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असम जल्द चुनेगा प्राइवेट पार्टनर, देश का पहला अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमातकनीक
24 अग॰ 2026, 10:35 am (1 घंटे पहले)· 1

असम जल्द चुनेगा प्राइवेट पार्टनर, देश का पहला अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा

असम सरकार अपने प्रस्तावित अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट असमशैट के लिए निजी क्षेत्र के साझीदार के चयन के अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि यह पहल राज्य को अंतरिक्ष तकनीक क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी।

गुवाहाटी। असम सरकार अपने आगामी सैटेलाइट प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए निजी क्षेत्र के साझीदार के चयन की प्रक्रिया के अंतिम दौर में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जानकारी दी है कि इसके साथ ही राज्य देश का ऐसा पहला राज्य बनने की राह पर है जो खुद का अर्थ ऑब्जर्वेशन सिस्टम विकसित करेगा। इस महत्वाकांक्षी उपग्रह को असमशैट नाम दिया गया है और इसे डीबीएलओटीटी यानी डिजाइन, बिल्ड, लॉन्च, ऑपरेट, ट्रेन और ट्रांसफर मॉडल के तहत तैयार किया जाएगा।

निजी अंतरिक्ष कंपनियों से मिला मजबूत रिस्पॉन्स

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए एक संदेश में बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त कार्यान्वयन साझीदार की पहचान करने के वास्ते इस साल की शुरुआत में एक्सप्रेशंस ऑफ इंटरेस्ट आमंत्रित किए गए थे। देश के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के उद्यमों की ओर से मिले जबरदस्त उत्साह के बाद अब प्रक्रिया अपने अंतिम और बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है। वर्तमान में विशेष कमेटियों द्वारा इन प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है।

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गवर्नेंस और सुरक्षा में मिलेगी मदद

मुख्यमंत्री के मुताबिक असमशैट का आना राज्य के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा क्योंकि अब तक असम केवल सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल करता आया है, लेकिन इस पहल के बाद वह अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के पूरे इकोसिस्टम में एक सक्रिय हिस्सेदार बन जाएगा। इस कदम से राज्य में प्रशासनिक कामकाज और नीतियों का क्रियान्वयन अधिक तेजी से और पुख्ता सबूतों के आधार पर हो सकेगा।

बजट में रखी गई थी प्रोजेक्ट की नींव

इस अनूठी परियोजना की घोषणा सबसे पहले मार्च के महीने में तब की गई थी जब वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य का बजट पेश किया जा रहा था। तत्कालीन वित्त मंत्री अजंता नेग ने अपने बजट भाषण में इस उपग्रह के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि यह सैटेलाइट राज्य की सामाजिक-आर्थिक योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए सटीक आंकड़े जुटाने में मदद करेगा और साथ ही सीमाओं पर चौकसी को भी पुख्ता करेगा।

आईएनएसपीएसीई और इसरो का सहयोग

बजट भाषण के दौरान यह भी साफ किया गया था कि भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के तहत आने वाले IN-SPACe यानी इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंडAuthorisation सेंटर के साथ मिलकर इस सैटेलाइट को स्थापित किया जाएगा ताकि जरूरी डेटा का निर्बाध प्रवाह बना रहे। इसके अलावा कृषि, आपदा प्रबंधन, बुनियादी ढांचे का विकास, सीमा सुरक्षा और पुलिस संचालन जैसे क्षेत्रों में भी इसके इस्तेमाल की रूपरेखा तैयार की गई है। इस पूरी योजना के तहत छात्रों को भी प्रोत्साहित करने की बात कही गई है ताकि वे आईएनएसपीएसीई और इसरो के मार्गदर्शन में प्रायोगिक उपग्रहों के निर्माण से जुड़ सकें।

सवाल-जवाब

असम के इस प्रस्तावित सैटेलाइट का क्या नाम है?
इस प्रस्तावित उपग्रह को असमशैट नाम दिया गया है।
असमशैट परियोजना को किस मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है?
इस उपग्रह को डीबीएलओटीटी यानी डिजाइन, बिल्ड, लॉन्च, ऑपरेट, ट्रेन और ट्रांसफर मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है।
इस सैटेलाइट प्रोजेक्ट की घोषणा सबसे पहले कब की गई थी?
इसकी घोषणा मार्च के महीने में वित्तीय वर्ष 2025-26 के राज्य बजट प्रस्तुतीकरण के दौरान की गई थी।
यह प्रोजेक्ट किस केंद्रीय एजेंसी के सहयोग से स्थापित किया जा रहा है?
यह परियोजना भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत आने वाले IN-SPACe के सहयोग से स्थापित की जा रही है।
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