सपनों को पूरा करने के लिए साधनों की नहीं बल्कि मजबूत इरादों और कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। इस बात को राजस्थान के नागौर जिले के श्रीबालाजी क्षेत्र के रहने वाले युवा साइकिलिस्ट राम अवतार छींपा ने सच साबित कर दिखाया है। सीमित संसाधनों के बीच आगे बढ़ने वाले राम अवतार अब देश की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनका चयन आगामी 19 से 23 अगस्त 2026 तक बेल्जियम में होने जा रही प्रतिष्ठित जूनियर ट्रैक साइक्लिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप की भारतीय टीम के लिए हुआ है, जो उनके परिवार और पूरे देश के लिए गर्व का पल है।
इस मुकाम तक पहुंचने की राह राम अवतार के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं थी। बड़े शहरों के एथलीटों को जहां आधुनिक सुविधाएं और विश्व स्तरीय संसाधन आसानी से मिल जाते हैं, वहीं ग्रामीण परिवेश से आने वाले राम अवतार को हर कदम पर संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने साइकिलिंग को केवल एक खेल के रूप में नहीं बल्कि अपने जीवन का मुख्य लक्ष्य बनाया। उनकी दैनिकचर्या में घंटों अभ्यास करना, अपनी फिटनेस पर पूरा ध्यान देना और हर दिन अपने प्रदर्शन को बेहतर करना शामिल रहा। इस दौरान कई बार मुश्किलें और असफलताएं भी सामने आईं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य पर पूरी तरह केंद्रित रहे।
राम अवतार की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके परिवार का बहुत बड़ा और प्रेरणादायक योगदान रहा है। उनके पिता प्रकाश चंद छींपा गांव में ही एक छोटी सी मिठाई की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनकी आमदनी बेहद सीमित है, लेकिन उन्होंने अपने बेटे के सपनों की उड़ान में कभी कोई बाधा नहीं आने दी। वहीं उनकी मां कौशल्या देवी ने हर विपरीत परिस्थिति और मुश्किल दौर में राम अवतार का लगातार हौसला बढ़ाया। परिवार के लिए बेटे का यह खेल केवल एक शौक नहीं था, बल्कि एक ऐसा सपना बन चुका था कि उनका बेटा एक दिन दुनिया भर में देश का नाम रोशन करेगा।
अपनी मेहनत के दम पर राम अवतार ने धीरे-धीरे खेल जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई। राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन और एशियाई स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतरीन खेल ने उन्हें भारतीय टीम का एक मजबूत दावेदार बना दिया। इसी निरंतर प्रदर्शन का नतीजा है कि आज उन्हें बेल्जियम में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने का शानदार मौका मिला है। इस समय वह इस मेगा इवेंट की तैयारियों के लिए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स, पटियाला में चल रहे आधिकारिक राष्ट्रीय शिविर में पसीना बहा रहे हैं और अपनी ट्रेनिंग को पुख्ता कर रहे हैं।
राम अवतार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुकाबला बेहद कड़ा होगा क्योंकि इसमें दुनिया भर के कई देशों के बेहतरीन खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। हालांकि, यह उपलब्धि उन्हें रातों-रात नहीं मिली है क्योंकि वह पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके अलावा एशियाई चैंपियनशिप के साथ-साथ कई राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में भी उनका प्रदर्शन सराहनीय रहा है। उनकी यह पूरी यात्रा केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं है, बल्कि उस परिवार की कहानी है जिसने आर्थिक तंगी के बावजूद अपने बेटे के बड़े सपनों को मरने नहीं दिया। यह उस मां और पिता के समर्पण की दास्तान है, जिन्होंने गांव की साधारण गलियों से निकलकर बेटे को सीधे अंतरराष्ट्रीय ट्रैक तक पहुंचा दिया। आगामी 19 अगस्त से जब राम अवतार बेल्जियम की धरती पर भारतीय टीम की जर्सी पहनकर ट्रैक पर उतरेंगे, तो उनके साथ उनके परिवार के सपने, पूरे गांव का भरोसा और उनकी वर्षों की कड़ी तपस्या भी साथ होगी।



















