साल 2014 में तीन युवा उद्यमी अपनी-अपनी नाकामियों का बोझ उठाए एक साथ आए और जो सपना उन्होंने मिलकर बुना, वह आज भारत की सबसे चर्चित स्टार्टअप सफलता की दास्तान बन चुकी है। होम सर्विस प्लेटफॉर्म अर्बन कंपनी ने हाल ही में प्रॉसस वेंचर्स की अगुआई में करीब 188 मिलियन डॉलर यानी लगभग 1,410 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई है। इस निवेश दौर के बाद कंपनी की वैल्यूएशन करीब 2 अरब डॉलर के आंकड़े को छूने लगी है, जबकि अगस्त 2019 में यह 900 मिलियन डॉलर थी।
आम घरेलू परेशानियों का भरोसेमंद हल
अर्बन कंपनी एक ऐसी जरूरत को पूरा करती है जिससे लगभग हर घर किसी न किसी दिन दो-चार होता है। घर में नल टपक रहा हो, बाल कटवाने के लिए ब्यूटीशियन चाहिए हो, सोफा गहराई से साफ करवाना हो या बिजली की मरम्मत करानी हो, यह प्लेटफॉर्म इन सभी कामों के लिए वेरिफाइड प्रोफेशनल्स को एक जगह मुहैया कराता है। इसमें ब्यूटीशियन, मसाज थेरेपिस्ट, प्लंबर, बढ़ई और इलेक्ट्रीशियन सभी शामिल हैं। सबसे अहम बात यह है कि हर सेवा की कीमत पहले से तय और पारदर्शी होती है, जिससे मोलभाव और अनिश्चितता की झंझट खत्म हो जाती है। पहले घरेलू सेवाएं लेना एक बिखरा हुआ और अविश्वसनीय अनुभव हुआ करता था। अर्बन कंपनी ने इस पूरे अनुभव को व्यवस्थित, पारदर्शी और सुविधाजनक बना दिया, जो एक लंबे समय से अनगठित पड़े बाजार में एक बड़ा बदलाव था।
पहले नाकामी, फिर एकसाथ आने का फैसला
कंपनी की नींव नवंबर 2014 में तीन युवाओं ने रखी थी, अभिराज सिंह बहल, राघव चंद्रा और वरुण खैतान। इनकी कहानी की सबसे दिलचस्प बात यह है कि तीनों अर्बन कंपनी से पहले अलग-अलग उद्यम आजमा चुके थे और उनमें से कोई भी पहली बार में पूरी तरह कामयाब नहीं हुआ था। अभिराज और वरुण ने पहले सिनेमाबॉक्स नाम से एक ऑन-डिमांड मूवी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म बनाया था, जबकि राघव बग्गी नाम के एक राइड-शेयरिंग ऐप पर काम कर रहे थे। दोनों वेंचर उस मुकाम तक नहीं पहुंच सके जिसकी इन्हें उम्मीद थी। लेकिन इन असफलताओं ने इन्हें उद्यमिता से दूर नहीं किया, बल्कि एक जरूरी सबक दिया कि सिर्फ एक नया आइडिया कामयाबी की गारंटी नहीं होता। तीनों को यह भी समझ आया कि अकेले-अकेले जो नहीं हो पाया, वह शायद मिलकर किया जा सकता है। और उसी सोच ने अर्बन कंपनी को जन्म दिया।
30 से अधिक शहरों से लेकर चार देशों तक
एक छोटे से लोकल प्रयोग के रूप में जन्मी अर्बन कंपनी आज एक बड़े मल्टी-सिटी और मल्टी-कंट्री ऑपरेशन में बदल चुकी है। भारत में यह दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, जयपुर, लखनऊ, इंदौर और अहमदाबाद समेत 30 से ज्यादा शहरों में सेवाएं दे रही है। इसके अलावा कंपनी ने चार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पकड़ बना ली है जिनमें दुबई, अबू धाबी, सिडनी और सिंगापुर शामिल हैं। यह वैश्विक विस्तार साफ दर्शाता है कि अर्बन कंपनी का मॉडल सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अलग-अलग देशों और संस्कृतियों में भी उतना ही प्रभावी साबित हुआ है।
नाम बदला, नजरिया भी बड़ा हुआ
कंपनी शुरुआत में अर्बनक्लैप के नाम से जानी जाती थी और भारतीय शहरों में इसने अच्छी पहचान बना ली थी। लेकिन जनवरी 2020 में संस्थापकों ने एक रणनीतिक कदम उठाते हुए इसका नाम बदलकर अर्बन कंपनी कर दिया। सह-संस्थापक अभिराज बहल ने बताया कि इस बदलाव के पीछे दो मकसद थे। पहला यह कि अर्बन कंपनी नाम अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ज्यादा आसानी से स्वीकार किया जा सकता है, क्योंकि अर्बनक्लैप जैसा नाम विदेशी बाजारों में उतनी आसानी से नहीं पकड़ता। दूसरा यह कि नए नाम के तले कंपनी अपने खुद के सब-ब्रांड भी लॉन्च कर सकती है। यह महज एक नाम का बदलाव नहीं था, बल्कि भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया एक दूरदर्शी फैसला था जो वैश्विक विस्तार की राह खोलने के लिए जरूरी था।
सात साल में दोगुनी से ज्यादा बढ़ी वैल्यूएशन
अर्बन कंपनी की फंडिंग यात्रा उसके लगातार बढ़ते दम की कहानी कहती है। अगस्त 2019 में 900 मिलियन डॉलर की वैल्यूएशन से शुरुआत कर अब यह करीब 2 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, यानी कुछ ही सालों में दोगुने से अधिक की छलांग। प्रॉसस वेंचर्स की अगुआई में आई करीब 188 मिलियन डॉलर की यह ताजा फंडिंग सिर्फ पूंजी नहीं है, बल्कि यह दुनिया की एक प्रमुख टेक निवेश कंपनी का विश्वास है। सात साल पुराने इस स्टार्टअप की यह बढ़त बताती है कि यह जिस समस्या को सुलझा रही है वह कितनी बड़ी है और इसका मॉडल कितना टिकाऊ है।
अर्बन कंपनी की कहानी यह याद दिलाती है कि असली कामयाबी किसी एक शानदार पल में नहीं आती। यह असफल कोशिशों, दोबारा बनाई योजनाओं, सही साझेदारी और हार न मानने के इरादे से आती है। एक छोटी सी सर्विस एक्सपेरिमेंट से शुरू होकर 2 अरब डॉलर की वैल्यूएशन की ओर बढ़ रहे इस प्लेटफॉर्म की कहानी अभी पूरी नहीं हुई है।













