आधुनिक एआई मॉडल इन दिनों उन्नत साइबर सुरक्षा कार्यों में माहिर हो चुके हैं। ये प्रणालियां कोड बेस में छिपी गंभीर कमियों को तुरंत ढूंढ सकती हैं और तेजी से सुरक्षा स्कैन कर सकती हैं। कई बार ये एजेंट बिना किसी नियंत्रण के काम करते हुए बाहरी सिस्टम में सेंध लगाने की क्षमता भी दिखाते हैं। इन तमाम दावों को करीब से देखने के लिए एक तकनीकी लेखक ने अपने घर के वाई-फाई नेटवर्क पर इस तरह के एक अनियंत्रित एजेंट को आजमाने का फैसला किया।
कुछ दिनों तक चले इस प्रयोग के दौरान इस एआई एजेंट ने घर के कई स्मार्ट उपकरणों में सुरक्षा खामियां ढूंढ निकालीं। इसने एक कंप्यूटर में सेंध लगाई और यह भी साबित कर दिया कि अनियोजित तरीके से तैयार किए गए कोड में ढेरों समस्याएं होती हैं। हालांकि इस पूरी गतिविधि के दौरान घर के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी थी और हर नई कमजोरी सामने आने पर केवल निराशा ही हाथ लगी।
बिना प्रतिबंध वाले मॉडल और एब्लिड्रेशन प्रक्रिया
इस तरह का जोखिम भरा कदम उठाने का विचार एब्लिड्रेशन एआई नामक एक स्टार्टअप के सामने आने के बाद आया। सामान्य तौर पर अधिकांश प्रमुख एआई मॉडल सुरक्षा कारणों से किसी भी सिस्टम की कमजोरियों को ढूंढने या उसमें सेंध लगाने से साफ इनकार कर देते हैं। लेकिन ओपन-वेट मॉडल के भीतर कुछ खास पैटर्न में बदलाव करके इन पाबंदियों को हटाया जा सकता है। इसी प्रक्रिया को एब्लिड्रेशन कहा जाता है, जिसके जरिए मॉडल की मना करने की क्षमता को बदला जाता है।
एआई से सुरक्षा नियंत्रण हटाना भले ही जोखिम भरा लगे, लेकिन यह तकनीक नई नहीं है। शैक्षणिक शोधकर्ता और साइबर सुरक्षा फर्म इस तरह के अनियंत्रित मॉडल्स का उपयोग सॉफ्टवेयर की गहराई से जांच करने के लिए करती हैं। इसी तरह की तकनीक का उपयोग एंथ्रोपिक के मिथोस और ओपनएआई के अस्त्रा जैसे मॉडल भी करते हैं, जिन्हें केवल भरोसेमंद ग्राहकों के लिए सीमित रखा गया है।
सस्ती कीमत पर उन्नत साइबर क्षमताएं
एब्लिड्रेशन एआई कई ऐसे मॉडल्स की पेशकश करती है जिनसे सभी पाबंदियां हटा दी गई हैं। इनमें सबसे शक्तिशाली मॉडल जेड.एआई का नवीनतम कोडिंग एजेंट है। इसकी मदद से कोई भी व्यक्ति मामूली कीमत चुकाकर मिथोस और अस्त्रा जैसी उन्नत साइबर क्षमताओं का उपयोग कर सकता है। इस स्टार्टअप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेवन का मानना है कि इस तरह के मॉडल व्यापक रूप से उपलब्ध कराना एक बेहतर रक्षात्मक कदम है। इससे अच्छे लोगों को हैकरों और स्कैमर्स का मुकाबला करने में मदद मिलती है।
डेवन का यह भी कहना है कि विमानन से लेकर बैंकिंग तक के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे चलाने वाली कंपनियां लगातार एआई एजेंटों को अपना रही हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई भी गलत नीयत वाला व्यक्ति इन एजेंटों का दुरुपयोग न कर सके।
घरेलू उपकरणों में मिली सुरक्षा खामियां
इस प्रयोग की शुरुआत के लिए एब्लिड्रेशन एआई पर खाता बनाकर साइबरस्ट्राइक नामक सॉफ्टवेयर को स्थापित किया गया। इस टूल की मदद से मॉडल को स्थानीय नेटवर्क की जांच करने का निर्देश दिया गया। कुछ ही पलों में इस एजेंट ने उसी नेटवर्क पर दर्जनों हार्डवेयर प्रणालियों का पता लगा लिया और कई खामियों की सूची तैयार कर ली।
एजेंट ने सबसे पहले प्रिंटर की गलत सेटिंग्स के बारे में बताया, जिसका मतलब था कि नेटवर्क पर मौजूद कोई भी व्यक्ति आसानी से उसमें लॉग इन कर सकता था। यदि प्रिंट कतार में बैंक विवरण या मेडिकल रिकॉर्ड जैसे संवेदनशील दस्तावेज होते, तो यह बड़ी समस्या बन सकती थी। इसके अलावा स्टीरियो सिस्टम से जुड़ी जानकारी लीक होने की बात भी सामने आई।
फायरवॉल और वाई-फाई सुरक्षा के सबक
अनियंत्रित एजेंट ने नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए कई उपयोगी सुझाव भी दिए। पुराना फर्मवेयर अपडेट करने और प्रिंटर को सुरक्षित करने के अलावा उसने स्मार्ट स्पीकर जैसे आईओटी उपकरणों को एक अलग गेस्ट नेटवर्क पर रखने की सलाह दी। इससे यदि कोई उपकरण हैक भी हो जाता, तो वह मुख्य पीसी तक नहीं पहुंच पाता। इसके अलावा बिना सोचे-समझे तैयार किए गए वेब प्रोजेक्ट्स की जांच करने पर एपीआई क्रेडेंशियल्स में कई कमियां पाई गईं।
जब एजेंट को नेटवर्क की एक लिनक्स मशीन की जांच करने को कहा गया, तो उसने अन्य प्रणालियों के नाम के आधार पर एक काम करने वाला यूजरनेम ढूंढ निकाला। इसके बाद उसने एक क्रिप्टोग्राफिक कुंजी ढूंढ ली और बिना पासवर्ड के ही सिस्टम में लॉग इन कर लिया। हालांकि इस दौरान यह चिंता भी सताने लगी कि यदि यह एजेंट किसी बाहरी नेटवर्क पर पहुंच जाता, तो स्थितियां कितनी गंभीर हो सकती थीं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ की चेतावनी
टाफ्ट्स विश्वविद्यालय में साइबर सुरक्षा और कानून के विशेषज्ञ शनान कोहनी का कहना है कि डिजिटल दुनिया में बड़े बदलाव आने वाले हैं। उनके अनुसार हमलावर हमेशा नई तकनीकों को सबसे पहले अपनाते हैं। किसी भी किले की सुरक्षा के लिए उसकी हर एक ईंट को मजबूत रखना पड़ता है, जबकि किले में सेंध लगाने के लिए केवल एक ढीली ईंट ढूंढने की जरूरत होती है।
भले ही लंबे समय में इन क्षमताओं के आने से सॉफ्टवेयर अधिक सुरक्षित हो जाएं, लेकिन अधिकांश संगठनों के पास सुरक्षा को लेकर अन्य चिंताएं भी होती हैं। प्रयोग के अंत में इस बिना सुरक्षा वाले मॉडल को बंद करके सामान्य और अधिक सुरक्षित मॉडल का उपयोग फिर से शुरू कर दिया गया।
एआई सुरक्षा का भविष्य और बचाव
जब तक ओपन-वेट मॉडल पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया जाता, तब तक उन्नत एआई हैकिंग तकनीकें व्यापक रूप से उपलब्ध रहेंगी। एमआईटी के प्रोफेसर और एआई सुरक्षा विशेषज्ञ अलेक्जेंडर माड्री का कहना है कि हमें लोगों को इन क्षमताओं का उपयोग करने में मदद करनी चाहिए। उनका मानना है कि स्वतंत्र और ओपन सोर्स उपकरणों के लिए हमेशा जगह रहेगी क्योंकि सुरक्षा की दुनिया में इस तरह के दृष्टिकोण लंबे समय तक टिकते हैं।
हालांकि मुख्य चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि पावर प्लांट या वित्तीय बाजारों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को संभालने वाले प्रबंधकों के पास औसत लोगों की तुलना में अधिक शक्तिशाली एआई तक पहुंच हो। इस तरह की तकनीकों का उपयोग करना रोमांचक और डरावना दोनों है, लेकिन यदि आने वाले समय में साइबर हमले बढ़ने वाले हैं, तो खुद को तैयार रखना ही एकमात्र विकल्प है।



















