प्राचीन समय में हमारे ऋषि-मुनि प्रकृति के नियमों के अनुकूल जीवन जीते थे, जिसकी वजह से वे न केवल स्वस्थ रहते थे बल्कि सत्तर और अस्सी की उम्र में भी पूरी तरह जवान और ऊर्जावान दिखते थे। आधुनिक युग में हालांकि विज्ञान और चिकित्सा ने भारी तरक्की कर ली है, लेकिन भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण आज के युवा तीस की उम्र पार करते ही ऊर्जाहीन महसूस करने लगते हैं और उनके शरीर में कई तरह की बीमारियां घर करने लगती हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या आज के समय में भी साठ या सत्तर की उम्र तक पूरी तरह तंदुरुस्त रहना संभव है। इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए जाने-माने जेरिएट्रिशियन डॉक्टर प्रसून चटर्जी ने जीवन को बेहतर और सेहतमंद बनाए रखने के लिए सात बहुत ही उपयोगी और कारगर सूत्र बताए हैं, जिनका पालन करके कोई भी व्यक्ति उम्र के इस पड़ाव पर भी स्वस्थ रह सकता है।
पर्याप्त और सुकून भरी नींद लें
डॉक्टर प्रसून चटर्जी के अनुसार तंदुरुस्त रहने के लिए सबसे पहला और जरूरी कदम रोजाना कम से कम आठ घंटे की गहरी और चैन की नींद लेना है। वैज्ञानिक शोधों से भी यह बात साबित हो चुकी है कि जब हम सोते हैं तो हमारा शरीर आंतरिक रूप से अपनी मरम्मत खुद करता है और सारे अंगों को दोबारा तरोताजा करता है। इसलिए आज से ही यह तय कर लें कि हर रात बिना किसी खलल के आठ घंटे की नींद पूरी करेंगे। कोशिश यह रहनी चाहिए कि बीच में नींद टूटे नहीं, लेकिन अगर बिना जागे लगातार सात घंटे की भी गहरी नींद मिल जाए तो वह किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं होती।
कम मात्रा में भोजन करें
आज के दौर में हमारे चारों तरफ खाने-पीने की इतनी चीजें मौजूद हैं जो हमें बार-बार आकर्षित करती हैं, लेकिन पैकेटबंद चीजें, फास्ट फूड और तमाम तरह का जंक फूड कई गंभीर बीमारियों का मुख्य कारण बन चुका है। इसलिए हमेशा घर का बना ताजा भोजन ही खाएं और वह भी सीमित मात्रा में लें। डॉक्टर प्रसून चटर्जी सलाह देते हैं कि आज से ही अपनी सामान्य कैलोरी की मात्रा में बीस प्रतिशत की कटौती कर लें। इसके पीछे का सही पैमाना यह है कि जब भी आप भोजन करें तो अपनी कुल भूख का आधा हिस्सा अन्न, फल, सब्जियां और पौष्टिक चीजों से भरें। इसके बाद पेट का जो हिस्सा खाली बचता है, उसमें से आधा पानी से भर लें और थोड़ा सा हिस्सा पूरी तरह खाली छोड़ दें। यानी अपनी कुल भूख का पचहत्तर से अस्सी प्रतिशत हिस्सा ही खाएं और बाकी का हिस्सा बिना भरे रहने दें।
वजन के हिसाब से प्रोटीन का सेवन
हमारे देश में अधिकांश लोगों के खानपान में प्रोटीन की मात्रा कम पाई जाती है, जिसके कारण शरीर अंदर से कमजोर होने लगता है। इसलिए कम खाएं लेकिन जो भी खाएं वह पूरी तरह पौष्टिक होना चाहिए, जिसका सीधा मतलब है कि भोजन में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में मौजूद हो। सामान्य तौर पर एक वयस्क व्यक्ति को रोजाना साठ से सत्तर ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इसका सीधा गणित यह है कि आपके शरीर का जितना भी वजन है, उसके प्रति किलोग्राम पर एक ग्राम प्रोटीन मिलना चाहिए। उदाहरण के तौर पर यदि किसी का वजन पचास किलो है तो उसे प्रतिदिन पचास ग्राम प्रोटीन की जरूरत है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए दालें, दूध, विभिन्न प्रकार के बीज, सूखे मेवे और ताजे फल अपनी डाइट में शामिल करें। अगर आप मांसाहारी हैं तो अंडे और चिकन ब्रेस्ट बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं, हालांकि लाल मांस के सेवन से जितना हो सके बचना चाहिए।
शाम ढलने से पहले करें डिनर
डॉक्टर प्रसून चटर्जी बताते हैं कि हमारे पूर्वज और ऋषि-मुनि हमेशा सूर्यास्त के बाद भोजन करने से परहेज करते थे क्योंकि वे प्रकृति के बुनियादी नियमों का पूरी तरह पालन करते थे। रात के समय विश्राम और नींद की अवस्था में हमारा पेट भोजन को पचाने का काम करता है। हमारे शरीर का एक तय जैविक चक्र यानी सर्कैडियन रिदम होता है, जिसके तहत सूरज ढलने के बाद शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता और चयापचय की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। समय पर और जल्दी रात का खाना खा लेने से पाचन तंत्र को भोजन ठीक से पचाने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है, जिससे वजन नियंत्रण में रहता है, एसिडिटी की समस्या नहीं होती और नींद की गुणवत्ता में भी काफी सुधार होता है।
रोजाना करें तीस मिनट की वॉक
यदि आप किसी भी प्रकार की कठिन कसरत या जिम नहीं जा पाते हैं, तो भी दिनभर में निकालकर कम से कम आधे घंटे की तेज सैर जरूर करें। रोजाना नियमित रूप से वॉक करने से शरीर को एक साथ कई अनगिनत फायदे मिलते हैं। इससे दिल की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल का स्तर हमेशा नियंत्रण में रहता है। यह मांसपेशियों में इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाकर रक्त शर्करा को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा सैर करने से दिमाग में एंडोर्फिन जैसे खुशी देने वाले हार्मोन निकलते हैं, जिससे मानसिक तनाव कम होता है और शरीर की ऊर्जा बनी रहती है।
हमेशा खुश रहने की आदत डालें
डॉक्टर प्रसून चटर्जी का कहना है कि एक स्वस्थ और फिट जीवन जीने का सबसे बड़ा मंत्र हर हाल में खुश रहना है। अत्यधिक तनाव की वजह से शरीर में कॉर्टिसोल नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है जो कई तरह की बीमारियों को बुलावा देता है, लेकिन यदि आप प्रसन्नचित्त रहते हैं तो यह हानिकारक हार्मोन कम मात्रा में निकलता है और आप बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं। खुश रहने का सबसे पहला नियम यही है कि छोटी-छोटी बातों पर तनाव न लें। हालांकि तनाव हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी आता है, लेकिन जो इंसान इसका सही प्रबंधन करना सीख जाता है वही जीवन का असली आनंद ले पाता है। इसके लिए योग और ध्यान सबसे असरदार साधन हैं। इसके अलावा अपने सामाजिक दायरे को बढ़ाएं, अच्छे दोस्त बनाएं, उनके साथ समय बिताएं, घूमने जाएं और परिवार के सदस्यों के साथ लगातार संवाद बनाए रखें। अनजान लेकिन अच्छे लोगों से मेलजोल बढ़ाना और समय-समय पर अपने शहर से बाहर सैर पर जाना इन छोटी-छोटी चीजों में ही असली सुकून छिपा होता है।
जीवनभर कुछ नया सीखते रहें
हमारे देश में यह एक बहुत बड़ी और आम समस्या बन चुकी है कि लोग चालीस की उम्र पार करते ही कुछ भी नया सीखने की प्रक्रिया रोक देते हैं। ऐसा करने से जीवन धीरे-धीरे बोझिल औररसहीन हो जाता है, इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप हमेशा अपने अंदर के विद्यार्थी को जिंदा रखें और कुछ नया सीखते रहें। इसके लिए यह कतई जरूरी नहीं है कि आप केवल पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी चीजें ही सीखें। आप खाना बनाने की कोई नई विधा सीख सकते हैं, कोई ऐसा नया खेल खेल सकते हैं जिसमें दिमाग का इस्तेमाल हो या कोई उलझाने वाली पहेली सुलझा सकते हैं। सुडोकू जैसे दिमागी खेल मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद साबित होते हैं। आप गणित के नए तौर-तरीके सीख सकते हैं या किसी बिल्कुल नए देश और संस्कृति के बारे में गहरी जानकारियां जुटा सकते हैं। ऐसी हजारों रोचक चीजें दुनिया में मौजूद हैं जिन्हें आप बहुत आसानी से सीख सकते हैं और अपने जीवन को तरोताजा रख सकते हैं।


















