झारखंड की राजधानी रांची की निवासी नेहा आज एक सफल व्यवसायी के रूप में पहचानी जाती हैं। उन्होंने नेहा क्रिएशन नाम से अपनी एक फर्म की शुरुआत की, जो आज एक बड़े मुकाम पर पहुंच चुकी है। नेहा के इस उद्यम के तहत सलवार-सूट, कुर्तियां, साड़ियां और पेटिकोट जैसे परिधानों का निर्माण किया जाता है। उनके उत्पादों की पहुंच अब केवल रांची तक ही सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड के हर कोने के अलावा यह बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी बड़े पैमाने पर भेजे जा रहे हैं। उनका यह व्यापार अब सूरत जैसे बड़े व्यावसायिक केंद्रों तक भी अपनी पैठ बना चुका है।
व्यापार का विस्तार और कुशल कारीगर
नेहा के व्यवसाय की सबसे बड़ी खासियत उनकी उत्पादन क्षमता है। वह विशेष रूप से थोक (होलसेल) में व्यापार करती हैं। उन्होंने अपने साथ 70 से अधिक कारीगरों को जोड़ा है, जो निरंतर उत्पादों को तैयार करने का काम करते हैं। इन कारीगरों की बदौलत ही वह बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और ट्रेंडी कपड़े तैयार कर पा रही हैं।
सफलता का मूल मंत्र और नजरिया
अपनी सफलता के पीछे के सफर के बारे में बताते हुए नेहा कहती हैं कि समाज में लोग आपके पहनावे या लुक्स पर अक्सर नकारात्मक टिप्पणियां करते हैं। हालांकि, उन्होंने अपना एक खास तरीका अपना रखा है। वह बताती हैं कि जब लोग उनके बारे में बुरा कहते हैं, तो वह जानबूझकर बहरी बन जाती हैं। उनका मानना है कि केवल वही बातें सुननी चाहिए जो आपके काम की हों और आपको आगे बढ़ाने में मदद करें। बाकी सभी नकारात्मक बातों को नजरअंदाज करना ही उनके धैर्य का आधार बना है। यही संदेश वह अन्य लोगों को भी देती हैं कि अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहें और व्यर्थ की बातों को अनसुना करना सीखें।
किफायती दाम और विविधता
ग्राहक उनकी ओर क्यों आकर्षित होते हैं, इसका सीधा जवाब नेहा के पास है। क्योंकि वह खुद निर्माण करती हैं और सीधे थोक दरों पर सामान उपलब्ध कराती हैं, इसलिए उनके पास दाम बेहद किफायती रहते हैं। उनके यहां मात्र ₹300 की शुरुआती रेंज में बेहतरीन कुर्तियां और साड़ियां उपलब्ध हैं। चाहे सिल्क हो या अन्य कोई फैब्रिक, वह हमेशा लेटेस्ट फैशन और ट्रेंड का ख्याल रखती हैं। कुछ उत्पाद तो विशेष रूप से उनकी अपनी डिजाइन का हिस्सा होते हैं, जो ग्राहकों को बहुत पसंद आते हैं।
बदलाव की एक लंबी यात्रा
नेहा का सफर बहुत कठिन था। वह याद करती हैं कि शुरुआत के दिनों में उन्हें घर-घर जाकर अपने उत्पादों के नमूने दिखाने पड़ते थे ताकि लोगों को उनकी क्वालिटी का पता चल सके। वह ईमानदारी और लगातार मेहनत को अपनी सफलता की कुंजी मानती हैं। आज नेहा का वार्षिक टर्नओवर 2 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है। उनके पास गुमला, लोहरदगा समेत अन्य जिलों से लोग खरीदारी के लिए आते हैं, और व्यापारी भी थोक में माल लेने के लिए उनसे संपर्क करते हैं। शादी-ब्याह के मौसम में तो उनके पास इतना काम होता है कि उन्हें खाने तक का समय नहीं मिलता। आज नेहा ने न केवल खुद को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाया है, बल्कि दर्जनों लोगों को रोजगार देकर आत्मनिर्भर भी बनाया है।











