अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा नागरिक निगरानीकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों के व्यक्तिगत ब्योरे को एक विशेष खोजी डेटाबेस में दर्ज करने के आरोपों को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। मेन राज्य में इस साल जनवरी में चलाए गए एक बड़े इमिग्रेशन अभियान के दौरान कार्यकर्ताओं की तस्वीरें खींचने, गाड़ियों के नंबर प्लेट ट्रेस करने और निजी जानकारी जुटाने के बाद यह मामला संघीय अदालत के समक्ष पहुंचा है। नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाले वकीलों का तर्क है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की यह कार्रवाई संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को डराने और उन्हें संदिग्ध अपराधियों की तरह पेश करने के समान है।
ऑपरेशन कैच ऑफ द डे और अदालती अर्जी के प्रमुख आरोप
यह पूरा मामला मेन की एक संघीय अदालत में चार नागरिक कार्यकर्ताओं द्वारा दायर प्रस्तावित क्लास एक्शन याचिका से जुड़ा है। इन याचिकाकर्ताओं के नाम एलिनॉर हिल्टन, कोलीन फेगन, पोलिक्सेनिया पांतोस और कार्लीन विलियम्स हैं। यह मुकदमा मूल रूप से सितंबर महीने में सीलबंद तरीके से दायर किया गया था, जिसका संशोधित सार्वजनिक संस्करण हाल ही में सामने लाया गया है। कानूनी दस्तावेजों के अनुसार, यह विवाद जनवरी महीने में मेन में चलाए गए इमिग्रेशन एन्फोर्समेंट अभियान 'ऑपरेशन कैच ऑफ द डे' के दौरान घटित घटनाओं पर केंद्रित है।
अदालत में पेश की गई अर्जी सरकारी दस्तावेजों और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) के एजेंटों के बयानों पर आधारित है। इसमें आरोप लगाया गया है कि सरकारी एजेंटों ने प्रदर्शनकारियों और पर्यवेक्षकों के घरों के आसपास गाड़ियां चलाकर चक्कर लगाने जैसी डराने-धमकाने वाली कार्रवाइयों को अंजाम दिया। इसके अतिरिक्त, कम से कम एक पर्यवेक्षक के संदर्भ में यह निर्देश दर्ज किया गया कि जब भी वह जनवरी 2027 तक अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने की कोशिश करे, उसे अनिवार्य रूप से द्वितीयक जांच यानी सेकेंडरी इंस्पेक्शन के लिए भेजा जाए। प्रोटेक्ट डेमोक्रेसी की वकील जोआना सुरियानी, जो अदालत में इन पर्यवेक्षकों का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, ने रेखांकित किया कि सरकार उन आम लोगों के साथ संदिग्ध अपराधियों जैसा सुलूक कर रही है जो अपने पहले संशोधन के तहत मिले अधिकारों का प्रयोग करते हुए जवाबदेही तय करने का प्रयास कर रहे हैं।
एजेंट जे.सी. की भूमिका और मोबाइल क्वेरी से चेहरों की पहचान
अदालती दस्तावेजों में डीएचएस के एक विशेष एजेंट की गतिविधियों का विस्तार से उल्लेख किया गया है, जिसे 'एजेंट जे.सी.' के नाम से संदर्भित किया गया है। फाइलों के अनुसार, इस एजेंट ने पर्यवेक्षकों को चिह्नित करने के लिए इन्वेस्टिगेटिव केस मैनेजमेंट (आईसीएम) डेटाबेस का इस्तेमाल किया। आईसीएम वह केस मैनेजमेंट सिस्टम है जिसे इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (आईसीई) का घटक होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस (एचएसआई) अपनी जांचों के दस्तावेजीकरण के लिए उपयोग में लाता है।
दायर दस्तावेजों में कहा गया है कि जे.सी. ने कम से कम छह पर्यवेक्षकों के संबंध में आईसीएम रिकॉर्ड तैयार किए, जबकि सरकार इन व्यक्तियों की संख्या आठ बताती है। विवरण के अनुसार, जे.सी. ने होम डिपो के पार्किंग स्थल पर जिन दो लोगों का वीडियो बनाया था, उन्हें फाइलों में 'कानून प्रवर्तन के लिए खतरा, पेशेवर प्रदर्शनकारी' का लेबल दिया। इसके बाद उसने उन व्यक्तियों और अन्य लोगों की तस्वीरें अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा (सीबीपी) के एक अधिकारी को भेजीं, ताकि 'मोबाइल क्वेरी' नामक ऐप के जरिए फेशियल रिकग्निशन सर्च चलाई जा सके और उनकी पहचान उजागर की जा सके।
पोर्टलैंड की गिरफ्तारी और फोन पर दी गई चेतावनी का विवरण
इस पूरे मामले में 20 जनवरी को हुई एक घटना का विशेष रूप से उल्लेख है। पोर्टलैंड, मेन में पांतोस ने कुछ दूरी पर अपनी जीवनसाथी की कार के पास खड़े होकर एक गिरफ्तारी की प्रक्रिया को देखा और उसकी तस्वीरें लीं। कानूनी अर्जी के मुताबिक, कुछ ही घंटों के भीतर एजेंट जे.सी. ने उस गाड़ी की नंबर प्लेट का रिकॉर्ड खंगाला और कानून प्रवर्तन के लिए लेक्सिसनेक्सिस द्वारा संचालित एक्यूरिंट डेटाबेस से कार की मालिक कार्लीन विलियम्स की विस्तृत रिपोर्ट निकाल ली। इस रिपोर्ट में विलियम्स का पता, फोन नंबर और साथ रहने वाले लोगों की सूची मौजूद थी।
इसके बाद जे.सी. ने कथित तौर पर विलियम्स की तस्वीर अपनी टीम के सदस्यों को भेजी और पूछा कि क्या मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारी वही थी। एक अन्य एजेंट ने जवाब दिया कि यह तस्वीर उस महिला से मेल नहीं खाती जिसका उसने घटनास्थल पर सामना किया था। इसके बावजूद जे.सी. ने अपने सहयोगियों से कहा कि वह अब उन्हें आईसीएम में जोड़ रहा है। कानूनी अर्जी के अनुसार, उसी दोपहर जे.सी. ने विलियम्स के मोबाइल फोन पर कॉल की और खुद की पहचान केवल 'डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी' के रूप में दी। विलियम्स के अनुसार, एजेंट ने उनसे कहा कि उन्हें अपने जीवनसाथी पांतोस को भविष्य में ऐसा कुछ भी न करने के लिए समझाना चाहिए, क्योंकि ऐसी गतिविधियों में शामिल होने वाले लोगों को डोमेस्टिक टेररिज्म वॉचलिस्ट में जोड़ा जा सकता है। अपनी गवाही में जे.सी. ने माना कि उसने विलियम्स को चेतावनी दी थी कि यदि वह यह सब जारी रखेंगी तो उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा, हालांकि सरकारी वकीलों ने दावा किया कि एजेंट ने किसी आतंकी वॉचलिस्ट का जिक्र करने से इनकार किया है।
पलंतीर का गोथम सॉफ्टवेयर और बॉर्डर स्क्रीनिंग से आईसीएम का जुड़ाव
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, विलियम्स के आईसीएम रिकॉर्ड में यह दर्ज किया गया कि वह उस वाहन की पंजीकृत मालिक थीं जिसका उपयोग आईसीई की गिरफ्तारियों में बाधा डालने के लिए किया गया था। इसमें यह भी जोड़ा गया कि उनके ड्राइविंग लाइसेंस की तस्वीर एक आक्रामक महिला के वीडियो से मेल खाती है जिसने खुद को गिरफ्तारी की कार्रवाई के बीच में डाला था। डीएचएस के वर्ष 2016 के प्राइवेसी असेसमेंट के अनुसार, जब एजेंट आईसीएम में किसी विषय का रिकॉर्ड बनाते हैं, तो वह सिस्टम स्वचालित रूप से इन जानकारियों को सीबीपी के टीईसीएस सिस्टम के साथ साझा करता है, जहां ये रिकॉर्ड सीमा पार यात्रा करने वालों की स्क्रीनिंग के लिए लुकआउट रिकॉर्ड के तौर पर काम करते हैं।
आईसीएम वास्तव में पलंतीर कंपनी द्वारा विकसित गोथम सॉफ्टवेयर पर आधारित है। आईसीई ने इस सिस्टम के निर्माण के लिए पलंतीर को पहली बार 2014 में अनुबंध दिया था, जिसे विशेष संचालन आवश्यकताओं के अनुसार ढाला गया था। इसके बाद 2022 में एजेंसी ने पलंतीर को पांच साल का एक नया आईसीएम सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट सौंपा, जिसकी प्रारंभिक अनुमानित कीमत लगभग 96 मिलियन डॉलर थी। वर्ष 2025 में, एजेंसी ने 'इमिग्रेशनओएस' नामक एक नया प्लेटफॉर्म विकसित करने के उद्देश्य से इस अनुबंध में लगभग 30 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त राशि जोड़ी।
सरकार का पक्ष और याचिकाकर्ताओं की कानूनी मांगें
इस कानूनी विवाद के सामने आने के बाद डीएचएस के एक प्रवक्ता ने इस मुकदमे को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। प्रवक्ता ने कहा कि यह मुकदमा इस असत्य दावे पर टिका है कि विभाग घरेलू आतंकियों का कोई डेटाबेस संचालित करता है। पलंतीर ने इस संबंध में टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया। वहीं दूसरी ओर, फ्लोरिडा के डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि मैक्सवेल फ्रॉस्ट को लिखे गए अप्रैल के एक पत्र में आईसीई के पूर्व कार्यवाहक निदेशक टॉड लायंस ने स्पष्ट किया था कि एजेंसी आईसीई की गतिविधियों का विरोध करने वाले अमेरिकी नागरिकों का किसी भी प्रकार का डेटाबेस नहीं रखती है। उन्होंने यह भी कहा था कि विभाग उन लोगों का कोई अलग डेटाबेस नहीं बना रहा है जिन्हें कभी गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया।
अदालत में दायर अपने खारिज करने के प्रस्ताव में सरकार ने दलील दी है कि ये घटनाएं व्यक्तिगत स्तर की थीं और डीएचएस की नीतियां इस तरह के आचरण को प्रतिबंधित करती हैं। सरकार का कहना है कि जे.सी. ने उन लोगों के रिकॉर्ड बनाए जिन्हें वह कानून प्रवर्तन के लिए संभावित खतरा मानता था और उसने किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी निगरानी सूची में शामिल करने का कोई प्रयास नहीं किया। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं के वकीलों का कहना है कि इस प्रकार की निगरानी ने नागरिकों के पहले संशोधन अधिकारों पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव डाला है, जिसके चलते पांतोस और विलियम्स दोनों ने बाद में अपनी निगरानी गतिविधियां पूरी तरह बंद कर दीं। याचिकाकर्ता अब अदालत से मांग कर रहे हैं कि विलियम्स के रिकॉर्ड को आर्काइव किया जाए, एकत्र की गई जानकारी का उनके खिलाफ उपयोग करने पर रोक लगे, और अधिकारियों को भविष्य में वॉचलिस्ट की धमकी देने या घरों तक पीछा करने से रोका जाए।



















