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जौनपुर के वृद्धाश्रम में रहने वाले मैकेनिकल इंजीनियर सिलविंदर सिंह ने लिया देहदान का संकल्पसक्सेस स्टोरी
18 सित॰ 2026, 9:52 am (41 दिन पहले)· 3

जौनपुर के वृद्धाश्रम में रहने वाले मैकेनिकल इंजीनियर सिलविंदर सिंह ने लिया देहदान का संकल्प

जौनपुर के वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्ग मैकेनिकल इंजीनियर सिलविंदर सिंह ने मृत्यु के बाद अपना शरीर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और जरूरतमंदों के उपयोग के लिए दान करने का बड़ा फैसला किया है। परिवार से दूरी के बावजूद उनका यह कदम अब समाज और आश्रम के अन्य लोगों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया है।

जौनपुर में जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके बुजुर्गों के बीच एक बेहद खास और प्रेरणादायक फैसला सामने आया है। शहर के एक वृद्धाश्रम में रहने वाले सिलविंदर सिंह ने मृत्यु के उपरांत अपने शरीर को दान करने का निर्णय लिया है। परिवार के सदस्यों से दूरी और अकेलेपन का सामना करने के बावजूद उनका यह कदम मानवता की मिसाल पेश कर रहा है, जिससे न केवल समाज में सकारात्मक संदेश गया है बल्कि उनके आसपास रहने वाले अन्य बुजुर्ग भी इस नेक कार्य के लिए प्रेरित हुए हैं।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई और मुंबई का लंबा सफर

सिलविंदर सिंह मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं और उन्होंने अपनी जिंदगी का एक लंबा हिस्सा मुंबई में बिताया है। उन्होंने वर्ष 1978 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी और इसके बाद अपने जीवन का अधिकांश समय परिवार के उज्ज्वल भविष्य को संवारने में लगा दिया। उन्होंने अपने बेटे को पढ़ाने-लिखाने और उसे इस मुकाम पर पहुंचाने के लिए काफी संघर्ष किया। आज उनका बेटा विदेश में एक अच्छी नौकरी कर रहा है और उसकी पत्नी भी काम करती है, लेकिन पिछले कई वर्षों से उनके बेटे ने उनसे मिलने की सुध नहीं ली है और न ही वे उनसे मिलने पहुंचे हैं।

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परिवार से दूरी और बिना किसी शिकायत का जीवन

अपनों से अपेक्षित साथ और मेल-मिलाप न मिलने के बावजूद सिलविंदर सिंह के मन में किसी के प्रति कोई कड़वाहट या शिकायत नहीं है। वे वृद्धाश्रम में शांत जीवन बिता रहे हैं और उनका सोचना है कि भले ही वे अपने जीवनकाल में सीधे तौर पर बहुत अधिक लोगों के काम नहीं आ सके हों, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद यदि उनका नश्वर शरीर किसी मेडिकल छात्र की शिक्षा या किसी जरूरतमंद की भलाई के काम आ सके, तो इससे बढ़कर उनके लिए आत्मिक संतुष्टि और कुछ नहीं हो सकती।

दस्तावेजी प्रक्रिया और डॉक्टरों से बातचीत

वृद्धाश्रम के संचालक रवि चौबे के अनुसार, सिलविंदर सिंह ने इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से बातचीत शुरू कर दी है। सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद वे देहदान से जुड़े जरूरी कागजात पर हस्ताक्षर करेंगे। वे अपनी बेटी के सहयोग से इस प्रक्रिया से जुड़े सभी कानूनी और चिकित्सीय दस्तावेजों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, ताकि उनका यह संकल्प आसानी से पूरा हो सके।

वृद्धाश्रम के अन्य बुजुर्गों पर पड़ा गहरा असर

सिलविंदर सिंह की इस सोच और उनके इस साहसिक निर्णय का सकारात्मक प्रभाव जौनपुर के इस वृद्धाश्रम में रह रहे अन्य बुजुर्गों पर भी देखने को मिला है। रवि चौबे ने जानकारी दी है कि उनकी इस अनूठी पहल से प्रेरित होकर आश्रम के कई और बुजुर्गों ने भी अपनी मर्जी से देहदान और अंगदान करने की सहमति जता दी है। इन सभी का मानना है कि यदि उनका शरीर मरने के बाद मेडिकल कॉलेजों के छात्रों को शोध और अध्ययन में मदद कर सके और देश को बेहतर डॉक्टर देने में योगदान दे सके, तो उनके इस जीवन का अंत बेहद सार्थक माना जाएगा। अपनों के बीच न रह पाने की टीस के बावजूद इन बुजुर्गों का यह कदम साबित करता है कि मानवीय संवेदनाएं कभी समाप्त नहीं होतीं।

सवाल-जवाब

सिलविंदर सिंह वर्तमान में कहां रह रहे हैं?
सिलविंदर सिंह जौनपुर के एक वृद्धाश्रम में रह रहे हैं।
सिलविंदर सिंह ने कौन सी पढ़ाई की थी?
उन्होंने वर्ष 1978 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी।
सिलविंदर सिंह का परिवार कहां रहता है?
उनका बेटा विदेश में नौकरी करता है और उनकी पत्नी भी कामकाजी है।
उन्होंने मृत्यु के बाद क्या करने का निर्णय लिया है?
उन्होंने मेडिकल शिक्षा और जरूरतमंदों के लिए अपना शरीर दान करने का फैसला किया है।
वृद्धाश्रम के संचालक का क्या नाम है?
वृद्धाश्रम के संचालक का नाम रवि चौबे है।
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