पारंपरिक खेती और पशुपालन से अलग हटकर नए प्रयोग करने वाले युवा अब कृषि क्षेत्र में सफलता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में मझौलिया प्रखंड के अंतर्गत आने वाले करमवा गांव के रहने वाले 25 वर्षीय आर्यन ने ऐसा ही एक व्यावसायिक ढांचा खड़ा किया है। उन्होंने बत्तख पालन के जरिए महज एक साल के भीतर 50 लाख रुपये से अधिक की सालाना कमाई का स्तर हासिल कर लिया है। इस अनूठी उपलब्धि के बाद उनकी पहचान पूरे राज्य के सबसे सफल बत्तख पालकों में की जाने लगी है।
शुरुआती निवेश और पहले चरण की तैयारी
आर्यन के इस कृषि सफर की शुरुआत वर्ष 2025 के सितंबर महीने में हुई थी। उन्होंने लगभग 7 लाख रुपये की पूंजी लगाकर एक एकड़ क्षेत्र में फैले तालाब के साथ अपना बत्तख पालन का काम शुरू किया। शुरुआती दौर में उन्होंने 1,000 बत्तखों का एक दल तैयार किया, जिसमें लगभग 250 नर और 750 मादा बत्तखें शामिल थीं। शुरुआत के पहले तीन महीनों तक पक्षियों के उचित दाना-पानी और देखरेख का पूरा प्रबंध किया गया, ताकि वे पूरी तरह स्वस्थ होकर अंडा देने के अनुकूल बन सकें।
चौथे महीने से शुरू हुआ उत्पादन और बिक्री की रणनीति
पक्षियों के पालन-पोषण के ठीक चौथे महीने से मादा बत्तखों ने अंडे देना शुरू कर दिया, जिसके बाद आर्यन के व्यवसाय में वास्तविक आमदनी का द्वार खुला। उस समय 750 मादा बत्तखों से रोजाना औसतन 500 अंडे मिलने लगे थे। आम तौर पर बाजार में खाने के लिए बेचे जाने पर प्रति अंडा 5 से 6 रुपये का भाव मिलता था। आर्यन ने सीधे ग्राहकों को टेबल एग के रूप में बेचने के बजाय एक अलग कारोबारी रास्ता चुना।
उन्होंने इन अंडों को हैचरी संचालकों को बेचना शुरू किया, जहां 28 से 30 दिनों में अंडों से चूजे तैयार किए जाते हैं। हैचरी ऑपरेटरों को बिक्री करने पर उन्हें प्रत्येक अंडे के लिए 12 रुपये 50 पैसे का भाव मिलने लगा। सामान्य दर के मुकाबले करीब दोगुना मुनाफा मिलने के कारण उन्होंने अपने पूरे उत्पादन को हैचरी आपूर्ति से जोड़ दिया, जिससे उनकी आय में तेज इजाफा दर्ज हुआ।
तालाब का विस्तार और 5 लाख रुपये प्रति माह की आय
कारोबार से मिले भरोसे के बाद आर्यन ने वर्ष 2026 की शुरुआत में अपने काम का दायरा दोगुना करने का फैसला लिया। उन्होंने एक एकड़ का एक और तालाब विकसित किया, जिससे उनका कुल जल क्षेत्र बढ़कर दो एकड़ हो गया। इसके साथ ही उन्होंने कुल बत्तखों की संख्या बढ़ाकर 2,000 तक पहुंचा दी। क्षमता विस्तार के बाद अब उनके फार्म से प्रतिदिन 1,200 से 1,300 अंडों का नियमित उत्पादन हो रहा है।
वर्तमान में वे हर महीने लगभग 40 हजार अंडों की बिक्री बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। हैचरी नेटवर्क को लगातार की जा रही इस थोक आपूर्ति की बदौलत आर्यन की मासिक आय लगभग 5 लाख रुपये तक पहुंच गई है, जिससे सालाना आधार पर उनका टर्नओवर 50 लाख रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है।
























