गूगल प्ले स्टोर पर सुरक्षा निगरानी में एक गंभीर चूक सामने आई है, जहां दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के नाम पर बना एक नकली ऐप खुलेआम उपलब्ध पाया गया। वॉट्सऐप मैसेंजर के नाम से तैयार इस फर्जी ऐप को पांच लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि जब लोगों ने स्टोर में सर्च किया, तो यह संदिग्ध ऐप प्रायोजित परिणाम के रूप में असली आधिकारिक ऐप से भी ऊपर दिखाई दे रहा था। इस विज्ञापन जैसी स्थिति के कारण अनगिनत स्मार्टफोन धारक भ्रमित हो गए और असली समझकर नकली सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर बैठे।
सर्च में सबसे ऊपर कैसे पहुंचा यह नकली सॉफ्टवेयर
गूगल प्ले स्टोर के सर्च एल्गोरिदम में विज्ञापनों और प्रायोजित सूचियों को सबसे ऊपर जगह दी जाती है। जालसाजों ने इसी व्यवस्था का फायदा उठाया और अपने क्लोन सॉफ्टवेयर के लिए विज्ञापन अभियान चला दिया। इसके चलते जब किसी सामान्य यूजर ने सर्च बार में मैसेजिंग ऐप ढूंढा, तो स्क्रीन पर सबसे पहला विकल्प यह फर्जी ऐप ही बनकर उभरा। साधारण तौर पर लोग शीर्ष परिणाम पर बिना ज्यादा जांचे-परखे क्लिक कर देते हैं, जिससे यह फर्जीवाड़ा तेजी से फैलता चला गया। सोलह अक्टूबर तक यह ऐप सीधे डाउनलोड के लिए उपलब्ध बना रहा और उस समय तक सर्च इंजन कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई थी।
हूबहू नकल कर तैयार किया गया फर्जी प्रोफाइल
इस नकली ऐप को एगमेंट एसेट्स सल्लू नाम के एक अज्ञात डेवलपर द्वारा प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित किया गया था। जांच करने पर पता चला कि इस डेवलपर खाते से पूरे स्टोर पर कोई अन्य ऐप जारी नहीं हुआ था। उपयोगकर्ताओं को झांसा देने के लिए इस क्लोन ऐप में असली वॉट्सऐप जैसा ही हरा लोगो, मिलते-जुलते स्क्रीनशॉट और लगभग एक जैसा विवरण दर्ज किया गया था। इस बारीक नकल की वजह से पहली नजर में साधारण मोबाइल यूजर के लिए असली और नकली की पहचान कर पाना बेहद कठिन हो गया था।
इसके विपरीत, असली वॉट्सऐप मैसेंजर को वॉट्सऐप एलएलसी द्वारा प्रकाशित किया जाता है। वास्तविक ऐप के आंकड़े इस फर्जीवाड़े की पोल खोलने के लिए काफी हैं। मूल ऐप को अब तक दस अरब से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। इसके साथ ही उसे गूगल द्वारा संपादकीय पसंद का बैज मिला हुआ है और उस पर चौबीस करोड़ साठ लाख से अधिक समीक्षाएं दर्ज हैं। वहीं नकली ऐप के आंकड़े इसके आसपास भी नहीं थे, फिर भी लोग विज्ञापन की वजह से धोखे में आ गए।
अर्ली एक्सेस फीचर के जरिये छिपाई गईं चेतावनियां
इस धोखे को कामयाब बनाने के लिए एक और तकनीकी पहलू का इस्तेमाल किया गया। यह क्लोन ऐप स्टोर के प्रारंभिक पहुंच यानी अर्ली एक्सेस कार्यक्रम के तहत डाला गया था। इस व्यवस्था का मुख्य नुकसान यह होता है कि इसमें आम जनता की विस्तृत समीक्षाएं और चेतावनियां सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं होती हैं। जब नए यूजर ऐप पेज पर जाते हैं, तो उन्हें पुराने भुक्तभोगियों की समीक्षाएं या नकारात्मक टिप्पणियां दिखाई नहीं देतीं। इस वजह से ऐप की असलियत छिपी रही और लोग बिना किसी चेतावनी के इसे डाउनलोड करते चले गए।
फर्जी ऐप पहचानने के जरूरी सुरक्षा नियम
ऐसी धोखाधड़ी से सुरक्षित रहने के लिए प्ले स्टोर से ऐप चुनते समय कुछ बुनियादी सावधानियां बरतनी चाहिए
- डेवलपर की पहचान जांचें: किसी भी ऐप को इंस्टॉल करने से पहले उसके शीर्षक के नीचे लिखे पब्लिशर का नाम पढ़ें। वॉट्सऐप के मामले में केवल वॉट्सऐप एलएलसी ही आधिकारिक निर्माता है, किसी अन्य नाम पर कतई भरोसा न करें।
- डाउनलोड और समीक्षाओं की संख्या देखें: बड़े वैश्विक प्लेटफॉर्म के अरबों डाउनलोड और करोड़ों समीक्षाएं होती हैं। यदि किसी लोकप्रिय ऐप के डाउनलोड लाखों में दिखें, तो वह निश्चित रूप से संदिग्ध है।
- प्रायोजित टैग पर आंख मूंदकर भरोसा न करें: सर्च में सबसे ऊपर दिख रहे ऐप पर यदि प्रायोजित लिखा है, तो इसका अर्थ केवल यह है कि उसके प्रचार के लिए पैसे दिए गए हैं। यह आधिकारिक होने का प्रमाण नहीं है।
अगर इंस्टॉल कर लिया है तो तुरंत उठाएं ये कदम
जिन मोबाइल धारकों ने अनजाने में यह संदिग्ध ऐप अपने फोन में डाल लिया है, उन्हें बिना किसी देरी के इसे अनइंस्टॉल कर देना चाहिए। इसके बाद फोन की प्राइवेसी और ऐप सेटिंग्स में जाकर देखें कि उस सॉफ्टवेयर को कौन-कौन सी अनुमतियां मिली हुई थीं। यदि आपने उस ऐप के भीतर अपना मोबाइल नंबर, ओटीपी या कोई अन्य सुरक्षा कोड दर्ज किया था, तो अपने खाते की सुरक्षा तुरंत बहाल करें। अपने छह अंकों के रजिस्ट्रेशन कोड को कभी किसी अन्य व्यक्ति या अज्ञात फॉर्म पर साझा न करें। आधिकारिक स्टोर पर मौजूदगी हमेशा सुरक्षा की गारंटी नहीं होती, इसलिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।





















