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क्वांटम कंप्यूटिंग में 'बड़ी कामयाबी' के माइक्रोसॉफ्ट के दावे को वैज्ञानिक ने बताया अधूरा, गिनाईं खामियांतकनीक
25 जून 2026, 12:54 am (45 दिन पहले)· 1

क्वांटम कंप्यूटिंग में 'बड़ी कामयाबी' के माइक्रोसॉफ्ट के दावे को वैज्ञानिक ने बताया अधूरा, गिनाईं खामियां

सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी के भौतिक विज्ञानी हेनरी लेग का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट अब तक एक भी टोपोलॉजिकल क्यूबिट का बुनियादी भौतिकी प्रमाण नहीं दिखा पाई है। कंपनी अपने नतीजों पर कायम है।

क्वांटम कंप्यूटिंग की दौड़ में माइक्रोसॉफ्ट ने हाल ही में अपनी नई चिप माजोराना 2 पेश की थी और दावा किया था कि यह पिछली चिप के मुकाबले 1,000 गुना ज्यादा भरोसेमंद है और 2029 तक व्यावहारिक क्वांटम कंप्यूटिंग की दिशा में एक बड़ा कदम है। लेकिन इस दावे के कुछ ही हफ्तों बाद एक जाने-माने वैज्ञानिक ने कंपनी के इन दावों पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं।

सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी के भौतिक विज्ञानी हेनरी लेग ने बुधवार को नेचर में छपी अपनी टिप्पणी में कहा कि माइक्रोसॉफ्ट अब तक टोपोलॉजिकल क्यूबिट के अस्तित्व को साबित नहीं कर पाई है। टोपोलॉजिकल क्यूबिट क्वांटम बिट का एक सैद्धांतिक रूप है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह आम क्वांटम कंप्यूटिंग तरीकों के मुकाबले गलतियों के प्रति ज्यादा मजबूत हो सकता है।

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'बुनियादी भौतिकी तक नहीं दिखाई'

लेग ने ब्लूस्काई पर लिखा, “माइक्रोसॉफ्ट की क्वांटम कंप्यूटिंग की 'बड़ी कामयाबी' वाले दावों के पीछे की खामीभरी ट्यून-अप प्रक्रियाओं, कोड की गलतियों और छिपाए गए आंकड़ों को उजागर करती मेरी समीक्षा आज नेचर में प्रकाशित हुई है।” उन्होंने आगे लिखा, “संक्षेप में कहूं तो, एक भी टोपोलॉजिकल क्यूबिट के लिए जरूरी बुनियादी भौतिकी तक माइक्रोसॉफ्ट ने नहीं दिखाई है।”

लेग की यह टिप्पणी दरअसल माइक्रोसॉफ्ट क्वांटम के शोधकर्ताओं के 2025 के उस शोध-पत्र का जवाब है, जो नेचर में छपा था और जिसमें कंपनी ने अपने टोपोलॉजिकल क्यूबिट के सबूत बताए थे। लेग के मुताबिक, माइक्रोसॉफ्ट जिन संकेतों को इस डिवाइस का नतीजा बता रही है, वे असल में प्रयोगों के दौरान आने वाला शोर यानी एक्सपेरिमेंटल नॉइज़ भी हो सकते हैं।

लेग ने लिखा, “टोपोग्राफिकल सुपरकंडक्टिंग फेज का पता लगाना, जो प्रस्तावित टोपोलॉजिकल क्यूबिट का आधार है, बेहद मुश्किल काम है क्योंकि साधारण अवस्थाएं भी वैसे ही संकेत पैदा कर सकती हैं जैसे एक टोपोलॉजिकल सुपरकंडक्टर से अपेक्षित होते हैं।”

माजोराना 2 को लेकर माइक्रोसॉफ्ट के दावे

माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि माजोराना 2 क्वांटम जानकारी को औसतन 20 सेकंड तक स्थिर रख सकती है, और कुछ क्यूबिट तो एक मिनट तक भी टिक सकते हैं। कंपनी के मुताबिक AI ने इसके विकास की रफ्तार बढ़ाने में मदद की, उपयोगी सामग्री पहचानने, टेस्ट को स्वचालित करने और मैन्युफैक्चरिंग को बेहतर बनाने में। यह चिप उसी टोपोलॉजिकल क्यूबिट तकनीक पर टिकी है जिस पर अब आलोचक सवाल उठा रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट का तर्क है कि यह तरीका मौजूदा सिस्टम को परेशान करने वाली गलतियों को घटाकर ज्यादा भरोसेमंद क्वांटम कंप्यूटर तैयार कर सकता है।

लेग का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट के नतीजों के पीछे का पहले अप्रकाशित रहा ट्रांसपोर्ट डेटा उस सुपरकंडक्टिंग अवस्था का स्पष्ट सबूत नहीं देता, जो कंपनी के टोपोलॉजिकल क्यूबिट के दावे को सही ठहराने के लिए जरूरी है। उनके मुताबिक ये मापन इसके बजाय दूसरे स्पष्टीकरणों से ज्यादा मेल खाते दिखते हैं, जिनमें क्वांटम डॉट इफेक्ट भी शामिल है।

माइक्रोसॉफ्ट का पलटवार

माइक्रोसॉफ्ट ने लेग के निष्कर्षों को सिरे से खारिज किया है। कंपनी के टेक्निकल फेलो और क्वांटम हार्डवेयर के कॉरपोरेट वाइस प्रेसिडेंट चेतन नायक ने साइंटिफिक अमेरिकन से कहा, “हम अपने नतीजों और अपने रोडमैप पर कायम हैं।” नायक ने इस बात की ओर इशारा किया कि माइक्रोसॉफ्ट डारपा की क्वांटम बेंचमार्किंग इनिशिएटिव के आखिरी चरण में पहुंच चुकी है, और उनके मुताबिक यह सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के नतीजों की स्वतंत्र जांच के बाद हुआ। उन्होंने जोड़ा, “संशय और कड़ाई वैज्ञानिक प्रक्रिया की पहचान हैं, जिनकी हम कद्र करते हैं और कई विद्वानों की ओर से इसका समर्थन भी करते आए हैं।”

माइक्रोसॉफ्ट ने बुधवार को नेचर में एक औपचारिक जवाब भी प्रकाशित किया, जिसमें कहा गया कि उसके मापन इसी निष्कर्ष को मजबूत करते हैं कि उसने एक टोपोलॉजिकल क्यूबिट तैयार किया है। कंपनी का कहना है कि उसके प्रयोगों में देखे गए स्थिर संकेत एक टोपोलॉजिकल अवस्था से मेल खाते हैं और इनका आना मुश्किल होता अगर सिस्टम सिर्फ शोर दिखा रहा होता या लेग के सुझाव के मुताबिक एक गैपलेस अवस्था की तरह बर्ताव कर रहा होता।

'क्यू-डे' और बिटकॉइन पर खतरा

यह बहस ऐसे समय आई है जब क्रिप्टोकरेंसी इंडस्ट्री 'क्यू-डे' के लिए खुद को तैयार करने में जुटी है। क्यू-डे उस मोड़ को कहते हैं जब कोई क्वांटम कंप्यूटर इतना ताकतवर हो जाएगा कि वह आज व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली पब्लिक-की क्रिप्टोग्राफी को तोड़ सके।

बिटकॉइन को इस मामले में खासतौर पर कमजोर माना जाता है, क्योंकि एक क्वांटम हमलावर सामने दिख रही पब्लिक की से निजी की निकालकर पैसे चुरा सकता है। लेग की आलोचना इस भविष्य को नकारती नहीं है, लेकिन वह उन सबूतों को जरूर चुनौती देती है जिनके दम पर माइक्रोसॉफ्ट वहां तक पहुंचने का दावा कर रही है।

सवाल-जवाब

माइक्रोसॉफ्ट की नई क्वांटम चिप कौन सी है?
इसका नाम माजोराना 2 है, जिसे कंपनी ने पिछली चिप से 1,000 गुना ज्यादा भरोसेमंद बताया है।
हेनरी लेग ने क्या आरोप लगाया है?
उनका कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट ने एक भी टोपोलॉजिकल क्यूबिट के लिए जरूरी बुनियादी भौतिकी तक नहीं दिखाई और इसमें खामीभरी प्रक्रियाएं, कोड की गलतियां और छिपाए गए आंकड़े शामिल हैं।
टोपोलॉजिकल क्यूबिट क्या है?
यह क्वांटम बिट का एक सैद्धांतिक रूप है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह आम क्वांटम कंप्यूटिंग तरीकों के मुकाबले गलतियों के प्रति ज्यादा मजबूत हो सकता है।
माजोराना 2 क्वांटम जानकारी को कितनी देर स्थिर रखती है?
माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक औसतन 20 सेकंड तक, और कुछ क्यूबिट एक मिनट तक भी टिक सकते हैं।
माइक्रोसॉफ्ट ने इन आरोपों पर क्या कहा?
कंपनी अपने नतीजों और रोडमैप पर कायम है और उसने नेचर में औपचारिक जवाब देकर कहा कि उसके मापन टोपोलॉजिकल क्यूबिट बनने के निष्कर्ष को मजबूत करते हैं।
'क्यू-डे' क्या है?
यह वह मोड़ है जब कोई क्वांटम कंप्यूटर इतना ताकतवर हो जाएगा कि व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली पब्लिक-की क्रिप्टोग्राफी को तोड़ सके।
बिटकॉइन को इससे क्या खतरा है?
एक क्वांटम हमलावर सामने दिख रही पब्लिक की से निजी की निकालकर पैसे चुरा सकता है, इसलिए बिटकॉइन को खासतौर पर कमजोर माना जाता है।
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