जिस सेब के लिए ठंडे पहाड़ी इलाके जरूरी माने जाते हैं, उसे उत्तर प्रदेश के बहराइच की झुलसाने वाली धूप में उगाकर एक बाप-बेटे की जोड़ी ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसकी कभी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। 40 से 45 डिग्री के तीखे तापमान के बीच हरे और लाल सेबों से लदे इस बाग की चर्चा अब सिर्फ बहराइच जिले तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में हो रही है।
यह कमाल कर दिखाया है ताज मोहम्मद और उनके बेटे रिजवान अहमद ने। दोनों बहराइच जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर जरवल रोड के हरचंदा गांव में रहते हैं। करीब चार साल पहले इन्होंने अपने दो बीघे खेत में सेब उगाने की ठानी और इसके लिए हिमाचल प्रदेश की एक नर्सरी से खासतौर पर सेब के 200 पौधे मंगवाकर अपने खेत में लगाए।
जब लोग कहते थे पागल
शुरुआत बिल्कुल आसान नहीं थी। जब पौधे लगने शुरू हुए तो गांव के लोग इन्हें पागल कहने लगे। हंसी उड़ती थी, ताने मिलते थे कि बहराइच की इस तपती गर्मी में सेब उगाना नामुमकिन है। लेकिन इस जोड़ी ने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया और चुपचाप अपने काम में जुटी रही।
चार साल तक दोनों ने दिन-रात कड़ी मेहनत की। रेगिस्तान जैसी गर्मी में भी उन्होंने सूझबूझ और पसीने से पौधों को सींचा और उन्हें पूरी तरह हरा-भरा बनाए रखा। पूरे बाग को तैयार करने में करीब 18 लाख रुपये की मोटी रकम लगी। आज यह तपस्या रंग ला चुकी है। जो लोग कल तक ताने मारते थे, पेड़ों पर झूलते लाल और हरे सेब देखकर उनकी बोलती बंद हो गई है।
कितनी होगी पैदावार और कमाई
ताज मोहम्मद बताते हैं कि दो बीघे के इस बाग से इस बार करीब 10 से 12 क्विंटल सेब की बंपर पैदावार की उम्मीद है। उन्होंने कमाई का पूरा हिसाब भी समझाया। बाजार में अच्छी क्वालिटी के सेब का भाव करीब 250 रुपये प्रति किलो तक पहुंचता है, लेकिन अगर उनका सेब थोक में सिर्फ 150 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भी बिक जाए, तो आराम से सालाना 10 से 12 लाख रुपये की कमाई हो जाएगी।
इस कामयाबी के बाद अब इस परिवार की किस्मत पूरी तरह बदलने वाली है। हालत यह है कि इस अनोखे सेब के बाग को देखने के लिए दूर-दूर से लोग खिंचे चले आ रहे हैं।













