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खंडवा के आदर्श ने ऑटो को बना दिया पिज्जा सेंटर, 60 रुपये में जायका और भजन से भी जीत रहे दिलसक्सेस स्टोरी
1 दिन पहले· 2

खंडवा के आदर्श ने ऑटो को बना दिया पिज्जा सेंटर, 60 रुपये में जायका और भजन से भी जीत रहे दिल

मध्य प्रदेश के खंडवा के आदर्श सावनेर ने फाइनेंस की नौकरी छोड़कर एक ऑटो पर पिज्जा और सैंडविच का स्टार्टअप खड़ा किया, जहां सिर्फ 60 रुपये में पिज्जा मिलता है। पढ़ाई और बिजनेस के साथ वह भजन गायक के रूप में भी पहचान बना रहे हैं।

Rajesh KumarRajesh KumarSenior Correspondent 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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कम पूंजी और बड़े इरादे से क्या कुछ हो सकता है, इसकी मिसाल आज मध्य प्रदेश के खंडवा में एक युवक पेश कर रहा है। नाम है आदर्श सावनेर। इन्होंने न कोई बड़ी दुकान खोली, न मोटी रकम लगाई, बल्कि एक आम से ऑटो को ही अपना पिज्जा सेंटर बना डाला। आज यही छोटा सा ठिकाना शहर में जायके और मेहनत की पहचान बन चुका है।

आदर्श पहले फाइनेंस सेक्टर में नौकरी करते थे। उनके पिता पहले से ही कारोबार से जुड़े थे और पिता की प्रेरणा ने ही उनके मन में अपना कुछ करने की चाह जगाई। आखिरकार उन्होंने नौकरी को अलविदा कहकर छोटे स्तर से अपना काम शुरू करने का फैसला कर लिया। यहीं से शुरू हुआ पिज्जा और सैंडविच का स्टार्टअप, जो आज खंडवा शहर में तेजी से मशहूर हो रहा है।

ऑटो बन गया फूड स्टॉल

आदर्श ने अपने ऑटो को ही एक फूड स्टॉल का रूप दे दिया है। हर शाम जैसे ही शहर के बॉम्बे बाजार और घंटाघर इलाके में चहल-पहल बढ़ती है, उनका ‘श्याम पिज्जा सेंटर’ ग्राहकों से भरने लगता है। यह दुकान शाम 6 बजे से शुरू होती है और रात होते-होते इतनी भीड़ जुट जाती है कि वहां खड़े होने तक की जगह नहीं बचती।

कॉलेज के छात्र हों, परिवार हों या शहर के आम लोग, हर कोई यहां पहुंचता है। ऑटो में बनता गरमागरम पिज्जा, तवे पर पिघलता चीज़ और मसालों की महक लोगों को अपने आप खींच लाती है। यही वजह है कि यह छोटा सा स्टार्टअप अब शहर में खास पहचान बना चुका है।

सिर्फ 60 रुपये में पिज्जा

आदर्श की सबसे बड़ी खूबी है उनकी कीमत। वह ग्राहकों को महज 60 रुपये में पिज्जा दे रहे हैं, जो बड़े ब्रांड्स के मुकाबले काफी सस्ता है। कई ग्राहक तो यहां तक कहते हैं कि स्वाद के मामले में यह पिज्जा बड़े आउटलेट्स से भी बेहतर है। आदर्श बताते हैं कि उन्होंने बाजार को समझते हुए देखा कि छोटे शहरों में पिज्जा काफी महंगा मिलता है, जिसकी वजह से आम लोग इसे आसानी से नहीं खा पाते। इसी सोच के साथ उन्होंने कम दाम में बेहतर क्वालिटी देने का लक्ष्य रखा और आज उसी का नतीजा है कि उनका काम लगातार आगे बढ़ रहा है।

पढ़ाई और भजन भी साथ-साथ

बिजनेस के साथ-साथ आदर्श अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं। इतना ही नहीं, वह एक भजन गायक भी हैं और खाटू श्याम भजन संध्या में हिस्सा लेकर स्टेज शो करते हैं। उनके भक्ति गीतों को लोग खूब पसंद करते हैं और दूर-दूर से उन्हें कार्यक्रमों के लिए बुलाया जाता है।

एक ही समय में पढ़ाई, बिजनेस और कला, इन तीनों मोर्चों पर सक्रिय रहकर आदर्श सावनेर ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो तो कामयाबी जरूर मिलती है। आज वह खुद आत्मनिर्भर बने हैं और दूसरे युवाओं को रोजगार देने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। खंडवा का यह युवा अब उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है, जो अपने सपनों को हकीकत में बदलने का हौसला रखते हैं।

इसका आप पर असर

  • भारत में: कम लागत और सही सोच के साथ छोटे शहरों में भी फूड स्टार्टअप कामयाब हो सकता है, यह युवाओं के लिए सीधा सबक है।
  • खंडवा में: शहरवासियों को बॉम्बे बाजार और घंटाघर इलाके में शाम 6 बजे से सिर्फ 60 रुपये में गरमागरम पिज्जा मिल रहा है।

प्रेरणा और सीख

आदर्श सावनेर का सफर बताता है कि सीमित साधनों में भी बड़ा काम खड़ा किया जा सकता है। उनकी कहानी से कुछ अहम सीख मिलती हैं:

  • छोटे से शुरुआत करें: उन्होंने बड़ी दुकान का इंतजार नहीं किया, एक ऑटो से ही काम शुरू कर दिया।
  • बाजार की जरूरत समझें: छोटे शहरों में महंगे पिज्जा की कमी को पहचानकर उन्होंने कम दाम में बेहतर क्वालिटी का रास्ता चुना।
  • सुरक्षित नौकरी से डरकर न रुकें: फाइनेंस की नौकरी छोड़कर अपना काम शुरू करने का जोखिम उठाया।
  • एक से ज्यादा मोर्चे संभालें: पढ़ाई, बिजनेस और भजन गायन तीनों को साथ लेकर चले।
  • दूसरों को साथ लें: खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ वह दूसरे युवाओं को रोजगार देने की ओर भी बढ़ रहे हैं।

सवाल-जवाब

आदर्श सावनेर कौन हैं?
वह मध्य प्रदेश के खंडवा के एक युवक हैं, जिन्होंने फाइनेंस की नौकरी छोड़कर पिज्जा और सैंडविच का स्टार्टअप शुरू किया है। वह एक भजन गायक भी हैं।
उनका पिज्जा सेंटर कहां है?
उनका ‘श्याम पिज्जा सेंटर’ खंडवा के बॉम्बे बाजार और घंटाघर इलाके में एक ऑटो पर चलता है।
उनका पिज्जा कितने का मिलता है?
वह सिर्फ 60 रुपये में पिज्जा देते हैं, जो बड़े ब्रांड्स के मुकाबले काफी सस्ता है।
उनकी दुकान कब खुलती है?
उनकी दुकान हर शाम 6 बजे से शुरू होती है और रात होते-होते वहां काफी भीड़ जुट जाती है।
आदर्श ने नौकरी क्यों छोड़ी?
उनके पिता पहले से व्यवसाय से जुड़े थे और पिता की प्रेरणा पर उन्होंने नौकरी छोड़कर खुद का कुछ करने का फैसला लिया।
बिजनेस के अलावा वह और क्या करते हैं?
वह अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं और खाटू श्याम भजन संध्या में हिस्सा लेकर स्टेज शो भी करते हैं।
#सक्सेस स्टोरी#खंडवा#आदर्शसावनेर#श्यामपिज्जासेंटर#स्टार्टअप#स्ट्रीटफूड#आत्मनिर्भरता#मध्यप्रदेश#भजनगायक

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