राजस्थान के झुंझुनूं की गलियों में बचपन में लड़कों के साथ बल्ला और गेंद थामने वाली एक लड़की आज जिले की महिला क्रिकेट टीम की कमान संभाल रही है। यह कहानी है गुढ़ागौड़जी की रहने वाली बबीता मीणा की, जिन्होंने अपने जुनून और लगातार की गई मेहनत के दम पर महिला क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना ली है। वे फिलहाल झुंझुनूं जिला महिला क्रिकेट टीम की कप्तान के तौर पर जिम्मेदारी निभा रही हैं।
झुंझुनूं जिले ने खेल की दुनिया में अपनी खास जगह बनाई है। क्रिकेट, एथलेटिक्स और दूसरे खेलों में यहां के खिलाड़ी लगातार प्रदेश और देश का नाम ऊंचा कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अब यहां की बेटियां भी किसी मामले में पीछे नहीं हैं। कम संसाधनों और कई सामाजिक चुनौतियों के बीच भी वे अपने सपनों को सच करने के लिए मैदान पर पसीना बहा रही हैं। बबीता मीणा इसी जज्बे की एक बेमिसाल मिसाल हैं।
पिता ने सबसे पहले पहचानी बेटी की प्रतिभा
क्रिकेट से बबीता का रिश्ता बचपन से ही गहरा रहा है। जिस उम्र में आसपास की ज्यादातर लड़कियां पारंपरिक खेलों में रुचि लेती थीं, उस समय बबीता मोहल्ले और गली में लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर क्रिकेट खेलना पसंद करती थीं। उनके इस अलग लगाव को सबसे पहले पहचाना उनके पिता नेमीचंद मीणा ने। उन्होंने अपनी बेटी में एक होनहार खिलाड़ी देखी और उसे भविष्य का बेहतरीन क्रिकेटर बनाने का सपना संजो लिया। पिता के इसी भरोसे ने बबीता के क्रिकेट सफर की सबसे मजबूत बुनियाद रखी।
2008 में रखा प्रतियोगी क्रिकेट में कदम
शुरुआत में बबीता का अभ्यास घर और आसपास की गलियों तक ही सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने पेशेवर ट्रेनिंग की ओर रुख किया। स्थानीय क्रिकेट अकादमी में नियमित अभ्यास और दिन-रात की कड़ी मेहनत के बाद साल 2008 में उन्होंने पहली बार पेशेवर प्रतियोगी क्रिकेट में हिस्सा लिया। इसके बाद अपने दमखम पर उन्होंने पहले अंडर-17 और फिर अंडर-19 जिला टीम में जगह पक्की कर ली। मैदान पर उनकी रणनीतिक सोच, ठंडे दिमाग से फैसले लेने की क्षमता और बेहतरीन निजी प्रदर्शन को देखते हुए जल्द ही उन्हें टीम की कप्तानी सौंप दी गई। आज तक बबीता अंडर-19 और सीनियर, दोनों स्तर पर कप्तानी की भूमिका बखूबी निभा चुकी हैं। उनकी अगुवाई में जिला टीम ने कई अहम राज्य स्तरीय मुकाबलों में शानदार खेल दिखाया है।
कोच के मार्गदर्शन ने बदली राह
बबीता राजस्थान महिला क्रिकेट टीम का भी प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उनके करियर को नई और सही दिशा तब मिली, जब उन्होंने पेशेवर क्रिकेट अकादमी जॉइन की। वहां कोच सिकंदर अली के तकनीकी मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी कमियों को दूर किया और नए सिरे से तैयारी शुरू की। इसी कड़ी ट्रेनिंग के बाद उनका चयन राजस्थान महिला टी-20 टीम में हुआ। बबीता अपनी इस बड़ी कामयाबी का पूरा श्रेय कोच के सही दिशा-निर्देश, पिता के सहयोग और अपनी लगातार की गई मेहनत को देती हैं।
विराट कोहली और शेफ़ाली वर्मा हैं प्रेरणा
बबीता बताती हैं कि पुरुष क्रिकेटरों में उन्हें दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली की आक्रामक खेल शैली और फिटनेस बेहद पसंद है, जबकि महिला क्रिकेटरों में वे युवा सनसनी शेफ़ाली वर्मा की बल्लेबाजी की कायल हैं। उनका सबसे बड़ा सपना भारतीय महिला क्रिकेट टीम की नीली जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए खेलना है। इसके लिए वे रोज मैदान पर पसीना बहा रही हैं और हर दिन अपने इस लक्ष्य के एक कदम और करीब पहुंच रही हैं। झुंझुनूं की इस होनहार बेटी की संघर्ष भरी कहानी हर उस युवा लड़की के लिए बड़ी प्रेरणा है, जो रूढ़ियों को तोड़कर खेल की दुनिया में अपना करियर बनाना चाहती है।













