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रिलीज़ के सालों बाद गानों के हिट होने का क्या है गणित? अमाल मलिक ने खोले संगीत उद्योग के राजबॉलीवुड
8 अग॰ 2026, 1:33 pm (16 घंटे पहले)· 6

रिलीज़ के सालों बाद गानों के हिट होने का क्या है गणित? अमाल मलिक ने खोले संगीत उद्योग के राज

संगीतकार अमाल मलिक ने बताया कि किसी गाने की सफलता केवल धुन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि स्टार पावर, विजुअल प्रस्तुति, मार्केटिंग और टाइमिंग भी उसकी किस्मत तय करते हैं।

संगीत उद्योग में किसी रचना की सफलता और उसके चार्टबस्टर बनने का समय हमेशा एक पहेली रहा है। कुछ गाने रिलीज होते ही श्रोताओं की पहली पसंद बन जाते हैं, जबकि कई गानों को अपनी वास्तविक पहचान और लोकप्रियता हासिल करने में महीनों या वर्षों का समय लग जाता है। अक्सर देखा गया है कि कोई पुराना गाना अचानक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नए सिरे से छा जाता है, या फिर किसी क्लासिक फिल्म के पुनर्गठन से उसकी धुन अचानक चर्चा का केंद्र बन जाती है। इस दिलचस्प बदलाव और संगीत की दुनिया के अंदरूनी गणित पर मशहूर संगीतकार अमाल मलिक ने विस्तार से रोशनी डाली है। मुंबई के बीकेसी क्षेत्र में इमरान हाशमी की आने वाली फिल्म 'आवारापन 2' के नए ट्रैक 'ये आवारापन' के प्रमोशनल कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समझाया कि किसी संगीत रचना की नियति केवल उसकी धुन या गायक की आवाज से तय नहीं होती। इसके पीछे सही टाइमिंग, विजुअल प्रस्तुति, पर्दे पर दिखने वाला स्टार चेहरा, मार्केटिंग रणनीति और सटीक पोजिशनिंग जैसे कई अन्य कारक भी समान रूप से जिम्मेदार होते हैं।

हर गाने की अपनी टाइमलाइन और किस्मत

फिल्म संगीत के अपने अनुभवों को साझा करते हुए अमाल मलिक ने उन रचनाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया जो शुरुआती दौर में दर्शकों का ध्यान खींचने में असफल रहीं, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद चार्टबस्टर के रूप में उभरीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके अपने करियर में ऐसे कई गाने रहे हैं जिनका शुरुआती सफर काफी संघर्षपूर्ण और उतार-चढ़ाव से भरा रहा। मलिक के अनुसार, हर गाने की अपनी एक निश्चित टाइमलाइन और किस्मत होती है। जब कोई रचना तैयार की जा रही होती है, तो उस समय माहौल का मूड, लोगों की ऊर्जा और सहयोगियों के साथ सामंजस्य बहुत मायने रखता है। अगर निर्माण प्रक्रिया के दौरान पूरी टीम की ऊर्जा सकारात्मक और रचनात्मक हो, तो बनने वाला गाना भी अद्भुत रूप लेता है। हालांकि, केवल बेहतरीन रचना तैयार कर देना ही सफलता की गारंटी नहीं होता, क्योंकि अंतिम परिणाम इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह किस फिल्म की कहानी में फिट बैठता है और पर्दे पर उसे कौन सा अभिनेता प्रस्तुत कर रहा है।

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भारत में संगीत का विजुअल माध्यम होना और मार्केटिंग की भूमिका

भारतीय मनोरंजन उद्योग की अनूठी प्रकृति पर चर्चा करते हुए अमाल मलिक ने एक महत्वपूर्ण पहलू को उजागर किया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में संगीत केवल सुनने की वस्तु न होकर प्राथमिक रूप से एक विजुअल माध्यम है। यहाँ श्रोता किसी भी नए गाने को अपने कानों से सुनने से पहले अपनी आँखों से स्क्रीन पर देखते हैं। यही कारण है कि गाना किस स्टार पर फिल्माया गया है और उसका दृश्य चित्रण कितना प्रभावशाली है, यह उसकी सफलता का मुख्य आधार बनता है। आज के आधुनिक दौर में सिर्फ एक अच्छा गाना बना देना ही पर्याप्त नहीं रह गया है। बदलते समय के साथ मार्केटिंग की ताकत, दर्शकों की बदलती सोच और गाने की सही पोजिशनिंग जैसे कारक भी उसकी किस्मत तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

तत्काल 100 मिलियन व्यूज की होड़ और डिजिटल कंटेंट का दबाव

डिजिटल युग में व्यूज और रील्स की होड़ पर बात करते हुए संगीतकार ने स्वीकार किया कि आज हर कलाकार पर तुरंत सफलता पाने का भारी दबाव रहता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है कि हर नया गाना रिलीज होते ही रातों-रात 100 मिलियन व्यूज हासिल कर ले या उस पर 5 लाख रील्स बन जाएं। संगीत जगत में गानों की सफलता का दायरा अलग-अलग होता है। कुछ गाने इंस्टाग्राम रील्स पर वायरल होते हैं, कुछ म्यूजिक स्ट्रीमिंग ऐप्स पर अपनी जगह बनाते हैं, जबकि कुछ गाने तमाम स्थापित नियमों और धारणाओं को तोड़ते हुए एक बहुत बड़े हिट का रूप ले लेते हैं। वर्तमान समय में दर्शकों के सामने कंटेंट का भारी विकल्प मौजूद है। इस भीड़ में अपनी अलग पहचान बनाने का एकमात्र तरीका ईमानदारी से काम करना है। अमाल मलिक के अनुसार, "मेरा मानना है कि हर गाने की अपनी एक टाइमलाइन होती है।"

असफलता से निपटना और आगे बढ़ने का दृष्टिकोण

अपनी कार्यशैली और मानसिक दृष्टिकोण के बारे में बात करते हुए अमाल मलिक ने बताया कि वे अपने गानों के प्रदर्शन को किस प्रकार लेते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि जब उनका कोई गाना उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं देता या तुरंत हिट नहीं हो पाता, तो उन्हें दो दिनों तक काफी बुरा महसूस होता है। उस दौरान मन में कई तरह के विचार आते हैं कि कमी कहाँ रह गई या ऐसा किस वजह से हुआ। लेकिन वे इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि एक ही बात पर ज्यादा सोचने से रचनात्मक प्रगति रुक जाती है और इंसान आगे नहीं बढ़ पाता। इसलिए वे असफलता के दुख को जल्दी पीछे छोड़कर तुरंत अपने अगले गाने की रचना में जुट जाते हैं। यही निरंतरता और आगे बढ़ते रहने की भावना किसी भी कलाकार को उद्योग में लंबे समय तक टिके रहने में मदद करती है।

सवाल-जवाब

अमाल मलिक ने किस कार्यक्रम के दौरान संगीत की सफलता पर विचार साझा किए?
अमाल मलिक ने मुंबई के बीकेसी इलाके में इमरान हाशमी की आगामी फिल्म 'आवारापन 2' के गाने 'ये आवारापन' के प्रमोशन के दौरान ये बातें कही थीं।
अमाल मलिक के अनुसार भारत में संगीत किस प्रकार का माध्यम है?
अमाल मलिक का मानना है कि भारत में संगीत प्राथमिक रूप से एक विजुअल माध्यम है, जहाँ लोग पहले गाना स्क्रीन पर देखते हैं और फिर सुनते हैं।
गाना तुरंत हिट न होने पर अमाल मलिक क्या करते हैं?
यदि कोई गाना शुरुआत में हिट नहीं होता, तो वे दो दिन बुरा महसूस करने के बाद बिना ज्यादा सोचे तुरंत अगले प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर देते हैं।
क्या हर गाने के लिए तुरंत 100 मिलियन व्यूज पाना संभव है?
नहीं, मलिक के अनुसार हर गाने के साथ तुरंत 100 मिलियन व्यूज या 5 लाख रील्स बनना मुमकिन नहीं है, क्योंकि कुछ गाने धीरे-धीरे पहचान बनाते हैं।
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