बिहार के खगड़िया जिले में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में एक नया कदम उठाया गया है। खेती में पानी की कमी की समस्या से जूझ रहे अन्नदाताओं को राहत देने के लिए सरकार की ओर से सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य लागत को कम करना और फसल की पैदावार को बेहतर बनाना है, ताकि कम संसाधनों में भी अधिक लाभ कमाया जा सके।
ड्रिप सिंचाई पर मिलने वाली आर्थिक सहायता
जिला उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत किसानों को ड्रिप सिस्टम लगवाने के लिए 55 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत प्रति हेक्टेयर अधिकतम 33,747 रुपये की सहायता राशि तय की गई है। एक किसान अपने खेतों में अधिकतम 12.5 एकड़ तक के क्षेत्रफल के लिए इस सुविधा का लाभ उठा सकता है। खगड़िया जिले में इस वर्ष इस योजना के तहत लगभग 400 एकड़ जमीन को कवर करने का लक्ष्य तय किया गया है। ड्रिप पद्धति अपनाने से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे जल की बर्बादी रुकती है और सिंचाई में आने वाला खर्च भी काफी हद तक कम हो जाता है।
मिनी स्प्रिंकलर योजना के जरिए मिलने वाला लाभ
ड्रिप प्रणाली के अलावा किसानों को मिनी स्प्रिंकलर तकनीक स्थापित करने के लिए भी वित्तीय सहायता दी जा रही है। इस योजना के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 25,269 रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। खगड़िया जिले के लिए इस विशेष घटक के अंतर्गत 20 एकड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया के नियम और लाभ प्राप्त करने के तौर-तरीके ड्रिप सिंचाई के समान ही रखे गए हैं।
सिंचाई योजना का मुख्य उद्देश्य
प्रशासन का मानना है कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के उपयोग से खेतों की सिंचाई व्यवस्था में सुधार होगा। इस पूरी योजना का मूल लक्ष्य पानी की एक-एक बूंद बचाना, खेती पर आने वाले खर्च को न्यूनतम करना और कुल उत्पादकता में वृद्धि करना है, जिससे किसानों का आर्थिक विकास सुनिश्चित हो सके।


















