भारत में स्मार्टफोन अब केवल कॉलिंग, सोशल मीडिया और वीडियो देखने का साधन नहीं रह गए हैं। मोबाइल गेमिंग का बाजार बहुत तेजी से बड़ा हो रहा है और इसके साथ ही ग्राहकों की जरूरतें भी काफी बदल चुकी हैं। आज के दौर में केवल एक तेज प्रोसेसर होना ही काफी नहीं माना जाता है, बल्कि लोग ऐसा स्मार्टफोन चाहते हैं जो लंबे समय तक गेमिंग करने के बाद भी ज्यादा गर्म न हो, जिसकी बैटरी तेजी से खत्म न हो और जो लगातार स्मूथ परफॉर्मेंस देता रहे। मॉर्डोर इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का गेमिंग मार्केट साल 2026 में लगभग 5 अरब डॉलर का है जो आगे बढ़कर 2031 तक करीब 9.89 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इस पूरे बाजार में अकेले मोबाइल गेमिंग की हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत के आसपास है। यही मुख्य वजह है कि स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां अब गेमिंग के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए नए हार्डवेयर कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल कर रही हैं।
कैसे काम करती है ड्यूल चिप टेक्नोलॉजी
सामान्य तौर पर किसी भी स्मार्टफोन में एक ही मुख्य प्रोसेसर होता है जो ऐप्स चलाने से लेकर गेमिंग, कैमरा और बैकग्राउंड में चलने वाले तमाम टास्क को संभालता है। जब कोई यूजर लंबे समय तक भारी-भरकम गेम खेलता है, तो इस अकेले प्रोसेसर पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ जाता है। इस दबाव के कारण फोन गर्म होने लगता है और गेम खेलते समय लैग या फ्रेम ड्रॉप जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं। ड्यूल चिपसेट सेटअप में मुख्य प्रोसेसर के साथ एक दूसरी डेडिकेटेड चिप भी दी जाती है। इसमें मुख्य प्रोसेसर सामान्य कंप्यूटिंग और ऐप्स का कामकाज संभालता है, जबकि दूसरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित चिप विजुअल प्रोसेसिंग, फ्रेम रेट और ग्राफिक्स को बेहतर बनाने का काम करती है। इससे मुख्य प्रोसेसर का बोझ काफी हद तक कम हो जाता है और गेमिंग का परफॉर्मेंस अधिक स्थिर बना रहता है।
गेमिंग के साथ वीडियो देखने का अनुभव भी बेहतर
इस आधुनिक तकनीक का फायदा केवल गेम खेलने वाले यूजर्स तक ही सीमित नहीं है। एआई चिप की मदद से वीडियो और स्पोर्ट्स कंटेंट का मजा भी दोगुना हो जाता है। उदाहरण के लिए, एआई तकनीक के जरिए वीडियो के फ्रेम को और बेहतर बनाया जा सकता है, जिससे तेज गति से चलने वाले सीन स्क्रीन पर बेहद स्मूथ दिखाई देते हैं। इसी प्रकार कम क्वालिटी वाले वीडियो को ज्यादा शार्प दिखाने और एचडीआर इफेक्ट को सुधारने जैसी प्रोसेसिंग भी आसानी से की जा सकती है। इसका मतलब यह हुआ कि इस तकनीक का लाभ केवल गेमिंग के दौरान ही नहीं, बल्कि फिल्में, वेब सीरीज और लाइव स्पोर्ट्स देखते समय भी उठाया जा सकता है।
26 अगस्त को आ रहा रियलमी पी4एस 5जी
इसी बढ़ते ट्रेंड के बीच रियलमी अपनी लोकप्रिय पी4 सीरीज के तहत रियलमी पी4एस 5जी को आगामी 26 अगस्त को भारतीय बाजार में लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी इस नए स्मार्टफोन को लगभग 30,000 रुपये की कीमत वाले सेगमेंट में पेश कर रही है, जिसे खासतौर पर गेमर्स और वीडियो कंटेंट देखने वाले यूजर्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इस फोन के भीतर मीडियाटेक डाइमेंसिटी 7400 अल्ट्रा प्रोसेसर के साथ एक अलग हाइपर विजन प्लस एआई चिप दी गई है। इसके अलावा इस डिवाइस में 144Hz सैमसंग 1.5K AMOLED डिस्प्ले, 3000Hz टच सैंपलिंग रेट, 8000mAh की दमदार बैटरी और 80W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट मिलने की बात सामने आई है। फोन को ठंडा रखने के लिए इसमें 7000mm² एयरफ्लो वीसी कूलिंग सिस्टम भी शामिल किया गया है।
₹30 हजार के फोन में क्यों अहम है यह बदलाव
मौजूदा समय में स्मार्टफोन बाजार के भीतर कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा सिर्फ रैम, कैमरा और प्रोसेसर तक ही सीमित नहीं रह गई है। आज के उपभोक्ता लंबे समय तक इस्तेमाल के दौरान बेहतर और भरोसेमंद परफॉर्मेंस की मांग करते हैं। ड्यूल चिपसेट इसी खास जरूरत को पूरा करने की एक बड़ी कोशिश है। यदि यह नई तकनीक बजट और मिड रेंज के स्मार्टफोन में तेजी से अपनी जगह बनाती है, तो आने वाले समय में 30,000 रुपये के आसपास मिलने वाले स्मार्टफोन्स में गेमिंग, वीडियो और एआई फीचर्स का अंतर काफी कम हो जाएगा। यानी जो बेहतरीन टेक्नोलॉजी अब तक केवल बहुत महंगे गेमिंग फोन्स में ही मिलती थी, वह अब कम कीमत वाले उपकरणों में भी आसानी से देखने को मिल सकेगी।


















