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53 साल पुराने कानून में बदलाव की तैयारी, अमेरिका में फिर से शुरू हो सकती हैं जमीन के ऊपर सुपरसोनिक उड़ानेंतकनीक
1 जुल॰ 2026, 8:50 am (29 दिन पहले)· 2

53 साल पुराने कानून में बदलाव की तैयारी, अमेरिका में फिर से शुरू हो सकती हैं जमीन के ऊपर सुपरसोनिक उड़ानें

अमेरिकी विमानन प्रशासन शोर-आधारित नए मानकों को लागू कर पुराने प्रतिबंध को हटाने की तैयारी कर रहा है, जिससे विमानन तकनीक में एक नए युग की शुरुआत होगी।

अमेरिकी आसमान में जल्द ही एक बड़ा ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि वहां के प्रशासन ने 53 साल पुराने एक कड़े कानून को हटाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इस नियम के तहत अमेरिका में जमीन के ऊपर नागरिक विमानों की सुपरसोनिक यानी ध्वनि की गति से तेज उड़ानों पर पूरी तरह से रोक लगी हुई थी। अब अमेरिकी परिवहन विभाग ने इस प्रतिबंध को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय शोर के मानकों पर आधारित एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इस ऐतिहासिक फैसले से विमानन क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने की उम्मीद है, जिससे न केवल यात्रा का समय आधा हो जाएगा, बल्कि विमानन क्षेत्र की पूरी तकनीक भी बदल जाएगी।

सुपरसोनिक उड़ान और वर्तमान अमेरिकी नियमों की स्थिति

सुपरसोनिक विमानों की तकनीक को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि सुपरसोनिक उड़ान असल में होती क्या है। जब कोई भी विमान ध्वनि की गति से भी तेज रफ्तार से उड़ान भरता है, तो उसे सुपरसोनिक श्रेणी में रखा जाता है। ध्वनि की इस गति को विमानन की भाषा में Mach 1 कहा जाता है। जमीन पर साधारण परिस्थितियों में यह गति लगभग 767 मील यानी तकरीबन 1235 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। जब कोई विमान इस रफ्तार को पार करता है, तो उसे सुपरसोनिक विमान कहा जाता है। वर्तमान में अमेरिका के भीतर ऐसे विमानों के व्यावसायिक संचालन पर बेहद कड़ा प्रतिबंध लागू है। अमेरिकी नियमों के अनुसार, जमीन के ऊपर किसी भी नागरिक विमान को Mach 1 से अधिक की रफ्तार पर उड़ने की अनुमति नहीं है। यदि किसी कंपनी या शोधकर्ता को ऐसी उड़ान भरनी होती है, तो उन्हें अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन यानी FAA से बेहद खास परिस्थितियों में विशेष अनुमति लेनी पड़ती है। आमतौर पर यह विशेष अनुमति केवल अनुसंधान, अकादमिक प्रयोगों और आबादी से बहुत दूर सैन्य क्षेत्रों या विशिष्ट परीक्षण कॉरिडोर्स के लिए ही दी जाती है।

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शोर के नए मानकों पर आधारित होगा नया कानून

अब अमेरिकी परिवहन विभाग और FAA ने प्रस्ताव दिया है कि वर्ष 1973 से चले आ रहे इस पुराने प्रतिबंध को पूरी तरह से बदल दिया जाए। नए नियमों के तहत अब गति पर प्रतिबंध लगाने के बजाय विमान के शोर की एक सीमा तय की जाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि कोई नया सुपरसोनिक विमान ध्वनि की गति से तेज उड़ता है, लेकिन उसका शोर सरकार द्वारा तय की गई सीमा से कम रहता है, तो उसे अमेरिकी मुख्य भूमि के ऊपर भी उड़ान भरने की अनुमति मिल सकेगी। इस नई व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए FAA इस साल के अंत तक हवाई अड्डों पर विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग के समय होने वाले शोर को लेकर भी नए नियम पेश करेगा। अमेरिकी सरकार की योजना इन दोनों नए नियमों को वर्ष 2027 के मध्य तक पूरी तरह से अंतिम रूप देने की है, ताकि विमान निर्माता कंपनियां अपने नए मॉडलों का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन शुरू कर सकें।

नासा का नया विमान X-59 बना इस बदलाव की वजह

इस ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का एक नया और क्रांतिकारी विमान है, जिसका नाम X-59 है। इसी साल 5 जून को इस अत्याधुनिक प्रयोगात्मक विमान ने एक बेहद महत्वपूर्ण परीक्षण उड़ान पूरी की। इस उड़ान के दौरान विमान ने 43400 फीट की ऊंचाई पर 713 मील यानी लगभग 1148 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार हासिल की। इस विमान की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता यह है कि यह पुराने सुपरसोनिक विमानों की तरह कान फाड़ने वाला सोनिक बूम पैदा नहीं करता। इसके उड़ने पर जमीन पर केवल एक हल्की सी थंप जैसी धीमी आवाज सुनाई देती है। NASA के वैज्ञानिकों का दावा है कि इस अनूठी तकनीक के जरिए ध्वनि प्रदूषण की उस बड़ी समस्या को पूरी तरह से हल किया जा सकता है, जो दशकों से विमानन उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी।

सरकारी नेतृत्व और तकनीकी प्रगति पर जोर

इस बदलाव को लेकर FAA प्रमुख ब्रायन बेडफोर्ड ने कहा कि आधुनिक एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, नए हल्के और मजबूत मैटेरियल्स, शोर कम करने वाली तकनीकों और नए परिचालन तरीकों ने मिलकर यह संभव बना दिया है कि पुराने समय वाले सोनिक बूम की समस्या को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि इन तकनीकी बदलावों की मदद से 1970 के दशक के प्रतिबंध को हटाने का रास्ता साफ हो गया है, जिससे आम जनता पर भी शोर का कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। अमेरिका के परिवहन मंत्री शॉन पी. डफी ने कहा कि जमीन के ऊपर सुपरसोनिक उड़ानों की वापसी केवल यात्रा को तेज करने का साधन नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी इनोवेशन को एक नई उड़ान देने और विमानन क्षेत्र में क्रांति लाने वाला कदम है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में सरकार सुरक्षित तरीके से इस तकनीक को जल्द से जल्द आम लोगों तक पहुंचाने के लिए काम कर रही है। इसके साथ ही व्हाइट हाउस के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति कार्यालय के निदेशक माइकल क्राट्सियोस ने कहा कि पुराने और आउटडेटेड नियमों ने लंबे समय से हमारे इंजीनियरों और विमान निर्माताओं की प्रगति को बाधित कर रखा था। इन नियमों में बदलाव से देश का विमानन उद्योग मजबूत होगा, नई नौकरियां पैदा होंगी और भविष्य की विमानन तकनीक का विकास अमेरिका में ही होगा।

कॉनकॉर्ड का इतिहास और उससे जुड़े सबक

व्यावसायिक स्तर पर सुपरसोनिक उड़ानों का इतिहास काफी पुराना है, जिसका सबसे बड़ा और प्रसिद्ध उदाहरण कॉनकॉर्ड विमान था। एयर फ्रांस और ब्रिटिश एयरवेज द्वारा संचालित यह विमान Mach 2 की रफ्तार से उड़ता था, जो कि ध्वनि की गति से लगभग दोगुनी है। इस अद्भुत रफ्तार की वजह से कॉनकॉर्ड अटलांटिक महासागर को केवल साढ़े तीन घंटे में पार कर लेता था। हालांकि, कड़े अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय शोर नियमों के कारण कॉनकॉर्ड को केवल समुद्र के ऊपर ही सुपरसोनिक गति से उड़ने की इजाजत थी। जब यह विमान जमीन के ऊपर से गुजरता था, तो इसे अपनी गति को घटाकर सामान्य सबसोनिक स्तर पर लाना पड़ता था, जिससे इसकी दक्षता काफी कम हो जाती थी। इसके अलावा, अत्यधिक ईंधन की खपत, बहुत ज्यादा संचालन खर्च और सीमित हवाई मार्गों के कारण कॉनकॉर्ड सेवा आर्थिक रूप से घाटे का सौदा साबित होने लगी। आखिरकार, वर्ष 2003 में इस ऐतिहासिक विमान सेवा को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।

निजी क्षेत्र की बड़ी तैयारियां और भविष्य की योजनाएं

NASA के इन सफल परीक्षणों और नियमों में आने वाले बदलावों को देखते हुए निजी विमानन कंपनियां भी इस क्षेत्र में तेजी से आगे आ रही हैं। अमेरिकी कंपनी बूम सुपरसोनिक और स्पाइक एयरोस्पेस जैसी कंपनियां अत्याधुनिक यात्री विमानों के निर्माण में जुटी हैं। इन कंपनियों का मुख्य उद्देश्य भविष्य में ट्रांस-अटलांटिक उड़ानों के समय को घटाकर 4 घंटे से भी कम करना है। यदि अमेरिकी सरकार के नए नियम समय पर लागू हो जाते हैं, तो आने वाले सालों में आम यात्रियों के लिए बेहद तेज, सुरक्षित और शांत सुपरसोनिक उड़ानों का सपना सच हो जाएगा।

आखिर 1973 में क्यों लगाया गया था यह कड़ा प्रतिबंध?

इस ऐतिहासिक बदलाव की महत्ता को समझने के लिए हमें इतिहास में जाना होगा कि आखिर अमेरिका ने 1973 में जमीन के ऊपर इन उड़ानों को पूरी तरह प्रतिबंधित क्यों किया था। उस समय के सुपरसोनिक विमान जब उड़ते थे, तो वे अपने पीछे एक बहुत ही तेज दबाव तरंग छोड़ते थे जिसे सोनिक बूम कहा जाता है। यह आवाज जमीन पर किसी बहुत बड़े और भयानक धमाके की तरह सुनाई देती थी। इस तेज आवाज और कंपन के कारण आबादी वाले इलाकों में घरों की खिड़कियां हिल जाती थीं, शीशे टूट जाते थे और इमारतों के ढांचे को भी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता था। लगातार होने वाले इस भारी शोर ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी बुरा असर डालना शुरू कर दिया था। जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी सरकार ने जमीन के ऊपर ऐसी उड़ानों को कानूनन प्रतिबंधित कर दिया था।

सवाल-जवाब

सुपरसोनिक उड़ान क्या होती है और इसकी गति कितनी होती है?
जब कोई विमान ध्वनि की गति से भी तेज रफ्तार से उड़ता है, तो उसे सुपरसोनिक उड़ान कहते हैं। ध्वनि की गति को Mach 1 कहा जाता है, जो लगभग 1235 किलोमीटर प्रति घंटा (767 मील प्रति घंटा) होती है।
अमेरिका ने 1973 में जमीन के ऊपर सुपरसोनिक उड़ानों पर प्रतिबंध क्यों लगाया था?
यह प्रतिबंध इसलिए लगाया गया था क्योंकि उस समय के विमान सोनिक बूम (तेज धमाका) पैदा करते थे। इससे घरों की खिड़कियों के शीशे टूट जाते थे, इमारतों को नुकसान का खतरा था और लगातार होने वाले भारी शोर से लोग परेशान होते थे।
नासा का X-59 विमान पुराने सुपरसोनिक विमानों से अलग कैसे है?
NASA का X-59 एक प्रयोगात्मक विमान है जो अपनी अनूठी डिजाइन की वजह से सोनिक बूम के रूप में होने वाले तेज धमाके को रोक देता है। इसके उड़ने पर जमीन पर केवल एक हल्की सी 'थंप' जैसी धीमी आवाज ही सुनाई देती है।
प्रसिद्ध कॉनकॉर्ड सुपरसोनिक विमान का परिचालन क्यों बंद हो गया था?
कॉनकॉर्ड विमान को अत्यधिक परिचालन खर्च, भारी ईंधन खपत और कड़े शोर नियमों के कारण केवल समुद्र के ऊपर ही सुपरसोनिक गति से उड़ने की इजाजत थी। इन आर्थिक नुकसानों के कारण इसे वर्ष 2003 में बंद कर दिया गया।
अमेरिकी सरकार इन नए नियमों को कब तक अंतिम रूप देने की तैयारी कर रही है?
अमेरिकी परिवहन विभाग और FAA की योजना इन नए शोर-आधारित नियमों को वर्ष 2027 के मध्य तक पूरी तरह से अंतिम रूप देने की है।
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