सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार की गई पुरानी शैली की तस्वीरों का एक नया दौर छाया हुआ है। इंटरनेट पर आम लोगों से लेकर बड़े सेलिब्रिटीज तक हर कोई अपनी सामान्य तस्वीरों को 1960, 1970, 1980 और 1990 के दशकों के विंटेज लुक में बदल रहा है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि तस्वीर में व्यक्ति का मूल चेहरा और उसकी पहचान पूरी तरह सुरक्षित रहती है, जबकि उसके कपड़े, हेयरस्टाइल, बैकग्राउंड और फोटो के रंग पूरी तरह उस बीते हुए दौर में पहुंच जाते हैं।
इन तस्वीरों को देखने पर ऐसा आभास होता है मानो इन्हें किसी पुरानी पारिवारिक एल्बम या किसी प्रतिष्ठित फैशन मैगजीन के पुराने पन्नों से निकाला गया हो। पुराने जमाने के खास हेयरस्टाइल, बड़े आकार के वस्त्र, विंटेज रंग और फिल्म कैमरों वाली दानेदार बनावट इन एआई तस्वीरों को बेहद आकर्षक और सजीव बना रही है। यदि आप भी अपनी किसी साधारण तस्वीर को इन अलग-अलग दशकों के फैशन और परिवेश में ढालना चाहते हैं, तो चैटजीपीटी, गूगल जेमिनी, ग्रोक या अन्य किसी भी एआई फोटो एडिटिंग टूल का उपयोग कर सकते हैं।
1960 के दशक का रेट्रो स्टूडियो पोर्ट्रेट
अपनी तस्वीर को साठ के दशक के शालीन और कुलीन अंदाज में ढालने के लिए एक विशेष निर्देश का उपयोग किया जा सकता है। इसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि चेहरे की बनावट, त्वचा का रंग और प्राकृतिक रूप बिल्कुल अपरिवर्तित रहें। इस प्रॉम्प्ट के जरिए तस्वीर को उस दौर की सधी हुई डिजाइन वाली पोशाक, विंटेज आभूषण और काफी वॉल्यूम वाले क्लासिक रेट्रो हेयरस्टाइल से लैस किया जाता है। पृष्ठभूमि में साठ के दशक के स्टूडियो जैसा परिष्कृत माहौल रखा जाता है, जिसमें हल्की दिशा वाली रोशनी, हल्का फिल्म ग्रेन और पुरानी एनालॉग कैमरा फोटो जैसा टेक्सचर शामिल होता है ताकि यह पूरी तरह वास्तविक लगे।
1970 का ग्लैमरस और गर्म रंगों वाला दौर
सत्तर के दशक की तस्वीरों में एक खास तरह की गर्माहट और ग्लैमर दिखाई देता है। इस शैली को अपनाने के लिए एआई टूल को निर्देश दिया जाता है कि वह चेहरे की पहचान से कोई समझौता किए बिना व्यक्ति को मिट्टी जैसे गर्म रंगों, हल्के और लहराते कपड़ों, आकर्षक बड़ी ज्वेलरी तथा उस दौर के लेयर्ड हेयरस्टाइल से सजाए। इस प्रक्रिया में पृष्ठभूमि को एक विंटेज इंटीरियर में बदल दिया जाता है जिसमें सुनहरी माहौल वाली रोशनी और भूरे तथा एंबर रंग का प्रभाव होता है। इससे तस्वीर किसी खूबसूरत पारिवारिक या सत्तर के दशक की फैशन फोटो जैसी प्रतीत होती है।
1980 के दशक का बॉलीवुड और हॉलीवुड अंदाज़
अस्सी के दशक का फैशन अपनी बोल्डनेस और नाटकीयता के लिए जाना जाता है, जिसे भारतीय और पश्चिमी दोनों रूपों में तैयार किया जा सकता है। बॉलीवुड के अस्सी के दशक वाले लुक के लिए तस्वीर में गहरे और चमकीले रंग, बड़ी स्टेटमेंट ईयररिंग्स और उस दौर के वॉल्यूम वाले बाल जोड़े जाते हैं। इसी तरह हॉलीवुड के अस्सी के दशक के ग्लैमर को दर्शाने के लिए चौड़े कंधों वाले कपड़े, शानदार ड्रेस, बेहतरीन हेयरस्टाइल और चमकदार मेकअप का उपयोग किया जाता है। इन सभी बदलावों के दौरान भी मूल चेहरे की विशेषताओं और त्वचा के प्राकृतिक रंग को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाता है ताकि एआई का प्रभाव बनावटी न लगे।
1990 के दशक का सहज और स्टाइलिश लुक
नब्बे के दशक की तस्वीरें अत्यधिक भड़कीले होने के बजाय एक सहज और शांत सुंदरता लिए होती हैं। इस दौर के लुक को पाने के लिए एआई को ऐसे निर्देश दिए जाते हैं जो बहुत हल्की ज्वेलरी, चमकदार होंठ और हल्के स्मोकी आई मेकअप को प्राथमिकता देते हैं। इसमें पृष्ठभूमि को किसी साधारण स्टूडियो, बेडरूम या उस दौर के शहरी कैफे में बदल दिया जाता है। हल्की प्राकृतिक रोशनी और थोड़े कम चमकीले तथा हल्के फीके रंग इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, जिससे यह तस्वीर वास्तव में नब्बे के दशक में खींची गई किसी पुरानी फोटो जैसी दिखाई देती है।
मूल पहचान को सुरक्षित रखना सबसे अहम
इन सभी अलग-अलग दशकों के विंटेज लुक तैयार करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि तस्वीर में दिखने वाले व्यक्ति की पहचान किसी भी स्थिति में न बदले। एआई टूल्स को दिए जाने वाले हर निर्देश में इस बात की स्पष्ट शर्त होती है कि चेहरे के फीचर्स, त्वचा का टोन और फेस शेप पूरी तरह मूल तस्वीर जैसे ही रहने चाहिए। इससे परिणाम यह निकलता है कि तस्वीर चाहे कितनी भी पुरानी शैली में क्यों न ढल जाए, उसमें मौजूद व्यक्ति की मौलिकता बरकरार रहती है और परिणाम पूरी तरह स्वाभाविक व आकर्षक नजर आता है।



















