चक्रवात अर्नब का कहर: आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी तबाही पर राहुल गांधी ने जताई गहरी चिंतामेघालय के दक्षिण गारो हिल्स में नेशनल हाईवे-62 के निर्माण में देरी से आक्रोश, प्रशासन ने लगाया प्रदर्शन पर प्रतिबंधराजस्थान में बदला मौसम का मिजाज, अर्नब तूफान और पश्चिमी विक्षोभ के असर से झमाझम बारिशअलवर में घरों से गायब रहा करवा चौथ का चांद, फिर पुलिया पर पहुंची महिलाओं ने ऐसे खोला व्रत1 नवंबर से चमक जाएगी इन 6 राशियों की किस्मत, मंगल, सूर्य, शुक्र और चंद्रमा बरसाएंगे विशेष कृपाकर्नाटक में बस यात्रा जल्द हो सकती है महंगी, 4 नवंबर को हो सकता है किराए में बढ़ोतरी का ऐलानऑनलाइन बेटिंग और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की कार्रवाई के बाद नई शिकायत, कई नाम आए सामनेहमीरपुर पॉलीटेक्निक छात्र का मामला: ड्रोन ग्रांट का दावा निकला फर्जी, तीसरी मंजिल से गिरने की जांच में जुटी पुलिसपश्चिम बंगाल में घुसपैठियों को होल्डिंग स्टेशन में रखकर वापस भेजा जाएगा, शुभेंदु अधिकारी का कड़ा रुखअमित शाह ने की राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की महापरिषद की 93वीं बैठक की अध्यक्षता
बिना बिजली और शून्य जल बर्बादी: चेन्नई के चंद्रशेखरन जे. का नवाचार, 5 लाख परिवारों तक पहुंचाया स्वच्छ पेयजलसक्सेस स्टोरी
8 अग॰ 2026, 5:33 pm (82 दिन पहले)· 2

बिना बिजली और शून्य जल बर्बादी: चेन्नई के चंद्रशेखरन जे. का नवाचार, 5 लाख परिवारों तक पहुंचाया स्वच्छ पेयजल

प्लास्टिक इंजीनियर चंद्रशेखरन जे. ने टेराफिल नैनो-तकनीक से बिना बिजली चलने वाला वॉटर प्यूरीफायर बनाया है। उनका यह नवाचार राजस्थान, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के 5 लाख से अधिक परिवारों तक साफ पानी पहुंचा चुका है।

चेन्नई के 58 वर्षीय प्लास्टिक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ चंद्रशेखरन जे. ने ग्रामीण भारत में पेयजल की गंभीर समस्या को दूर करने के लिए एक विशेष नेचुरल वॉटर प्यूरीफायर विकसित किया है। खुद को 'एक्सीडेंटल एंटरप्रेन्योर' कहने वाले चंद्रशेखरन की कंपनी वत्सन वाटर फिल्टर द्वारा तैयार यह उपकरण पूरी तरह से बिना बिजली के काम करता है। यह प्यूरीफायर अब तक देश के दूरदराज इलाकों में रहने वाले लगभग 5 लाख परिवारों तक पहुंच चुका है, जहां लोग दूषित पानी पीने या बच्चों का स्कूल छुड़वाने के लिए मजबूर थे।

कॉर्पोरेट करियर से सामाजिक बदलाव की ओर यात्रा

चंद्रशेखरन जे. ने लगभग 35 वर्षों तक एक बड़ी कंपनी में प्लास्टिक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ के रूप में सेवाएं दीं। उनकी जिंदगी में मोड़ तब आया जब करीब 45 वर्ष की उम्र में वे तमिलनाडु के ग्रामीण क्षेत्रों में मंदिरों के जीर्णोद्धार कार्य के सिलसिले में गए। वहां उन्होंने देखा कि ग्रामीण लोग पीने के पानी के भारी संकट से जूझ रहे थे। स्कूलों और शौचालयों में पानी की अनुपलब्धता के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी और कई माता-पिता अपने बच्चों का स्कूल छुड़वाने के लिए विवश थे। इस स्थिति ने उन्हें एक ऐसा सस्ता और टिकाऊ विकल्प तलाशने की प्रेरणा दी जो बिना किसी जटिल तकनीक के हर घर को साफ पानी उपलब्ध करा सके।

ये भी पढ़ें

टेराफिल नैनो-तकनीक की कार्यप्रणाली और विशेषताएं

इस वॉटर फिल्टर की सबसे प्रमुख विशेषता इसकी कार्यप्रणाली है, जो सीएसआईआर-आईएमएमटी की टेराफिल नैनो-तकनीक पर आधारित है। इसमें इस्तेमाल होने वाली फिल्टर कैंडल विशेष नैनो-क्ले कणों से तैयार की जाती है। जब गंदा पानी या बारिश का पानी इस फिल्टर से होकर गुजरता है, तो इसके नैनो-कण हानिकारक बैक्टीरिया, अशुद्धियों और अतिरिक्त आयरन को ऊपरी सतह पर ही रोक लेते हैं। इसके साथ ही यह पानी के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखता है और इसमें मौजूद आवश्यक खनिजों को नष्ट नहीं होने देता, जिससे पानी का पीएच स्तर संतुलित रहता है।

पारंपरिक RO की तुलना में शून्य जल बर्बादी और शून्य रखरखाव खर्च

सामान्य आरओ (RO) प्यूरीफायर जहां प्यूरीफिकेशन के दौरान भारी मात्रा में पानी बर्बाद करते हैं, वहीं यह नेचुरल प्यूरीफायर शून्य जल बर्बादी के सिद्धांत पर काम करता है। इसमें बारिश के पानी और अत्यधिक गंदे जल को भी कुछ ही मिनटों में सुरक्षित पेयजल में बदला जा सकता है। इसके अलावा, इसके रखरखाव के लिए किसी भी प्रकार के एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (AMC) की आवश्यकता नहीं होती, जिससे ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ता। हल्का और मजबूत डिजाइन होने के कारण इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना बेहद आसान है।

ग्लोबल एक्वा एक्सपो में प्रदर्शन और देशव्यापी प्रसार

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय ग्लोबल एक्वा एक्सपो में जब चंद्रशेखरन जे. ने अपने इस नेचुरल वॉटर प्यूरीफायर का प्रदर्शन किया, तो वहां मौजूद विशेषज्ञों और दर्शकों ने इसकी सादगी और प्रभावशीलता की सराहना की। वर्तमान में यह फिल्टर राजस्थान, पूर्वोत्तर राज्यों, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के ऐसे क्षेत्रों में उपयोग किया जा रहा है जहां शुद्ध पेयजल की भारी कमी थी। इस पहल ने न केवल दूषित पानी से होने वाली बीमारियों को कम किया है, बल्कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

सवाल-जवाब

चंद्रशेखरन जे. का वॉटर प्यूरीफायर किस तकनीक पर काम करता है?
यह प्यूरीफायर सीएसआईआर-आईएमएमटी की टेराफिल नैनो-तकनीक पर काम करता है, जिसमें नैनो-क्ले कणों से बनी फिल्टर कैंडल का उपयोग किया जाता है।
क्या इस वॉटर फिल्टर को चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है?
नहीं, यह वॉटर फिल्टर पूरी तरह बिना बिजली और बिना बैटरी के काम करता है।
यह प्यूरीफायर पारंपरिक RO फिल्टर से किस प्रकार अलग है?
यह पारंपरिक RO की तरह पानी बर्बाद नहीं करता है, आवश्यक खनिजों को नष्ट होने से बचाता है और इसके लिए किसी एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (AMC) की आवश्यकता नहीं होती।
चंद्रशेखरन जे. की कंपनी का क्या नाम है और यह किन राज्यों में काम कर रही है?
उनकी कंपनी का नाम वत्सन वाटर फिल्टर है। यह राजस्थान, पूर्वोत्तर राज्यों, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित कई क्षेत्रों में 5 लाख से अधिक फिल्टर पहुंचा चुकी है।
चंद्रशेखरन जे. को यह वाटर फिल्टर बनाने की प्रेरणा कहां से मिली?
लगभग 45 वर्ष की आयु में तमिलनाडु के गांवों में मंदिर जीर्णोद्धार के दौरान उन्होंने देखा कि पानी की कमी के कारण बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ रहा था, जिससे उन्हें यह नवाचार करने की प्रेरणा मिली।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp