कानपुर में कभी स्कूली बच्चों को तालीम देने वाली सुचेता वाही ने जब कारोबार की दुनिया में कदम रखा, तब उन्हें फुटवियर इंडस्ट्री की बुनियादी बारीकियों की कोई जानकारी नहीं थी। एक लंबे अरसे तक यानी 16 साल तक आईसीएसई बोर्ड के एक स्कूल में बतौर शिक्षिका अपनी सेवाएं देने के बाद उन्होंने वर्ष 2004 में शिक्षण की नौकरी को अलविदा कह दिया और सीधे बिजनेस की दुनिया का रुख किया। उन्होंने कानपुर के दादा नगर औद्योगिक क्षेत्र में सेफ्टी इंडस्ट्रियल शूज के निर्माण के लिए अपनी खुद की यूनिट की स्थापना की। शुरुआत किसी भी नए व्यक्ति के लिए आसान नहीं होती और उनके लिए भी यह राह काफी कठिन थी क्योंकि जूते के निर्माण की तकनीक से लेकर बाजार की नब्ज और ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों तक हर पहलू उनके लिए पूरी तरह से नया था। कारोबार के शुरुआती दो साल भारी संघर्ष और अनगिनत चुनौतियों के बीच गुजरे, लेकिन उन्होंने किसी भी मोड़ पर हार नहीं मानी और डटी रहीं।
शून्य से शुरुआत और उत्पादन की हर बारीकी को खुद सीखना
सुचेता वाही अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि जूते वे अपने दैनिक जीवन में हमेशा पहनती थीं, लेकिन एक जूता असल में कैसे तैयार होता है, इसकी उन्हें रत्तीभर भी जानकारी नहीं थी। जब उन्होंने अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू की, तो उन्होंने किसी दूसरे पर निर्भर रहने के बजाय सैंपलिंग से लेकर अंतिम उत्पादन तक की पूरी प्रक्रिया को खुद सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने काम की एक-एक बारीकी को बारीकी से समझा और यही जमीनी सीख उनके बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुई। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज उनकी इस यूनिट में निर्मित होने वाले सेफ्टी इंडस्ट्रियल शूज भारत के अलावा दुनिया के 10 से अधिक देशों में बड़े पैमाने पर निर्यात किए जा रहे हैं।
चुनौतियों से पार पाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान
उन्होंने विस्तार से बताया कि शुरुआती दौर में अपने पैरों पर बिजनेस को खड़ा करने और उसे स्थापित करने में उन्हें किन-किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। कई बार हालात इतने चुनौतीपूर्ण हो जाते थे कि कदम डगमगा जाएं, लेकिन उन्होंने हर काम को खुद अपने हाथों से सीखने की जिद ठान रखी थी। सैंपलिंग और प्रोडक्शन के तमाम चरणों को बेहद करीब से देखने और समझने के बाद उनके भीतर का आत्मविश्वास लगातार मजबूत होता चला गया। इसके बाद उनके इस उपक्रम ने धीरे-धीरे रफ़्तार पकड़ ली और कानपुर में बना उनका सामान न सिर्फ देश के विभिन्न राज्यों में बल्कि विदेशों तक अपनी मजबूत पहुंच बनाने में कामयाब रहा।
महिला और पुरुष कर्मियों की साझी मेहनत से चल रही यूनिट
सुचेता वाही की इस औद्योगिक यूनिट की एक खास बात यह भी है कि यहां महिलाएं और पुरुष दोनों कंधे से कंधा मिलाकर एक साथ काम करते हैं। उनका साफ तौर पर मानना है कि कामगारों और कर्मचारियों के लिए एक बेहतर, अनुकूल और पूरी तरह सुरक्षित कार्यस्थल तैयार करना किसी भी कारोबार का सबसे अहम हिस्सा होता है। वह अपने उद्योग में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए हमेशा पुरजोर वकालत करती हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन यानी IIA की महिला विंग की चेयरपर्सन के रूप में वह अन्य महिलाओं को भी कारोबार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए पूरी निष्ठा से सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।
महिला उद्यमियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन
उन्होंने जानकारी दी कि IIA की महिला विंग के साथ वर्तमान समय में 25 से ज्यादा महिला उद्यमी जुड़ी हुई हैं और आधिकारिक रूप से पंजीकृत हैं। हर साल इन महिला उद्यमियों की संख्या में लगभग 20 से 25 फीसदी तक की शानदार वृद्धि दर्ज की जा रही है, जो एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। उनका कहना है कि आज की तारीख में महिलाओं के भीतर खुद का कोई नया बिजनेस या उद्यम शुरू करने को लेकर पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आत्मविश्वास पैदा हुआ है। आज के समय में देश की कई महिलाएं पूरी दृढ़ता के साथ अपने दम पर बड़े उद्योग और कारोबार खड़ी कर रही हैं। उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि यदि किसी भी महिला को अपने काम में किसी भी प्रकार की सहायता की जरूरत पड़े, तो उसे उचित मार्गदर्शन और पूरा सहयोग प्रदान किया जाए।
संगठनात्मक जिम्मेदारियों के साथ बिजनेस का संतुलन
महिला विंग की चेयरपर्सन जैसी बड़ी जिम्मेदारी संभालने को लेकर सुचेता वाही का यह मानना है कि इस पद के दायित्वों के कारण वह अपने खुद के मुख्य कारोबार को उतना समय नहीं दे पाती हैं, जितना उन्हें देना चाहिए। इसके बावजूद वह अलग-अलग सेमिनार, कार्यशालाओं और बैठकों के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा महिला उद्यमियों को एक मंच पर जोड़ने और उनकी समस्याओं को गहराई से समझने का काम पूरी जिम्मेदारी के साथ करती हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी भी महिला उद्यमी को किसी भी तरह की मदद की आवश्यकता होती है, तो वह उसकी सहायता के लिए हमेशा पूरी तरह तैयार खड़ी मिलती हैं।
एक शिक्षिका से सफल उद्यमी बनने की प्रेरणाप्रद दास्तान
एक साधारण स्कूल शिक्षिका से लेकर एक प्रतिष्ठित और सफल उद्यमी बनने तक का सुचेता वाही का यह पूरा सफर इस बात का सबसे बड़ा जीवंत उदाहरण है कि जीवन में किसी भी नए काम की शुरुआत करने के लिए उस क्षेत्र का पहले से विशेषज्ञ होना कतई जरूरी नहीं है। अगर आपके भीतर कुछ नया सीखने की सच्ची इच्छा हो, कड़ी मेहनत करने का जज्बा हो और लगातार प्रयास करने की लगन हो, तो आप शून्य से भी अपनी एक बिल्कुल नई और कामयाब राह बना सकते हैं।



















