तेजी से सामान पहुंचाने वाले क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर लोग अब सिर्फ राशन और रोजमर्रा की चीजें ही नहीं, बल्कि महंगे गैजेट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद भी मंगाने लगे हैं। मिनटों में सामान घर तक पहुंच जाना बेशक सुविधाजनक लगता है, लेकिन बिना सोचे-समझे की गई ऐसी खरीदारी कई बार ग्राहकों के लिए भारी सिरदर्द बन जाती है। हाल ही में सामने आई एक घटना यह साफ दिखाती है कि प्लेटफॉर्म कितना भी भरोसेमंद लगे, उस पर लिस्टेड विक्रेता यदि निर्माता का अधिकृत डीलर नहीं है तो उत्पाद की आधिकारिक गारंटी या वारंटी से हाथ धोना पड़ सकता है।
स्विगी इंस्टामार्ट से मंगाया 70 हजार रुपये का गेमिंग कंसोल
यह मामला स्विगी इंस्टामार्ट के जरिए की गई एक बड़ी खरीदारी से जुड़ा है। एक खरीदार ने 27 सितंबर को इस क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से सोनी का पीएस5 गेम कंसोल ऑर्डर किया और इसके लिए 70 हजार रुपये का भुगतान किया। डिलीवरी के वक्त कंसोल पूरी तरह सील पैक डिब्बे में आया था और शुरुआती इस्तेमाल के दौरान वह बिल्कुल सामान्य तरीके से काम कर रहा था। खरीदार को लगा कि सब कुछ ठीक है, लेकिन कुछ समय बाद उस डिवाइस में तकनीकी खराबी आने लगी। इसके बाद जब ग्राहक ने आधिकारिक स्तर पर सहायता लेने की कोशिश की, तब असली संकट सामने आया।
वारंटी रजिस्ट्रेशन के दौरान सामने आया अनाधिकृत विक्रेता का सच
तकनीकी दिक्कत आने के बाद खरीदार ने उस गेमिंग डिवाइस को कंपनी के सिस्टम पर रजिस्टर करने की प्रक्रिया शुरू की। निर्माता कंपनी के सपोर्ट सिस्टम ने नियमों के मुताबिक उत्पाद का सीरियल नंबर, इनवॉयस यानी बिल, विक्रेता का नाम और वारंटी कार्ड की तस्वीरें अपलोड करने को कहा। जब ये सारे दस्तावेज जमा किए गए, तो कंपनी की तरफ से हैरान करने वाला जवाब मिला। सोनी इंडिया ने इनवॉयस की पड़ताल करने के बाद खरीदार को सूचित किया कि जिस विक्रेता ने यह उत्पाद भेजा है, वह उनका ऑथराइज्ड डीलर नहीं है।
पीवाईडी रिटेल के इनवॉयस पर कंपनी ने क्यों खड़े किए हाथ
जांच में पता चला कि स्विगी इंस्टामार्ट पर जिस मर्चेंट ने इस डिवाइस को बेचा था, उसका नाम बिल पर पीवाईडी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड (अवंतिका) दर्ज था। सोनी इंडिया ने दो टूक कहा कि यह फर्म उनकी आधिकारिक डीलर सूची में शामिल नहीं है। अधिकृत विक्रेता का बिल न होने के कारण कंपनी के सिस्टम पर उस कंसोल का रजिस्ट्रेशन स्वीकार नहीं किया जा सकता और न ही उसे बदला या वारंटी के तहत कवर किया जा सकता है। खरीदार ने अपना यह कड़वा अनुभव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर साझा करके लोगों को आगाह किया है कि महंगे सामान का बिल बनवाते समय अधिकृत डीलर की पुष्टि जरूर करें।



















