं सुनने के बाद भी परिवार ने उन पर अटूट विश्वास बनाए रखा। पांच से छह साल के कड़े संघर्ष के बाद उन्हें यह मुकाम एक ही दिन हासिल हुआ। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर बनने का उनका मुख्य उद्देश्य न केवल खुद को स्थापित करना था, बल्कि इस क्षेत्र के जरिए अन्य युवाओं के भविष्य को भी संवारना था। फिलहाल परिणाम आने के बाद से वे अपने कार्यभार को संभालने की तैयारी में जुटे हुए हैं।

सवाल-जवाब

शिव प्रताप सिंह का चयन किस विषय में हुआ है?
शिव प्रताप सिंह का चयन अर्थशास्त्र विषय में सहायक प्रोफेसर के पद पर हुआ है।
श्वेता सिंह को किस विषय में सफलता मिली है?
श्वेता सिंह का चयन राजनीति विज्ञान विषय में सहायक प्रोफेसर के रूप में हुआ है।
इन युवाओं का चयन किस राज्य में हुआ है?
दोनों चचेरे भाई-बहन का चयन बिहार राज्य में हुआ है।
तैयारी के दौरान परिवार की क्या भूमिका रही?
तमाम आलोचनाओं और ताने सुनने के बावजूद परिवार ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और उनका साथ दिया।
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