मां का हार गिरवी रखकर शुरू किया था धंधा, आज सीताराम पटेल के मोबाइल कारोबार का साम्राज्य पांच जिलों तकसक्सेस स्टोरी
2 घंटे पहले· 2

मां का हार गिरवी रखकर शुरू किया था धंधा, आज सीताराम पटेल के मोबाइल कारोबार का साम्राज्य पांच जिलों तक

निमाड़ के सीताराम पटेल ने मां का हार गिरवी रखकर 2006 में एक छोटी मोबाइल दुकान शुरू की थी, आज उनका कारोबार पांच जिलों में फैल चुका है और इसमें मोबाइल एजेंसी से लेकर बाटा शोरूम और बीज का कारोबार तक शामिल है।

निमाड़ के एक छोटे परिवार से निकले सीताराम पटेल की कहानी बताती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद इरादा मजबूत हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है. गांव से शहर आए सीताराम पटेल कभी दूसरों की मोबाइल दुकानों पर नौकरी किया करते थे, हाथ में ना ज्यादा पैसा था और ना ही व्यापार का कोई अनुभव. आज उनका अपना मोबाइल कारोबार पांच जिलों तक फैल चुका है और इलाके में उनकी पहचान एक बड़े कारोबारी के तौर पर बन चुकी है.

खेती-किसानी वाले परिवार से मोबाइल कारोबार तक का सफर

सीताराम पटेल बताते हैं कि उनका पूरा पारिवारिक बैकग्राउंड खेती-किसानी से जुड़ा रहा है. परिवार में किसी का भी व्यापार से कोई नाता नहीं था. ना कोई रास्ता दिखाने वाला था और ना ही व्यापार को लेकर कोई अनुभव या समझ. इसके बावजूद उन्होंने हार मानने के बजाय आगे बढ़ने का रास्ता चुना और खुद अपने दम पर सीखना शुरू किया.

ये भी पढ़ें

150 रुपए महीने की नौकरी से शुरू हुआ संघर्ष

शुरुआती दिनों में सीताराम ने एक मेडिकल दुकान पर भी काम किया था. स्कूल जाने के साथ-साथ वे सुबह-शाम मेहनत किया करते थे. उस समय उन्हें महीने के सिर्फ 150 रुपए मिलते थे, जो बाद में बढ़कर 300 रुपए तक पहुंचे. यह रकम भले ही आज के हिसाब से बहुत छोटी लगे, लेकिन इन्हीं छोटे-छोटे अनुभवों और मेहनत की आदत ने आगे चलकर उनकी असली ताकत बनने का काम किया.

रिपेयरिंग का हुनर बना टर्निंग पॉइंट, 2006 में खुली अपनी दुकान

मोबाइल की दुनिया में उतरने से पहले सीताराम ने मोबाइल रिपेयरिंग का काम बारीकी से सीखा. यही हुनर आगे चलकर उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. इसी अनुभव और सीख के दम पर उन्होंने हिम्मत जुटाई और साल 2006 में अपनी पहली छोटी सी मोबाइल दुकान शुरू की.

मां का हार गिरवी रखकर जुटाई शुरुआती पूंजी

दुकान शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन सीताराम की मां हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहीं. दुकान की शुरुआत के लिए उन्हें अपनी मां का हार तक गिरवी रखना पड़ा. उस समय यह एक छोटा और मजबूरी भरा कदम लग सकता था, लेकिन आगे चलकर यही फैसला बड़ी सफलता की नींव बना.

ईमानदारी और भरोसे से लगातार बढ़ता गया कारोबार

धीरे-धीरे सीताराम ने अपने काम और व्यवहार से ग्राहकों का भरोसा जीतना शुरू किया. ईमानदारी और अच्छी सर्विस उनकी पहचान बन गई. यही वजह रही कि जो कारोबार एक छोटी सी दुकान से शुरू हुआ था, वह लगातार आगे बढ़ता चला गया और उनका नाम इलाके में फैलने लगा.

आज पांच जिलों में फैला है मोबाइल का पूरा नेटवर्क

आज हालात यह हैं कि सीताराम पटेल का नाम पूरे निमाड़ क्षेत्र के बड़े मोबाइल कारोबारियों में गिना जाता है. उनका कारोबार अब सिर्फ एक दुकान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पांच जिलों तक फैल चुका है, जहां मोबाइल एजेंसी, रिपेयरिंग और सेल्स का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा हो चुका है और कई लोगों को रोजगार भी मिल रहा है.

मोबाइल के अलावा बाटा शोरूम और सफल सीड्स तक फैला कारोबार

सीताराम ने यहीं नहीं रुककर अपने बिजनेस को और आगे बढ़ाया. आज उनके पास मोबाइल शोरूम के साथ-साथ बाटा का शोरूम, सफल सीड्स के नाम से बीज का कारोबार और वेयरहाउस जैसी कई सफल यूनिट्स भी हैं. सीताराम कहते हैं कि किसी भी बिजनेस को खड़ा करने के लिए शुरुआत के पांच साल सबसे ज्यादा कठिन होते हैं. इस दौरान धैर्य, मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ा सहारा बनती है. अगर कोई इन शुरुआती सालों में टिक जाए, तो सफलता जरूर मिलती है.

युवाओं को सीताराम का संदेश

सीताराम पटेल युवाओं को संदेश देते हैं कि भले ही संसाधन कम हों, लेकिन अगर इरादा मजबूत हो तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. उनका कहना है कि बस लगातार मेहनत करते रहने और ग्राहकों के साथ हमेशा ईमानदारी बनाए रखने की जरूरत होती है, बाकी सफलता खुद रास्ता बना लेती है.

सवाल-जवाब

सीताराम पटेल कौन हैं?
सीताराम पटेल निमाड़ क्षेत्र के एक मोबाइल कारोबारी हैं, जिन्होंने एक छोटी सी मोबाइल दुकान से अपना कारोबार शुरू किया था.
सीताराम पटेल ने अपना कारोबार कब शुरू किया था?
उन्होंने साल 2006 में अपनी पहली छोटी मोबाइल दुकान शुरू की थी.
दुकान शुरू करने के लिए पूंजी कहां से आई?
दुकान शुरू करने के लिए सीताराम को अपनी मां का हार गिरवी रखना पड़ा था.
सीताराम का कारोबार अभी कितने जिलों में फैला है?
उनका मोबाइल कारोबार अभी पांच जिलों में फैला हुआ है, जहां मोबाइल एजेंसी, रिपेयरिंग और सेल्स का नेटवर्क है.
क्या सीताराम के पास सिर्फ मोबाइल का ही कारोबार है?
नहीं, मोबाइल शोरूम के अलावा उनके पास बाटा का शोरूम, सफल सीड्स नाम से बीज का कारोबार और वेयरहाउस जैसी यूनिट्स भी हैं.
शुरुआत में सीताराम को कितनी सैलरी मिलती थी?
शुरुआती दिनों में मेडिकल दुकान पर काम के दौरान उन्हें महीने के सिर्फ 150 रुपए मिलते थे, जो बाद में बढ़कर 300 रुपए हो गए.
सीताराम युवाओं को क्या संदेश देते हैं?
वे कहते हैं कि संसाधन कम हों तो भी मजबूत इरादे, लगातार मेहनत और ग्राहकों के साथ ईमानदारी से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR