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20 साल की उम्र में रोल्स-रॉयस में 72.3 लाख का पैकेज, सरकारी MBBS सीट चूकने वाली ऋतुपर्णा ने यूं पलट दी किस्मतसक्सेस स्टोरी
6 घंटे पहले· 2

20 साल की उम्र में रोल्स-रॉयस में 72.3 लाख का पैकेज, सरकारी MBBS सीट चूकने वाली ऋतुपर्णा ने यूं पलट दी किस्मत

कर्नाटक की ऋतुपर्णा केएस को NEET के जरिए सरकारी MBBS सीट नहीं मिली, लेकिन रोबोटिक्स इंजीनियरिंग की राह चुनकर उन्होंने 20 साल की उम्र में रोल्स-रॉयस में 72.3 लाख रुपये सालाना का पैकेज हासिल कर लिया।

Karan MalhotraKaran MalhotraCrime Correspondent 4 मिनट पढ़ें AI के लिए
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एक एंट्रेंस एग्जाम का नतीजा पूरी जिंदगी की दिशा तय नहीं करता, इस बात को कर्नाटक की ऋतुपर्णा केएस ने सच कर दिखाया है। NEET के जरिए सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS की सीट हासिल करना उनका सपना था, पर जब वह सीट हाथ नहीं लगी तो उन्होंने टूटने के बजाय एक नया रास्ता पकड़ लिया। नतीजा यह कि महज 20 साल की उम्र में वह दुनिया की मशहूर कंपनी रोल्स-रॉयस में रोबोटिक्स सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन चुकी हैं और उनका सालाना पैकेज 72.3 लाख रुपये है।

हर साल लाखों स्टूडेंट्स डॉक्टर बनने का ख्वाब लेकर NEET की परीक्षा में बैठते हैं। इनमें से कई को मनचाही रैंक या सरकारी कॉलेज में दाखिला नहीं मिल पाता, और अक्सर वे मान लेते हैं कि उनका करियर यहीं ठहर गया। ऋतुपर्णा की कहानी इसी सोच को सिरे से खारिज करती है।

सपना मेडिकल का था, पर जिंदगी ने मोड़ कहीं और दिया

कर्नाटक में जन्मी ऋतुपर्णा शुरू से ही मेडिकल फील्ड में करियर बनाना चाहती थीं। डॉक्टर बनने के इरादे से उन्होंने NEET की परीक्षा दी, मगर सरकारी MBBS सीट उनके हिस्से नहीं आई। ऐसे हालात में कई छात्र हिम्मत हार बैठते हैं, लेकिन ऋतुपर्णा ने ठान लिया कि एक परीक्षा उनके पूरे भविष्य का फैसला नहीं करेगी। इसी सोच के साथ उन्होंने एक बिल्कुल नए क्षेत्र में कदम रखा।

रोबोटिक्स और ऑटोमेशन में बनाई राह

सरकारी मेडिकल सीट न मिलने के बाद ऋतुपर्णा ने साह्याद्री कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट में मेकाट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन इंजीनियरिंग कोर्स में दाखिला ले लिया। खास बात यह है कि उन्होंने किसी आईआईटी या देश के किसी बड़े नामी इंजीनियरिंग संस्थान से पढ़ाई नहीं की। इसके बावजूद उनका पूरा फोकस अपनी स्किल्स को निखारने और असल जिंदगी की समस्याओं को हल करने पर रहा।

कॉलेज के दौरान ऋतुपर्णा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने कई ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम किया जो सीधे आम लोगों की जरूरतों से जुड़े थे। इनमें एक अहम प्रोजेक्ट ऐसा रोबोट था, जिसे सुपारी (अरेका नट) की खेती करने वाले किसानों की मदद के लिए तैयार किया गया था। यह दिखाता है कि वह टेक्नोलॉजी को सिर्फ करियर का जरिया नहीं, बल्कि समाज और खेती की दिक्कतों का हल बनाना चाहती थीं।

इंटरनेशनल मुकाबलों में जीते मेडल

पढ़ाई के साथ-साथ ऋतुपर्णा ने अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक्स प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया और मेडल जीतकर अपनी तकनीकी काबिलियत साबित की। इतना ही नहीं, उन्होंने एनआईटीके सुरथकल (NITK Surathkal) के साथ कई रिसर्च प्रोजेक्ट्स में भी योगदान दिया। इन प्रोजेक्ट्स ने उनकी तकनीकी समझ को और मजबूत किया और उन्हें रिसर्च का व्यावहारिक अनुभव दिलाया।

रोल्स-रॉयस की इंटर्नशिप ने बदल दी कहानी

ऋतुपर्णा के करियर का सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब पढ़ाई के दौरान उन्हें रोल्स-रॉयस में इंटर्नशिप का मौका मिला। यह सफर आसान नहीं था। करीब आठ महीने तक उन्हें एक साथ कॉलेज की पढ़ाई और इंडस्ट्री प्रोजेक्ट्स, दोनों संभालने पड़े। कई बार देर रात तक काम करना पड़ता और साथ-साथ पढ़ाई भी जारी रखनी होती। उनकी कड़ी मेहनत और बेहतरीन प्रदर्शन ने कंपनी के अधिकारियों को प्रभावित कर दिया।

39.6 लाख से सीधे 72.3 लाख तक पहुंचा पैकेज

इंटर्नशिप के दौरान उनके काम को देखते हुए रोल्स-रॉयस ने पहले उन्हें 39.6 लाख रुपये सालाना का प्री-प्लेसमेंट ऑफर दिया। लेकिन उनकी शानदार परफॉर्मेंस और योगदान को देखते हुए बाद में यह पैकेज बढ़ाकर 72.3 लाख रुपये सालाना कर दिया गया। किसी ऐसे युवा इंजीनियर के लिए, जिसने किसी टॉप संस्थान से पढ़ाई न की हो, यह उपलब्धि बेहद बड़ी मानी जाती है।

दिसंबर 2024 से ऋतुपर्णा रोल्स-रॉयस में रोबोटिक्स सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रही हैं। उनका काम आधुनिक रोबोटिक्स सॉफ्टवेयर तैयार करना है, जिसके लिए वह रोबोट ऑपरेटिंग सिस्टम (ROS), गजेबो (Gazebo), पायथन (Python) और C++ जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं। उनकी जिम्मेदारियों में कंट्रोल एल्गोरिद्म बनाना, सेंसर इंटीग्रेशन और ऑटोनॉमस यानी स्वचालित रोबोटिक सिस्टम तैयार करना शामिल है।

गेमिंग इंडस्ट्री में भी आजमा चुकी हैं हाथ

रोल्स-रॉयस से पहले ऋतुपर्णा एक गेमिंग कंपनी में भी इंटर्नशिप कर चुकी हैं। वहां उन्होंने ब्लेंडर और यूनिटी जैसे प्लेटफॉर्म की मदद से 3D गेम कैरेक्टर डिजाइन और डेवलप किए थे। इस तजुर्बे ने उनकी तकनीकी पकड़ को और मजबूत बना दिया।

एक परीक्षा से नहीं तय होती पूरी जिंदगी

ऋतुपर्णा की कहानी सिर्फ एक कामयाब प्लेसमेंट की दास्तान नहीं है, बल्कि उन लाखों छात्रों के लिए एक संदेश है जो किसी प्रतियोगी परीक्षा में नाकाम होने के बाद खुद को असफल मान बैठते हैं। हर साल बड़ी तादाद में स्टूडेंट्स NEET, JEE और दूसरी परीक्षाओं का दबाव झेलते हैं, और कई बार नकारात्मकता उन्हें यह महसूस कराने लगती है कि उनका भविष्य खत्म हो गया है। ऋतुपर्णा ने साबित कर दिया कि किसी एक परीक्षा में मनचाहा नतीजा न आना जिंदगी में कामयाबी का दरवाजा बंद नहीं करता।

उनकी सफलता बताती है कि कभी-कभी जिंदगी हमें उस रास्ते पर नहीं ले जाती जिसकी हमने कल्पना की होती है, मगर वही रास्ता हमें कहीं ज्यादा बड़ी मंजिल तक पहुंचा देता है। सरकारी MBBS सीट छूटने के बाद ऋतुपर्णा ने हार मानने के बजाय एक नई दिशा चुनी, लगातार सीखती रहीं, अपने हुनर को तराशा और आज दुनिया की एक प्रतिष्ठित कंपनी में शानदार मुकाम पर पहुंच गई हैं।

इसका आप पर असर

  • छात्रों के लिए: NEET या किसी एक एंट्रेंस एग्जाम में असफल होने पर निराश होने की जरूरत नहीं, रोबोटिक्स और इंजीनियरिंग जैसे दूसरे रास्तों में भी बड़ा करियर बन सकता है।
  • कर्नाटक में: साह्याद्री कॉलेज जैसे राज्य के संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए यह मिसाल है कि टॉप संस्थान न होने पर भी स्किल और प्रोजेक्ट्स के दम पर ग्लोबल कंपनी में मौका मिल सकता है।

प्रेरणा और सीख

  • एक परीक्षा को अंत न मानें: सरकारी MBBS सीट न मिलने पर ऋतुपर्णा ने हार मानने के बजाय नया क्षेत्र चुना, यही सोच उनकी कामयाबी की नींव बनी।
  • संस्थान नहीं, स्किल बोलती है: बिना किसी आईआईटी या बड़े संस्थान के, उन्होंने अपने हुनर और असली प्रोजेक्ट्स के दम पर खुद को साबित किया।
  • असल समस्याओं पर काम करें: किसानों के लिए रोबोट जैसे प्रोजेक्ट दिखाते हैं कि व्यावहारिक समाधान बनाने से पहचान और मौके दोनों मिलते हैं।
  • मौके के लिए तैयार रहें: इंटर्नशिप के आठ महीनों में पढ़ाई और इंडस्ट्री प्रोजेक्ट दोनों एक साथ संभालकर उन्होंने मेहनत से अपनी जगह बनाई।
  • लगातार सीखते रहें: प्रतियोगिताओं, रिसर्च और गेमिंग तक, हर अनुभव को उन्होंने अपने कौशल को निखारने में लगाया।

सवाल-जवाब

ऋतुपर्णा केएस कौन हैं?
वह कर्नाटक की रहने वाली एक युवा इंजीनियर हैं, जो 20 साल की उम्र में रोल्स-रॉयस में रोबोटिक्स सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रही हैं।
उनका सालाना पैकेज कितना है?
उनका मौजूदा सालाना पैकेज 72.3 लाख रुपये है, जो पहले मिले 39.6 लाख रुपये के प्री-प्लेसमेंट ऑफर से बढ़ाया गया।
ऋतुपर्णा ने MBBS के बजाय कौन सा कोर्स चुना?
उन्होंने साह्याद्री कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट में मेकाट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन इंजीनियरिंग कोर्स में दाखिला लिया।
वह रोल्स-रॉयस में क्या काम करती हैं?
वह आधुनिक रोबोटिक्स सॉफ्टवेयर बनाती हैं और कंट्रोल एल्गोरिद्म डेवलप करना, सेंसर इंटीग्रेशन तथा ऑटोनॉमस रोबोटिक सिस्टम तैयार करना उनकी जिम्मेदारियों में शामिल है।
वह कौन सी तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं?
वह रोबोट ऑपरेटिंग सिस्टम (ROS), गजेबो (Gazebo), पायथन (Python) और C++ जैसी तकनीकों का उपयोग करती हैं।
ऋतुपर्णा को रोल्स-रॉयस में नौकरी कब से मिली?
वह दिसंबर 2024 से रोल्स-रॉयस में रोबोटिक्स सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रही हैं।
रोल्स-रॉयस से पहले उन्होंने कहां काम किया था?
इससे पहले उन्होंने एक गेमिंग कंपनी में इंटर्नशिप की थी, जहां ब्लेंडर और यूनिटी की मदद से 3D गेम कैरेक्टर डिजाइन किए।
#सक्सेस स्टोरी#ऋतुपर्णा केएस#रोल्स-रॉयस नौकरी#NEET सक्सेस स्टोरी#रोबोटिक्स इंजीनियर#72.3 लाख पैकेज#कर्नाटक#साह्याद्री कॉलेज

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