उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में औद्योगिक विकास, आधुनिक तकनीक और रोजगार के नए अवसरों को गति देने के लिए अहम नीतिगत निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में मंगलवार को आयोजित राज्य कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण विकास प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इनमें नोएडा में चार बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने और ग्रेटर नोएडा में एक अत्याधुनिक रोबोटिक्स पार्क तैयार करने की कार्ययोजना को आधिकारिक मंजूरी दी गई है। इन चारों औद्योगिक परियोजनाओं के जरिए कुल 1,709.84 करोड़ रुपये की पूंजी का निवेश किया जाएगा, जबकि नए रोबोटिक्स पार्क से भविष्य में एक लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद जताई गई है।
चार प्रमुख कंपनियों का 1,709.84 करोड़ रुपये का निवेश
कैबिनेट की इस बैठक में चार प्रमुख औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इस प्रशासनिक मंजूरी के बाद कंपनियों के लिए रियायतें और वित्तीय प्रोत्साहन हासिल करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ सकेगी। प्रस्तावित निवेश योजना के तहत चार कंपनियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां और निवेश लक्ष्य दिए गए हैं।
- हैवेल्स इंडिया लिमिटेड: यह घरेलू एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्माता कंपनी नोएडा में अपने तकनीकी और संचालन विस्तार के लिए 879 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही है, जो इस सूची में सबसे बड़ी पूंजी हिस्सेदारी है।
- एलजी सॉफ्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड: सॉफ्टवेयर समाधान और शोध कार्यों से जुड़ी यह इकाई 634 करोड़ रुपये की लागत से अपना नया केंद्र स्थापित करेगी।
- अमेरिप्राइज इंडिया एलएलपी: वित्तीय सलाहकार और परिसंपत्ति प्रबंधन से जुड़ी यह वैश्विक कंपनी नोएडा में 112.84 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू करेगी।
- मेटलाइफ ग्लोबल ऑपरेशन्स सपोर्ट सेंटर: अंतरराष्ट्रीय बीमा और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में कार्यरत यह संस्थान 84 करोड़ रुपये की लागत से अपनी परिचालन इकाई का विस्तार करेगा।
इन सभी निवेश प्रस्तावों को मिलाकर कुल राशि 1,709.84 करोड़ रुपये बनती है। इस पूंजी से नोएडा में सूचना प्रौद्योगिकी, उन्नत शोध, वित्तीय सेवाओं और परामर्श गतिविधियों से जुड़े आधुनिक ढांचे का तेजी से विस्तार होगा।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर की कार्यप्रणाली और महत्व
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर दरअसल ऐसे रणनीतिक परिचालन केंद्र होते हैं, जहां दुनिया भर में कार्यरत बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने तकनीकी, डिजिटल और प्रशासनिक कार्य केंद्रीय स्तर पर संचालित करती हैं। इन केंद्रों में केवल सामान्य बैक-ऑफिस काम नहीं होते, बल्कि उच्च स्तरीय शोध, कोर इंजीनियरिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा एनालिटिक्स और जटिल वित्तीय प्रबंधन का संचालन किया जाता है। उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष नीति का प्राथमिक उद्देश्य वैश्विक कंपनियों को अपनी विशेषज्ञ इकाइयों के साथ प्रदेश में आमंत्रित करना है, ताकि यहां के उच्च शिक्षित युवाओं को अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय कार्य अनुभव प्राप्त हो सके।
ग्रेटर नोएडा में 69.52 एकड़ में बनेगा रोबोटिक्स पार्क
कैबिनेट ने तकनीक और ऑटोमेशन के क्षेत्र में राज्य को अग्रणी बनाने के लिए ग्रेटर नोएडा में 69.52 एकड़ भूमि पर एक समर्पित रोबोटिक्स पार्क विकसित करने की योजना को भी मंजूरी दे दी है। इस पूरी परियोजना को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए दो अलग-अलग जोनों में विभाजित किया गया है।
जोन-1 के लिए कुल आठ एकड़ जमीन तय की गई है। इस हिस्से का विकास सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल के आधार पर किया जाएगा। इस साझेदारी में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की इक्विटी हिस्सेदारी 26 प्रतिशत रहेगी, जबकि शेष 74 प्रतिशत हिस्सेदारी चयनित औद्योगिक साझेदार कंपनी के पास होगी। इस जोन के निर्माण के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अपने स्तर से 21.1 करोड़ रुपये का वित्तीय अंशदान देगा। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से परियोजना के लिए 30 साल की लंबी अवधि के वास्ते 126.2 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
जोन-2 के लिए 61.52 एकड़ भूमि का बड़ा रकबा आरक्षित रखा गया है। इस क्षेत्र में विभिन्न निजी विनिर्माण और प्रौद्योगिकी कंपनियां सीधे पूंजी लगाकर अपनी औद्योगिक इकाइयां और सहायक सुविधाएं तैयार करेंगी। इस दूसरे चरण के बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार पर किसी भी तरह का प्रत्यक्ष पूंजीगत दायित्व नहीं होगा, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा।
स्थानीय प्रतिभाओं और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
प्रशासनिक अनुमानों के मुताबिक, रोबोटिक्स पार्क के पूर्ण रूप से चालू होने पर करीब एक लाख से ज्यादा नए रोजगार के मौके पैदा हो सकते हैं। वास्तविक रोजगार सृजन इस बात पर निर्भर करेगा कि औद्योगिक इकाइयां कितनी तेजी से स्थापित होती हैं और उनका व्यावसायिक संचालन किस स्तर पर पहुंचता है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हाई-एंड तकनीकी केंद्रों और स्वचालित विनिर्माण क्लस्टर की स्थापना से पश्चिमी उत्तर प्रदेश पूरे देश में आधुनिक उद्योगों और सेवा क्षेत्र के प्रमुख केंद्र के रूप में और अधिक मजबूत होगा।


















