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मक्के की खेती से संवरी छत्तीसगढ़ की माया विश्वास की जिंदगी, 17 हजार के कर्ज से लखपति बनने तक का सफरसक्सेस स्टोरी
25 अग॰ 2026, 1:38 pm (65 दिन पहले)· 3

मक्के की खेती से संवरी छत्तीसगढ़ की माया विश्वास की जिंदगी, 17 हजार के कर्ज से लखपति बनने तक का सफर

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में अम्बिकापुर की निवासी माया विश्वास ने स्व-सहायता समूह से 17 हजार रुपये का ऋण लेकर मक्के की खेती शुरू की और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए। घर बैठे फसल बिकने से उनका परिवहन खर्च बच रहा है और वे अब 'लखपति दीदी' बनने की राह पर हैं।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में महिला सशक्तिकरण की एक शानदार मिसाल सामने आई है। अम्बिकापुर क्षेत्र की निवासी माया विश्वास ने बेहद कम संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत के बल पर आर्थिक तंगी को मात दी है। कभी आर्थिक परेशानियों से जूझने वाला उनका परिवार अब मक्के की खेती के जरिए मजबूती की ओर कदम बढ़ा रहा है। इस पूरी सफलता की शुरुआत एक छोटे से कर्ज के साथ हुई थी, जिसने उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल दी।

स्व-सहायता समूह का सहारा और 17 हजार का लोन

माया विश्वास ने अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए काली माई स्व-सहायता समूह से संपर्क किया। वहां से उन्हें 17 हजार रुपये का छोटा सा लोन मिला। इस पूंजी का सही उपयोग करते हुए उन्होंने मक्के की खेती करने का फैसला किया। मक्के की बुवाई और उचित देखभाल के बाद जब फसल तैयार हुई, तो उन्हें अपनी मेहनत का बेहतर फल मिला और कमाई के नए रास्ते खुल गए।

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घर से ही बिक्री और समय की बचत

माया विश्वास बताती हैं कि इस खेती से उन्हें काफी अच्छा लाभ हो रहा है। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए किसी दूर-दराज के बाजार या मंडी में नहीं जाना पड़ता। व्यापारी सीधे उनके घर से ही मक्का खरीदकर ले जाते हैं। इससे न केवल उनके समय की भारी बचत होती है, बल्कि बाजार आने-जाने में होने वाला परिवहन खर्च भी बच जाता है।

लखपति दीदी बनने की दिशा में बढ़ते कदम

स्व-सहायता समूह और जय बिहान योजना से जुड़ने से पहले माया के परिवार के सामने काफी वित्तीय चुनौतियां थीं। हालांकि, खेती से मिलने वाली नियमित आय ने परिवार की स्थिति में बड़ा सुधार किया है। माया का मानना है कि छोटे-छोटे ऋण भी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बना सकते हैं। आज वह अपनी मेहनत के दम पर ‘लखपति दीदी’ बनने का सपना साकार कर रही हैं और अन्य महिलाओं को भी इस दिशा में प्रेरित कर रही हैं।

सवाल-जवाब

माया विश्वास ने मक्के की खेती के लिए कितना लोन लिया था?
माया विश्वास ने काली माई स्व-सहायता समूह से 17 हजार रुपये का छोटा लोन लिया था।
माया विश्वास छत्तीसगढ़ के किस जिले की रहने वाली हैं?
वे छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में अम्बिकापुर क्षेत्र की निवासी हैं।
मक्के की फसल बेचने के लिए माया को बाजार क्यों नहीं जाना पड़ता?
व्यापारी सीधे उनके घर से ही मक्का खरीद लेते हैं, जिससे उनका परिवहन खर्च और समय दोनों बच जाते हैं।
माया विश्वास किस योजना व समूह से जुड़ी हुई हैं?
वे काली माई स्व-सहायता समूह और जय बिहान पहल से जुड़ी हुई हैं।
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