मानसून में कान की सफाई करने की जल्दबाजी पड़ सकती है भारी, जानिए क्यों खतरनाक है कॉटन बड्स का इस्तेमालकेरल में तिरुवोनम 2026 का उत्साह, जानें नक्षत्र के शुभ समय और राजा महाबली का महत्वमॉनसून के मौसम में हरा धनिया सड़ने से बचाएं, इन घरेलू तरीकों से हफ्तों तक रहेगा तरोताजाबॉन्ड यील्ड और ट्रेजरी की घोषणा पर टिकी सोने की चाल, 4 अरब डॉलर तक बढ़ा बायबैक दायरागंधराज में नहीं खिल रहे फूल? कलियों की ड्रॉपिंग रोककर पौधे को फूलों से भरने के अचूक उपायरक्षाबंधन पर कैसी होनी चाहिए राखी, जानिए धार्मिक शास्त्रों के खास नियमब्रिक्स समिट में शामिल होने अगले महीने भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग, 400 अधिकारियों का होगा बड़ा काफिलाहिजाब पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद सियासत तेज, ओपी राजभर ने अखिलेश यादव से मांगा जवाबश्रीलंका के खिलाफ दूसरा टेस्ट जीतते ही WTC अंक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचेगा भारत80,000 डॉलर के पार निकला बिटकॉइन, रिकॉर्ड तेजी के बीच मुनाफावसूली और गिरावट का मंडराया खतरा
महंगाई की मार: प्याज के दाम हुए 60 रुपये प्रति किलो, चीनी भी हुई महंगीमनी
24 अग॰ 2026, 10:56 am (1 दिन पहले)· 3

महंगाई की मार: प्याज के दाम हुए 60 रुपये प्रति किलो, चीनी भी हुई महंगी

देश के कई हिस्सों में रसोई के जरूरी सामान जैसे प्याज और चीनी के दाम काफी बढ़ गए हैं। इससे आम आदमी के महीने के खाने-पीने के बजट पर सीधा असर पड़ रहा है।

किचन में इस्तेमाल होने वाली दो बेहद जरूरी चीजें आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने लगी हैं। देश के तमाम बाजारों में प्याज और चीनी के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे हर महीने घर का खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है। खासकर खाने-पीने की चीजों पर पहले से ही दबाव झेल रहे परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी चिंता का विषय बन गई है।

तेजी से बढ़े प्याज के दाम

कुछ महीने पहले तक जो प्याज बाजार में 25 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वह अब कई जगहों पर 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है। आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में यह उछाल और भी ज्यादा देखने को मिला है, जहां कुछ ही हफ्तों के भीतर कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं। हालांकि अलग-अलग राज्यों और स्थानीय बाजारों में दाम अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन ऑल-इंडिया औसत भले ही कम हो, पर खुदरा खरीदारों को काफी ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं।

ये भी पढ़ें

क्यों महंगे हुए प्याज?

इस ताजा बढ़ोतरी की मुख्य वजहें सप्लाई में कमी, खराब मौसम और प्रमुख उत्पादक राज्यों से कम आवक बताई जा रही हैं। भारतीय रसोई में प्याज का इस्तेमाल हर रोज होता है। दाल-सब्जी से लेकर बिरयानी और स्नैक्स तक हर जगह इसका उपयोग किया जाता है, इसलिए उपभोक्ता इससे बच नहीं सकते। ऐसे में अगर दाम 10 से 20 रुपये भी बढ़ जाते हैं, तो पूरे महीने के बजट पर इसका असर साफ दिखता है।

सरकार के स्तर पर प्रयास

बढ़ते दामों पर काबू पाने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। बाजार में बफर स्टॉक से प्याज की सप्लाई की जा रही है और नासिक जैसे बड़े उत्पादक केंद्रों से ज्यादा खपत वाले बाजारों तक माल पहुंचाया जा रहा है। इसका मकसद आपूर्ति को सामान्य करना और कीमतों को नीचे लाना है।

चीनी की कीमतों में भी भारी उछाल

सिर्फ सब्जियां ही नहीं, बल्कि चीनी भी लगातार महंगी होती जा रही है। जुलाई के महीने में जो चीनी औसतन 48 रुपये किलो बिक रही थी, वह अगस्त आते-आते 55 रुपये प्रति किलो से ऊपर निकल गई। कई शहरों में खुदरा उपभोक्ता इसके लिए 60 रुपये से ज्यादा चुका रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर भाव 68 से 70 रुपये प्रति किलो तक बोले जा रहे हैं।

त्योहारों के सीजन पर असर

यह समय ऐसा है जब चीनी की कीमतें बढ़ना उपभोक्ताओं के लिए और भी ज्यादा भारी पड़ सकता है, क्योंकि देश में त्योहारी सीजन की शुरुआत हो रही है। इस दौरान लड्डू, बर्फी, घर पर बनने वाली मिठाइयों और तमाम स्नैक्स की खपत काफी बढ़ जाती है। गन्ने की फसल को मौसम की वजह से हुए नुकसान, उत्पादन में कमी और त्योहारी मांग के चलते यह तेजी आई है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियां और स्टॉक होल्डिंग भी वजहों में शामिल हैं।

घरेलू बजट पर कितना असर?

अगर एक परिवार हर महीने 5 किलो प्याज खरीदता है और भाव 25 से बढ़कर 60 रुपये हो जाते हैं, तो सिर्फ प्याज का खर्च 125 रुपये से बढ़कर 300 रुपये हो जाएगा। इसी तरह अगर कोई परिवार 4 किलो चीनी इस्तेमाल करता है और भाव 48 से 56 रुपये हो जाते हैं, तो बिल करीब 32 रुपये बढ़ जाएगा। अकेले देखने पर यह छोटी रकम लग सकती है, लेकिन सभी जरूरी चीजों के दाम एक साथ बढ़ने पर यह बोझ काफी बड़ा हो जाता है।

सवाल-जवाब

प्याज के दाम बढ़कर कितने हो गए हैं?
कुछ बाजारों में प्याज के दाम बढ़कर करीब 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जो कुछ महीने पहले 25 रुपये प्रति किलो थे।
चीनी की कीमतों में कितना उछाल आया है?
जुलाई में जो चीनी करीब 48 रुपये प्रति किलो थी, वह अगस्त में बढ़कर 55 रुपये प्रति किलो से अधिक हो गई है।
कीमतों में बढ़ोतरी के क्या मुख्य कारण हैं?
सप्लाई में कमी, मौसम की खराबी, फसल को नुकसान और त्योहारी सीजन की मांग इसके मुख्य कारण हैं।
सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या कर रही है?
सरकार बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतार रही है और नासिक जैसे प्रमुख केंद्रों से मांग वाले बाजारों तक आपूर्ति बढ़ा रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR