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ई-रिक्शा चालकों को ब्लूटूथ से परेशान करने वाला BAT-BMS ऐप एपल और गूगल के स्टोर से बाहरतकनीक
3 जुल॰ 2026, 9:59 pm (116 दिन पहले)· 5

ई-रिक्शा चालकों को ब्लूटूथ से परेशान करने वाला BAT-BMS ऐप एपल और गूगल के स्टोर से बाहर

सरकार के निर्देश पर ई-रिक्शा को दूर से बंद करने में इस्तेमाल हो रहा विवादित BAT-BMS ऐप गूगल प्ले स्टोर और एपल ऐप स्टोर से हटा दिया गया है, कुल दो ऐप्स डिलीट किए गए हैं।

ई-रिक्शा चलाने वालों के लिए एक ऐप बड़ी मुसीबत बन गया था, जो दूर बैठे किसी अनजान शख्स को उनकी गाड़ी बंद करने की ताकत दे रहा था। सरकार के निर्देश पर इस विवादित BAT-BMS ऐप को अब गूगल प्ले स्टोर और एपल ऐप स्टोर दोनों से हटा दिया गया है। इस कार्रवाई में कुल दो ऐप्स को डिलीट किया गया है।

क्या है पूरा मामला

आरोप है कि इन ऐप्स के जरिए कुछ लोग ई-रिक्शा को दूर बैठे-बैठे ही बंद कर दे रहे थे। सुरक्षा को लेकर बढ़ती आशंका और ऐप के गलत इस्तेमाल की आशंका के चलते यह कदम उठाया गया है। मामले की जांच और निगरानी आगे भी जारी रहेगी। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर BAT BMS ऐप से जुड़े कई वीडियो और पोस्ट तेजी से वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि इस ऐप की मदद से लोग ई-रिक्शा को दूर से बंद कर रहे थे। इससे कई चालकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। रिक्शा के अचानक बंद होने की घटनाएं बढ़ीं और चालकों की शिकायतें भी लगातार आने लगीं, जिसके बाद यह मामला गंभीर हो गया और संबंधित अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी।

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ब्लूटूथ के जरिए कैसे होता था खेल

दरअसल कई सस्ते ई-रिक्शा में लिथियम-आयन बैटरी लगाई जाती है और इन बैटरियों के अंदर एक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, यानी BMS मौजूद रहता है। यह सिस्टम बैटरी की पूरी सेहत पर नजर रखता है, जैसे बैटरी में कितना चार्ज बचा है, वह कहीं ज्यादा गर्म तो नहीं हो रही और उसमें कोई तकनीकी खराबी तो नहीं आई। कुछ सस्ती बैटरियों में, खासकर चीन में बनी बैटरियों में, इस BMS के साथ ब्लूटूथ की सुविधा भी दी जाती है। अगर इस ब्लूटूथ पर कोई पासवर्ड या सुरक्षा लॉक न लगा हो, तो आसपास मौजूद कोई भी शख्स अपने मोबाइल से उससे कनेक्ट हो सकता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे बिना पासवर्ड वाले वाई-फाई या खुले ब्लूटूथ से कोई भी जुड़ जाता है। BAT-BMS ऐप ठीक इसी खुले ब्लूटूथ कनेक्शन का फायदा उठाकर बैटरी के सिस्टम तक पहुंच बना लेता था, जिसे सुरक्षा के नजरिए से एक बड़ा खतरा माना जा रहा है।

ब्लूटूथ की रेंज कितनी होती है

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिन बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में सुरक्षा लॉक नहीं होता, उनमें ब्लूटूथ की रेंज आमतौर पर 10 से 15 मीटर तक रहती है। इसका सीधा मतलब यह है कि सड़क किनारे खड़ा कोई शख्स, पास से गुजरता कोई वाहन या बाइक सवार भी ब्लूटूथ के जरिए बैटरी सिस्टम से जुड़ने की कोशिश कर सकता है। ऐसे हालात में ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाता है और चालक को यह भी समझ नहीं आता कि आखिर गाड़ी में गड़बड़ी कहां हुई।

किन बैटरियों में सबसे ज्यादा खतरा

हालांकि जानी-मानी और ब्रांडेड कंपनियों की बैटरियों में मजबूत सुरक्षा और एन्क्रिप्शन सिस्टम पहले से मौजूद होता है, इसलिए उन पर इस तरह का खतरा नहीं माना जाता। यह जोखिम ज्यादातर सस्ती और बाद में लगाई गई यानी आफ्टरमार्केट बैटरियों में देखा जा रहा है, जिनका इस्तेमाल बड़ी तादाद में ई-रिक्शा में किया जाता है।

सवाल-जवाब

BAT-BMS ऐप को क्यों हटाया गया?
क्योंकि इस ऐप के जरिए कुछ लोग ई-रिक्शा को दूर से बंद कर दे रहे थे, जिससे सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया था।
इस कार्रवाई में कितने ऐप्स हटाए गए हैं?
गूगल प्ले स्टोर और एपल ऐप स्टोर से कुल दो ऐप्स को डिलीट किया गया है।
ई-रिक्शा दूर बैठे कैसे बंद हो जाता था?
बैटरी के BMS से जुड़े असुरक्षित ब्लूटूथ कनेक्शन के जरिए कोई भी नजदीकी शख्स कनेक्ट होकर बैटरी सिस्टम को बंद कर सकता था।
असुरक्षित ब्लूटूथ की रेंज कितनी होती है?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा लॉक न होने पर ब्लूटूथ की रेंज आमतौर पर 10 से 15 मीटर तक होती है।
क्या ब्रांडेड कंपनियों की बैटरियों में भी यह खतरा है?
नहीं, ब्रांडेड बैटरियों में मजबूत सुरक्षा और एन्क्रिप्शन सिस्टम होता है, यह खतरा मुख्यतः सस्ती आफ्टरमार्केट बैटरियों में देखा जा रहा है।
क्या इस मामले की आगे भी जांच होगी?
हां, मामले की जांच और निगरानी आगे भी जारी रहेगी।
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