गोरखपुर की रहने वाली आराधना सामत उन महिलाओं के लिए एक बड़ी मिसाल बनकर उभरी हैं, जो घरेलू जिम्मेदारियों को संभालते हुए अपनी प्रतिभा को एक नए मुकाम पर ले जाना चाहती हैं। जहां बहुत सी महिलाएं घर की चौखट तक ही सीमित रह जाती हैं, वहीं आराधना ने अपनी लगन, हुनर और कड़ी मेहनत के बल पर जूट के आकर्षक उत्पाद बनाने का काम शुरू किया। आज उनकी कला और लगन का ही नतीजा है कि उनके तैयार किए गए उत्पाद शहर के बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की पसंद बन चुके हैं।
साधारण रेशों से खूबसूरत क्राफ्ट तैयार करने का हुनर
आराधना अपनी इस पहल के तहत जूट से बने कई तरह के उपयोगी और फैशनेबल उत्पाद तैयार करवाती हैं। इस पूरे काम को सुचारू रूप से चलाने के लिए उन्होंने अलग-अलग टीमों का गठन किया है। उनकी एक टीम जूट के बारीक काम से सुंदर ज्वेलरी बनाती है, जबकि दूसरी टीम वॉटर बॉटल कवर और तरह-तरह के बैग तैयार करने में जुटी रहती है। इस तरह जूट के साधारण नजर आने वाले रेशों को बेहद कलात्मक, खूबसूरत और रोजमर्रा के उपयोग में आने वाले सामानों में बदलकर बाजार में उतारा जा रहा है।
प्रशासनिक तारीफ और नए डिजाइनों की चुनौती
आराधना द्वारा तैयार किए गए जूट के हैंडबैग्स की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। उनके द्वारा बनाया गया एक खास जूट हैंडबैग गोरखपुर के डीएम को भेंट किया गया था, जिसे उन्होंने बेहद पसंद किया। इसके अलावा शहर के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उनके पास जरी के काम वाले छोटे बैग और अन्य क्राफ्ट आइटम का ऑर्डर देते हैं। ऑर्डर मिलने पर आराधना अपनी टीम के साथ मिलकर गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखते हुए समय पर उत्पाद तैयार करवाती हैं। आराधना के अनुसार जूट का सामान बनाना जितना आसान दिखता है, वास्तव में उसमें उतनी ही मेहनत लगती है। सबसे कठिन चरण नए उत्पादों के डिजाइन तैयार करना होता है। ग्राहक की पसंद, समकालीन फैशन और उत्पाद की उपयोगिता को ध्यान में रखकर ही हर पीस तैयार किया जाता है, जिससे हर नया ऑर्डर एक चुनौती की तरह होता है।
हर महीने 50 हजार तक की आमदनी और भावी योजनाएं
निरंतर मेहनत और लगन के बदौलत आराधना इस कारोबार से अच्छा मुनाफा भी कमा रही हैं। वे हर महीने लगभग 25,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक की आमदनी कर लेती हैं। कीमत की बात करें तो जूट से बने छोटे आइटम की शुरुआत करीब 100 रुपये से होती है, वहीं बड़े और बारीक डिजाइन वाले बैग 500 रुपये से 1000 रुपये की रेंज में बिकते हैं। आराधना अब अपने इस सूक्ष्म उद्यम को बड़े स्तर पर ले जाने की योजना बना रही हैं। उनका मकसद जूट उत्पादों का उत्पादन बढ़ाना और उसमें नई-नई वैरायटी शामिल करना है। उनका मानना है कि यदि सही दिशा में प्रतिभा और मेहनत का इस्तेमाल किया जाए तो घर से शुरू हुआ छोटा सा प्रयास भी बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है।



















