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लखीमपुर खीरी में वीरपाल ने गाय पालन छोड़कर शुरू किया भेड़ पालन, 10 से 50 भेड़ों का कुनबा बनाकर अर्जित किया मुनाफासक्सेस स्टोरी
1 अग॰ 2026, 4:26 pm (89 दिन पहले)· 1

लखीमपुर खीरी में वीरपाल ने गाय पालन छोड़कर शुरू किया भेड़ पालन, 10 से 50 भेड़ों का कुनबा बनाकर अर्जित किया मुनाफा

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के किसान वीरपाल ने मवेशी पालन की चुनौतियों के बाद भेड़ पालन को अपना जरिया बनाया। महज 10 भेड़ों से शुरुआत कर उन्होंने 50 भेड़ों का मजबूत झुंड तैयार किया है, जिससे उनके परिवार को हर महीने बेहतर आमदनी मिल रही है।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में पारंपरिक कृषि और मवेशी पालन के अलावा अब भेड़ पालन की ओर ग्रामीण किसानों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। कम पूंजी, सीमित देखभाल और बाजार में बढ़ती मांग के कारण यह व्यवसाय छोटे और सीमांत किसानों के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रहा है। जिले के विभिन्न गांवों में किसान इस गतिविधि को अपनाकर अपनी पारिवारिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहे हैं और पशुपालन के पारंपरिक ढर्रे से हटकर एक लाभकारी विकल्प चुन रहे हैं।

गाय पालन की चुनौतियों के बीच लिया नया निर्णय

लखीमपुर खीरी जिले के पड़रिया तुला गांव के निवासी वीरपाल पिछले करीब 10 वर्षों से भेड़ पालन का काम कर रहे हैं। इससे पहले वह मुख्य रूप से गाय पालन से जुड़े हुए थे। हालांकि, समय बीतने के साथ मवेशियों के रख-रखाव और उनकी बिक्री में कई तरह की व्यावहारिक कठिनाइयां आने लगीं। गायों को बेचने में हो रही समस्याओं के कारण वीरपाल ने धीरे-धीरे गाय पालन कम कर दिया और एक बेहतर विकल्प के रूप में भेड़ पालन के व्यवसाय को अपनाने का फैसला किया। आज यही निर्णय उनके पूरे परिवार के भरण-पोषण और नियमित आय का मुख्य आधार बन चुका है।

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10 भेड़ों से 50 भेड़ों तक का सफल सफर

वीरपाल ने जब इस व्यवसाय की शुरुआत की थी, तब उनके पास केवल 10 भेड़ें थीं। निरंतर परिश्रम, नियमित देखभाल और सही प्रबंधन के बल पर उन्होंने अपने इस छोटे से कुनबे को लगातार बढ़ाया। आज उनके बाड़े में लगभग 50 भेड़ें मौजूद हैं। वीरपाल का मानना है कि यदि पशुपालक समय पर भेड़ों को पौष्टिक चारा, पीने के लिए स्वच्छ पानी और जरूरी टीकाकरण उपलब्ध कराएं, तो कम लागत में भी बंपर मुनाफा कमाया जा सकता है। इसमें बड़े पशुओं की तरह भारी-भरकम खर्च नहीं होता।

खिलाने का खर्च कम, गांव तक पहुंचते हैं खरीदार

बड़े जानवरों की तुलना में भेड़ों के रख-रखाव का खर्च काफी कम आता है। भेड़ें गांव के आसपास के खेतों और प्राकृतिक चरागाहों में आसानी से चर लेती हैं, जिससे अलग से महंगा चारा खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती। यही कारण है कि सीमित भूमि और कम बजट वाले किसान भी इसे बिना किसी बड़े वित्तीय जोखिम के शुरू कर सकते हैं। बाजार मूल्य की बात करें तो एक स्वस्थ और अच्छी नस्ल की भेड़ आसानी से 6,000 रुपये से लेकर 7,000 रुपये तक में बिक जाती है। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि किसानों को पशु बेचने के लिए दूर-दराज की मंडियों में भागदौड़ नहीं करनी पड़ती। स्थानीय बाजारों के अलावा पड़ोसी जिलों और अन्य राज्यों से भी व्यापारी सीधे गांव पहुंचकर पशुओं की खरीदारी करते हैं। इसके अलावा, समय-समय पर तैयार होने वाले मेमनों की बिक्री से भी किसानों को अतिरिक्त नकद आय प्राप्त होती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा

सीमित कृषि भूमि वाले परिवारों के लिए भेड़ पालन आजीविका का एक मजबूत और टिकाऊ जरिया साबित हो रहा है। योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर कोई भी किसान कुछ ही वर्षों के भीतर एक बड़ा झुंड तैयार कर अपनी नियमित आय सुनिश्चित कर सकता है। हालांकि, इस व्यवसाय में सफलता के लिए पशु स्वास्थ्य प्रबंधन बेहद अनिवार्य है। भेड़ों को बीमारियों से बचाने के लिए समय पर टीके लगाना, पेट के कीड़ों की रोकथाम हेतु कृमिनाशक दवा देना, उनके रहने के बाड़े को साफ-सुथरा व हवादार रखना और संतुलित आहार देना आवश्यक है। सही देखरेख से पशुओं का शारीरिक विकास तेजी से होता है और मृत्यु दर में भी भारी कमी आती है।

सवाल-जवाब

वीरपाल ने गाय पालन छोड़कर भेड़ पालन क्यों शुरू किया?
गायों की बिक्री में आ रही कठिनाइयों और बदलते हालातों के कारण उन्होंने धीरे-धीरे गाय पालन कम करके भेड़ पालन अपनाया।
वीरपाल ने कितने भेड़ों से काम शुरू किया था और अब उनके पास कितनी भेड़ें हैं?
उन्होंने शुरुआत में केवल 10 भेड़ें ली थीं, जो अब बढ़कर लगभग 50 भेड़ों का झुंड बन चुकी हैं।
बाजार में एक अच्छी नस्ल की भेड़ कितने रुपये में बिक जाती है?
स्वस्थ और अच्छी नस्ल की भेड़ की बाजार कीमत लगभग 6,000 रुपये से 7,000 रुपये तक मिल जाती है।
भेड़ों को बेचने के लिए किसानों को मंडियों में जाने की जरूरत क्यों नहीं पड़ती?
स्थानीय बाजारों के अलावा दूसरे जिलों और राज्यों से व्यापारी सीधे गांव पहुंचकर पशुओं की खरीदारी करते हैं।
भेड़ पालन में चारे का खर्च कम क्यों आता है?
भेड़ें आसपास के खेतों और प्राकृतिक चरागाहों में आसानी से चर लेती हैं, जिससे अलग से महंगा चारा खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।
भेड़ों को बीमारियों से बचाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?
समय पर टीकाकरण, पेट के कीड़ों की कृमिनाशक दवा, साफ-सुथरा बाड़ा और संतुलित आहार देना बेहद जरूरी है।
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