मध्य प्रदेश का बुरहानपुर जिला कृषि नवाचारों के लिए अपनी खास पहचान रखता है। जिले से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित मालवीर भावसा गांव के किसान बड़सिंग पाटिल ने अपनी 12 एकड़ जमीन पर फसल विविधीकरण (मिक्स फार्मिंग) का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो आसपास के क्षेत्र के लिए मिसाल बन चुका है। वह अपनी जमीन पर व्यावसायिक फसलों के साथ सब्जियों की खेती करके हर साल 6 से 7 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। उनकी सफलता केवल अपनी आर्थिक मजबूती तक सीमित नहीं है, बल्कि वह स्थानीय स्तर पर 10 से 15 लोगों को नियमित रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं।
12वीं की पढ़ाई के बाद खेत में संभाली जिम्मेदारी
बड़सिंग पाटिल की शुरुआती यात्रा की बात करें तो उन्होंने अपनी पढ़ाई कक्षा 12वीं तक पूरी की है। स्कूली शिक्षा के दौरान उनका मन पारंपरिक पढ़ाई-लिखाई में अधिक नहीं लगता था। इसके चलते उन्होंने अपना ध्यान अपने पिता के साथ कृषि कार्यों में लगाने का फैसला किया। वह प्रतिदिन पिता के साथ खेत पर जाते और कृषि कार्यों को करीब से देखते थे। खेत की मिट्टी तैयार करने से लेकर बुआई और सिंचाई की बारीकियों को उन्होंने अपने पिता से सीखा। पिता के अनुभवों और व्यावहारिक ज्ञान से प्रेरित होकर ही उन्होंने कृषि क्षेत्र को अपने मुख्य व्यवसाय के रूप में चुना।
12 एकड़ में फसलों के संयोजन से घटाया जोखिम
केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय बड़सिंग पाटिल ने 12 एकड़ भूमि में विविध फसलों की खेती शुरू की। उनके खेत में मुख्य व्यावसायिक फसलों में केला, कपास और गन्ना शामिल हैं। इसके अलावा वह मक्का, चना और सोयाबीन जैसी खाद्यान्न एवं दलहन फसलों का चक्र भी अपनाते हैं। फसलों का यह मिला-जुला चक्र न केवल जमीन की उर्वरता बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसान के जोखिम को भी काफी हद तक कम कर देता है। वह कम लागत में बेहतर तकनीक का इस्तेमाल कर उच्च उत्पादन हासिल कर लेते हैं।
सब्जियों की खेती से 8 महीने तक रोजाना कमाई
बड़सिंग पाटिल की कमाई का एक महत्वपूर्ण आधार उनके द्वारा उगाई जाने वाली सब्जी भाजी की फसलें हैं। वह अपने खेत में बैंगन, गिलकी, लौकी, कोठमीर (धनिया) और पालक जैसी दैनिक उपयोग की सब्जियां बड़े पैमाने पर लगाते हैं। सब्जियों की खासियत यह होती है कि बुआई के मात्र 30 से 35 दिन के भीतर ये बाजार में बिकने लायक तैयार हो जाती हैं। इसके बाद लगातार 8 महीने तक इनसे नियमित उत्पादन मिलता रहता है। इससे उनके पास दैनिक आधार पर नकदी का प्रवाह बना रहता है, जिससे खेत के दैनिक खर्च आसानी से निकल आते हैं।
स्थानीय निवासियों को रोजगार और सरकारी विभाग से सम्मान
खेती को एक लाभदायक व्यवसाय में बदलने के साथ-साथ बड़सिंग पाटिल सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। वह अपने खेत के प्रबंधन और फसलों की देखभाल के लिए क्षेत्र के 10 से 15 लोगों को नियमित रोजगार दे रहे हैं। उनका उद्देश्य भविष्य में अपनी कृषि गतिविधियों का विस्तार कर अधिक से अधिक ग्रामीण युवाओं को रोजगार प्रदान करना है। कम लागत में उत्कृष्ट उत्पादन और मिक्स खेती के इस सफल प्रयोग के लिए उन्हें कृषि विभाग द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।



















