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अम्बिकापुर की छात्रा ऋषिका गुप्ता ने मां संग बनाई पहचान, फुटपाथ से शुरू देसी अचार का बिज़नेस अब कई राज्यों तक पहुंचासक्सेस स्टोरी
7 अग॰ 2026, 5:02 pm (83 दिन पहले)· 1

अम्बिकापुर की छात्रा ऋषिका गुप्ता ने मां संग बनाई पहचान, फुटपाथ से शुरू देसी अचार का बिज़नेस अब कई राज्यों तक पहुंचा

छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर में पिता के जाने के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रही मां-बेटी की जोड़ी ने घर में देसी अचार बनाना शुरू किया। फुटपाथ पर 30 डिब्बों से शुरू हुआ यह काम आज कई राज्यों में फैल चुका है।

छत्तीसगढ़ के संभाग मुख्यालय अम्बिकापुर में रहने वाली कॉलेज छात्रा ऋषिका गुप्ता और उनकी मां की कहानी विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का बेहतरीन उदाहरण है। बचपन में पिता का साया सिर से उठने और भयंकर आर्थिक तंगी से घिर जाने के बाद भी इस मां-बेटी ने घुटने टेकने के बजाय अपनी किस्मत खुद लिखने का फैसला किया। घर की रसोई से देसी स्वाद के साथ शुरू हुआ उनका छोटा सा काम आज एक सफल कारोबार का रूप ले चुका है, जिसकी गूंज अब स्थानीय बाजार से निकलकर दूर-दराज के राज्यों तक पहुंच रही है।

संघर्ष की नींव से उपजी स्वावलंबन की सोच

ऋषिका के जीवन की राह कभी आसान नहीं रही। जब वह छोटी थीं, तभी उनके पिता ने दूसरी शादी कर ली और परिवार को बेसहारा छोड़ दिया। ऐसे कठिन समय में ऋषिका की मां ने अकेले ही बेटी की परवरिश की जिम्मेदारी उठाई। पहले गृहिणी रहीं उनकी मां ने हार नहीं मानी और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के साथ-साथ मेहनत-मजदूरी करके ऋषिका को पाला और पढ़ाया-लिखाया। वक्त के साथ जब परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगी, तो मां और बेटी दोनों ने मिलकर आत्मनिर्भर बनने की ठानी। उन्होंने घर पर ही पारंपरिक तरीके से देसी अचार बनाने की योजना तैयार की। शुरुआत बहुत ही छोटे पैमाने पर हुई, जहां दोनों ने केवल 30 डिब्बे अचार तैयार किए और उन्हें बेचने के लिए फुटपाथ पर अपनी जगह बनाई।

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फुटपाथ से पहले ग्राहक तक की चुनौती

कारोबार की शुरुआत बेहद चुनौतीपूर्ण रही। पहले ही दिन दोनों मां-बेटी अचार के डिब्बे लेकर फुटपाथ पर बैठ गईं, लेकिन कई घंटों तक एक भी ग्राहक उनकी दुकान पर नहीं आया। उम्मीदें धुंधली होने लगी थीं, लेकिन शाम लगभग 6 बजे उनका पहला ग्राहक वहां पहुंचा। उस ग्राहक ने न केवल अचार खरीदा, बल्कि उसकी स्वाद और गुणवत्ता की जमकर सराहना भी की। उस पहले ग्राहक के प्रोत्साहन भरे शब्दों ने मां-बेटी के भीतर एक नया विश्वास भर दिया। उसी पल दोनों ने ठान लिया कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, वे इस काम को आगे बढ़ाएंगी और पीछे मुड़कर नहीं देखेंगी।

शुद्धता और घरेलू मसालों का खास स्वाद

इस कारोबार की सबसे बड़ी खासियत उत्पाद की शुद्धता और पारंपरिक तैयारी है। मां-बेटी का दावा है कि उनके अचार में किसी भी तरह के रासायनिक प्रिजर्वेटिव या कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। अचार में प्रयुक्त होने वाले सभी मसाले घर में ही तैयार किए जाते हैं और शुद्ध कच्ची घानी सरसों तेल का प्रयोग होता है। ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए उनके पास विभिन्न प्रकार के मौसमी अचार उपलब्ध हैं

  • पारंपरिक अचार: आम, नींबू, मिर्च, अदरक, लहसुन, गाजर, कटहल और करेला।
  • विशेष मांग वाले अचार: करील और करौंदा का अचार, जिसे ग्राहक खूब पसंद करते हैं।

गुणवत्ता के कारण उनके अचार की मांग अब सिर्फ अम्बिकापुर तक सीमित नहीं है। रायपुर, बिलासपुर और कोरबा जैसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों के अलावा जम्मू-कश्मीर से भी लगातार ऑर्डर आ रहे हैं। इन बाहरी ऑर्डरों को वे नियमित रूप से बस सेवा के माध्यम से सुरक्षित ढंग से भेजती हैं।

पढ़ाई के साथ बिज़नेस का संतुलन और आगे का दायरा

ऋषिका वर्तमान में अम्बिकापुर स्थित सरस्वती महाविद्यालय में बीए चौथे सेमेस्टर की पढ़ाई कर रही हैं। अपनी पढ़ाई और व्यवसाय के बीच संतुलन बनाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती रहता है। सामान्य दिनों में ऋषिका खुद स्टॉल पर बैठकर ग्राहकों को अचार बेचती हैं, जबकि कॉलेज में परीक्षा या प्रैक्टिकल के दौरान उनकी मां दुकान का पूरा कामकाज संभालती हैं। ऋषिका का कहना है कि एक साथ दोनों जिम्मेदारियां निभाना कठिन अवश्य है, लेकिन खुद के पैरों पर खड़े होने का सपना उन्हें लगातार प्रेरणा देता है।

भविष्य की योजनाओं को लेकर ऋषिका का लक्ष्य अपने इस होममेड अचार के काम को एक बड़े ब्रांड के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए वे एक बेहतर व्यावसायिक साझेदार और उचित सहयोग की तलाश कर रही हैं, ताकि उत्पादन और आपूर्ति को बड़े स्तर पर ले जाया जा सके। उनका मानना है कि उत्पाद की शुद्धता और गुणवत्ता ही उनकी असली पहचान है, जिसके बल पर वे इस कारोबार को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी।

सवाल-जवाब

ऋषिका गुप्ता कहां की रहने वाली हैं और वे किस कॉलेज में पढ़ती हैं?
ऋषिका गुप्ता छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर की रहने वाली हैं और वे सरस्वती महाविद्यालय में बीए चौथे सेमेस्टर की छात्रा हैं।
ऋषिका और उनकी मां ने अचार का बिज़नेस कैसे शुरू किया था?
आर्थिक तंगी के कारण मां-बेटी ने घर पर ही देसी अचार बनाकर 30 डिब्बों के साथ फुटपाथ पर बैठकर बिक्री की शुरुआत की थी।
उनके अचार की क्या खास विशेषताएं हैं?
उनके अचार पूरी तरह बिना किसी केमिकल या प्रिजर्वेटिव के तैयार होते हैं, जिसमें घर के पिसे मसाले और कच्ची घानी सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है।
इस बिज़नेस के ऑर्डर किन-किन स्थानों से मिल रहे हैं?
अम्बिकापुर के अलावा रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और जम्मू-कश्मीर से भी अचार के ऑर्डर मिलते हैं, जिन्हें बस सेवा द्वारा भेजा जाता है।
परीक्षा के समय स्टॉल का कामकाज कौन संभालता है?
ऋषिका की परीक्षा और प्रैक्टिकल के दौरान उनकी मां स्टॉल संभालती हैं, जबकि बाकी समय ऋषिका खुद ग्राहकों को अचार बेचती हैं।
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