सार्वजनिक स्थानों, भीड़भाड़ वाले बाजारों अथवा यात्रा के दौरान मोबाइल चोरी होने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। किसी भी व्यक्ति की जेब, पर्स अथवा मेज पर रखे फोन पर हाथ साफ करते ही चोर की सबसे पहली कोशिश डिवाइस को तत्काल स्विच ऑफ करने की होती है। अपराधी भलीभांति जानते हैं कि जब तक फोन ऑन रहेगा और मोबाइल नेटवर्क से जुड़ा रहेगा, तब तक उसकी वास्तविक लोकेशन ट्रेस की जा सकती है। इसी ट्रैकिंग से बचने के लिए वे फोन को तुरंत बंद कर देते हैं, जिससे पीड़ित के लिए अपने कीमती गैजेट को खोजना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
यदि किसी डिवाइस में सुरक्षा से जुड़े बुनियादी प्रबंध पहले से सक्रिय न हों, तो अपराधी बेखौफ होकर फोन के साथ छेड़छाड़ करते हैं। इसके विपरीत, सही समय पर की गई तकनीकी तैयारी चोरों के रास्ते में भारी रुकावटें खड़ी कर देती है। कुछ खास सुरक्षा विकल्पों को सक्रिय कर देने पर न केवल फोन को बंद करना लगभग असंभव हो जाता है, बल्कि डिवाइस पूरी तरह बेकार साबित होने के डर से कई बार अपराधी उसे फेंकने या छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं। इन आवश्यक सुरक्षा विकल्पों को कॉन्फ़िगर करने में महज पांच से दस मिनट का समय लगता है, लेकिन यह आपके फोन की हिफाजत को कई गुना बढ़ा देता है।
फाइंड माय डिवाइस को हमेशा सक्रिय रखें
एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम में गूगल अकाउंट के माध्यम से प्रदान की जाने वाली फाइंड माय डिवाइस सुविधा सुरक्षा की पहली और सबसे मजबूत ढाल है। इसे चालू करने के लिए फोन की मुख्य सेटिंग्स में जाकर गूगल अथवा सिक्योरिटी विकल्प में प्रवेश करना होता है, जहां फाइंड माय डिवाइस का टॉगल बटन मिलता है। एक बार यह सुविधा ऑन हो जाने के बाद, फोन खो जाने अथवा चोरी हो जाने की स्थिति में यूजर किसी भी दूसरे कंप्यूटर, लैपटॉप या अन्य स्मार्टफोन से अपने डिवाइस को इंटरनेट के जरिए ट्रैक कर सकते हैं।
इस टूल की सहायता से यूजर दूर बैठे ही अपने फोन की लाइव जीपीएस लोकेशन मानचित्र पर देख सकते हैं। इसके अलावा रिमोटली फोन की स्क्रीन को एक नए पासवर्ड से तुरंत लॉक किया जा सकता है, जिससे चोर डिवाइस का कोई भी निजी डेटा नहीं देख पाता। यदि फोन आसपास ही कहीं गिरा हो तो तेज आवाज में सायरन अथवा रिंग बजाई जा सकती है, भले ही फोन साइलेंट मोड पर क्यों न हो। इतना ही नहीं, यदि फोन मिलने की संभावना बिल्कुल खत्म लगे तो इसी टूल से फोन का सारा डेटा हमेशा के लिए मिटाया जा सकता है। जब चोर यह देखता है कि फोन लगातार ट्रैक हो रहा है और रिमोटली लॉक हो चुका है, तो वह पकड़े जाने के डर से फोन को वहीं छोड़ देने में ही अपनी भलाई समझता है।
मजबूत स्क्रीन लॉक और पावर ऑफ प्रोटेक्शन
अक्सर लोग सुविधा के चक्कर में स्क्रीन लॉक के लिए बेहद सामान्य स्वाइप या आसान पैटर्न का इस्तेमाल करते हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से बहुत बड़ी भूल है। स्क्रीन लॉक हमेशा कम से कम 6 अंकों के जटिल पिन या एक मजबूत अक्षरांकीय पासवर्ड के साथ सेट होना चाहिए। आधुनिक एंड्रॉयड स्मार्टफोन में ऐसी सुरक्षा व्यवस्था होती है कि यदि फोन की स्क्रीन लॉक है, तो पावर बटन दबाकर फोन को स्विच ऑफ अथवा रीस्टार्ट करने पर भी डिवाइस पिन या पासवर्ड की मांग करता है।
जब तक स्क्रीन लॉक का सही पिन दर्ज नहीं किया जाएगा, तब तक फोन बंद नहीं होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि चोरी करने के बाद भी अपराधी फोन को तुरंत स्विच ऑफ नहीं कर पाएगा। फोन लगातार चालू रहेगा, सिम कार्ड के जरिए मोबाइल डेटा अथवा वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्टेड रहेगा और बैकग्राउंड में फाइंड माय डिवाइस को अपनी लोकेशन भेजता रहेगा। यूजर को चाहिए कि वे त्वरित अनलॉक के लिए फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक जैसे बायोमेट्रिक विकल्पों का इस्तेमाल जरूर करें, लेकिन उसके साथ एक मजबूत 6 अंकों का बैकअप पिन अनिवार्य रूप से जोड़कर रखें।
सिम कार्ड पर अनिवार्य पिन लॉक लगाएं
अक्सर देखा गया है कि जब चोर फोन को सीधे तौर पर बंद नहीं कर पाते, तो वे सबसे पहले सिम ट्रे को बाहर निकालकर सिम कार्ड फेंक देते हैं या किसी दूसरे फोन में डालने की कोशिश करते हैं। इस खतरे से निपटने के लिए सिम कार्ड पर पिन लॉक लगाना सबसे कारगर उपाय है। इसके लिए फोन की सेटिंग्स में सिक्योरिटी अथवा सिम कार्ड लॉक सेक्शन में जाकर सिम लॉक की सुविधा को सक्रिय किया जा सकता है।
सिम पिन लॉक सक्रिय हो जाने के बाद जब भी फोन को दोबारा रीस्टार्ट किया जाएगा अथवा उस सिम कार्ड को निकालकर किसी अन्य हैंडसेट में डाला जाएगा, तो वह बिना सही पिन दर्ज किए काम ही नहीं करेगा। कोई भी व्यक्ति उस सिम का उपयोग कॉलिंग, इंटरनेट या ओटीपी हासिल करने के लिए नहीं कर सकेगा। जब फोन लॉक हो और सिम कार्ड भी किसी काम का न रहे, तो ग्रे मार्केट में उस हैंडसेट की रीसेल वैल्यू खत्म हो जाती है। चोर को लगने लगता है कि यह हैंडसेट अब किसी भी कीमत पर बेचने लायक नहीं बचा है। ऐसी स्थिति में अक्सर अपराधी उस फोन को लावारिस हालत में फेंक देते हैं, जिससे पुलिस या किसी भले व्यक्ति के जरिए फोन वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
चोरी होने पर तुरंत उठाएं ये जरूरी कदम
यदि दुर्भाग्यवश फोन चोरी हो जाए तो घबराने के बजाय त्वरित निर्णय लेना आवश्यक है। किसी भी परिचित के मोबाइल या नजदीकी कंप्यूटर पर तुरंत फाइंड माय डिवाइस वेब पोर्टल खोलें, अपने गूगल खाते में लॉगिन करें और फोन को फौरन लॉक करने का कमांड भेजें। स्क्रीन पर अपनी लाइव लोकेशन का स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें और नजदीकी पुलिस थाने में जाकर तुरंत आधिकारिक शिकायत दर्ज करवाएं।
हालांकि तकनीक की दुनिया में कोई भी सुरक्षा उपाय शत-प्रतिशत गारंटी नहीं देता, लेकिन ये तीनों बुनियादी सेटिंग्स मिलकर चोरों के लिए इतनी जटिलताएं पैदा कर देती हैं कि वे डिवाइस का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाते। आपकी थोड़ी सी सतर्कता और दस मिनट की यह सेटिंग आपके कीमती हैंडसेट के साथ-साथ आपके बैंक खातों, निजी तस्वीरों और संवेदनशील डेटा को पूरी तरह सुरक्षित रख सकती है।





















