छोटे से कस्बे से निकलकर बड़ा मुकाम हासिल करने वाले युवाओं की कतार में अब एक और नाम जुड़ गया है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने हाल ही में असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा 2024 का नतीजा घोषित किया, जिसमें छतरपुर जिले के चंदला निवासी आदित्य कुमार प्रजापति ने भूगोल विषय में कामयाबी दर्ज की है। खास बात यह है कि उन्होंने यह मुकाम सिर्फ 26 साल की उम्र में हासिल कर लिया, और वो भी किसी महंगी कोचिंग का सहारा लिए बिना।
आदित्य के माता-पिता दोनों ही चंदला में प्राइमरी टीचर हैं। पढ़ाई-लिखाई का माहौल उन्हें घर से ही मिला। उनकी शुरुआती और स्कूली पढ़ाई चंदला के सरस्वती विद्या मंदिर से हुई, जहां से उन्होंने 10वीं और 12वीं की परीक्षा पास की।
चंदला से प्रयागराज और फिर दिल्ली तक का सफर
स्कूल के बाद आदित्य प्रयागराज पहुंचे और यूनिवर्सिटी ऑफ इलाहाबाद से बीए की पढ़ाई पूरी की। ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने अंग्रेजी साहित्य, इकोनॉमिक्स और भूगोल विषय चुने थे। साल 2019 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्हें पोस्ट ग्रेजुएशन करने की सलाह मिली। लेकिन उनका असली इरादा यूपीएससी सिविल सेवा की तैयारी करने का था, इसलिए वो दिल्ली चले गए। इसी दौरान उन्होंने महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से भूगोल विषय में एमए कोर्स में दाखिला भी ले लिया।
कोरोना महामारी ने उनकी योजना बदल दी। लॉकडाउन लगा तो दिल्ली पहुंचने के महज छह महीने बाद ही उन्हें वापस छतरपुर लौटना पड़ा। इस बीच एमए की पढ़ाई चलती रही। आदित्य कहते हैं कि उन्हें यह सलाह मिली कि यूपीएससी सिविल सेवा की तैयारी के साथ-साथ जिंदगी में एक दूसरा करियर विकल्प भी तैयार रखना चाहिए। यही सोचकर उन्होंने एमए के दौरान ही यूजीसी-नेट और जेआरएफ परीक्षा पास कर ली। इसके बाद उन्होंने महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से ही पीएचडी शुरू कर दी, जो अभी जारी है और इसी साल पूरी होने वाली है।
नाकामियों से नहीं मानी हार
आदित्य की राह आसान नहीं रही। उन्होंने एमपीपीएससी राज्य सेवा परीक्षा 2021 और 2022 में दो बार मेंस परीक्षा दी, लेकिन दुर्भाग्य से दोनों ही बार मेंस क्लियर नहीं हो पाया। इतना ही नहीं, साल 2021 में भूगोल विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर की वैकेंसी भी निकली थी। उस वक्त उन्होंने लिखित परीक्षा पास की और इंटरव्यू तक पहुंचे, मगर आखिरी चयन में जगह नहीं बना पाए। इन नाकामियों के बावजूद उन्होंने कोशिश जारी रखी।
पीएचडी ने तैयारी में दिया बड़ा फायदा
आदित्य मानते हैं कि असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा पास करने में उनकी पीएचडी की पढ़ाई बेहद काम आई। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में पीएचडी के दौरान उन्हें पीजी के छात्रों को पढ़ाना भी पड़ता था, और इसके लिए खुद भी लगातार पढ़ना जरूरी था। इसी आदत ने उन्हें परीक्षा में मजबूत बनाया। साल 2017 में जो असिस्टेंट प्रोफेसर बने थे, उन्हीं के मार्गदर्शन में आदित्य ने अपनी पीएचडी और परीक्षा की तैयारी की। विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के एचओडी और प्रोफेसर भी उनकी मदद करते रहे।
बिना कोचिंग, सेल्फ स्टडी से मिली कामयाबी
आदित्य की सफलता की सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने इसके लिए छतरपुर से बाहर कदम नहीं रखा और न ही किसी तरह की कोई कोचिंग ज्वाइन की। यह परीक्षा उन्होंने पूरी तरह सेल्फ स्टडी के दम पर पास की। तैयारी में उन्होंने यूट्यूब की फ्री क्लासेस का सहारा लिया। उन्होंने न तो ऑनलाइन या ऑफलाइन कोर्स खरीदने में पैसा खर्च किया और न ही कोचिंग पर एक रुपया लगाया।
आदित्य का सक्सेस मंत्र
परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए आदित्य के पास साफ-सुथरी सलाह है। वो कहते हैं कि अगर कोई असिस्टेंट प्रोफेसर बनना चाहता है तो सबसे पहले उसे एमपीपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट से सिलेबस डाउनलोड करना चाहिए। इसके बाद सिलेबस को कवर करने वाली स्टैंडर्ड किताबें पढ़नी चाहिए। उनके मुताबिक दूसरे राज्यों के असिस्टेंट प्रोफेसर के पुराने प्रश्नपत्र हल करना बहुत मददगार साबित होता है, इसलिए इन पुराने पेपर का विश्लेषण करना और उन्हें हल करना न भूलें। आदित्य आगे कहते हैं कि अगर पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई अच्छे से की हो तो यूजीसी-नेट आसानी से क्लियर हो जाता है, और जो छात्र यूजीसी-नेट पास कर लेता है, वह असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा भी आसानी से क्रैक कर सकता है।













