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पुराने स्मार्टफोन बनेंगे मिनी डेटा सेंटर: Google का नया प्रयोग, मदरबोर्ड से चलेगा कंप्यूटिंग क्लस्टरतकनीक
14 जून 2026, 2:46 pm (45 दिन पहले)· 0

पुराने स्मार्टफोन बनेंगे मिनी डेटा सेंटर: Google का नया प्रयोग, मदरबोर्ड से चलेगा कंप्यूटिंग क्लस्टर

Google और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो मिलकर पुराने स्मार्टफोन के मदरबोर्ड को जोड़कर छोटे डेटा सेंटर बना रहे हैं, ताकि इलेक्ट्रॉनिक कचरा घटे और कम खर्च में कंप्यूटिंग पावर मिले।

नया फोन हाथ में आते ही पुराना हैंडसेट या तो किसी दराज में पड़ा रह जाता है या रिसाइकिल के लिए भेज दिया जाता है। लेकिन अब इसी 'बेकार' पड़े डिवाइस को दोबारा काम पर लगाने की तैयारी हो रही है। Google ऐसा रास्ता तलाश रहा है जिसमें पुराने स्मार्टफोन को छोटे डेटा सेंटर या कंप्यूटिंग सिस्टम में बदला जा सके। कंपनी का मानना है कि इससे एक तरफ इलेक्ट्रॉनिक कचरे का ढेर घटेगा और दूसरी तरफ तकनीक पर्यावरण के लिहाज से ज्यादा टिकाऊ बनेगी।

क्या है यह पूरा प्रोजेक्ट

यह रिसर्च Google ने अकेले नहीं की है। इसमें अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो भी साझेदार है। दोनों ने मिलकर जिस प्रयोग पर काम किया है, उसे नाम दिया गया है 'Phone Cluster Computing'। मकसद साफ है — फेंके जाने वाले फोन को कूड़ा बनने से बचाकर उन्हें कंप्यूटिंग के काम में लाना।

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कैसे तैयार होता है यह सिस्टम

तरीका दिलचस्प है। पुराने स्मार्टफोन से वे सारे हिस्से हटा दिए जाते हैं जिनकी अब जरूरत नहीं रहती — यानी स्क्रीन, कैमरा, बैटरी और बाहरी बॉडी। इन्हें अलग करने के बाद बचता है सिर्फ मदरबोर्ड, जिसमें प्रोसेसर, स्टोरेज और मेमोरी जैसे असल काम के पार्ट्स मौजूद रहते हैं।

इसके बाद इन मदरबोर्ड्स को आपस में जोड़ा जाता है और पूरे सेटअप को Linux बेस्ड सिस्टम पर चलाया जाता है। इस ढांचे को संभालने के लिए Kubernetes जैसे टूल काम में लाए जाते हैं — वही टूल जो बड़े-बड़े क्लाउड सिस्टम को मैनेज करने में मदद करते हैं।

कितनी ताकत रखते हैं ये पुराने फोन

आंकड़े बताते हैं कि यह कोई मामूली जुगाड़ नहीं है। Google की रिसर्च के मुताबिक, 25 से 50 पुराने स्मार्टफोन मिलकर कुछ खास कामों में उतनी कंप्यूटिंग क्षमता दे सकते हैं, जितनी एक एडवांस सर्वर देता है। और अगर हजारों पुराने फोन एक साथ जोड़ दिए जाएं, तो वे क्लाउड सर्विस, रिसर्च प्रोजेक्ट और एजुकेशन प्लेटफॉर्म जैसी बड़ी जरूरतों को संभाल सकते हैं।

TrendKia के मुताबिक, आगे की योजना और भी बड़ी है — भविष्य में करीब 2,000 पुराने Pixel स्मार्टफोन को जोड़कर एक बड़ा कंप्यूटिंग क्लस्टर खड़ा करने का इरादा है।

छात्रों और रिसर्च को सीधा फायदा

इस तकनीक का एक बड़ा लाभ पढ़ाई-लिखाई में दिखेगा। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो इसका इस्तेमाल Systems Programming और Parallel Computing जैसे कोर्स में करना चाहती है। इसका मतलब है कि छात्रों को बेहद कम खर्च में बड़े कंप्यूटिंग सिस्टम पर हाथ आजमाने और सीखने का मौका मिलेगा।

पर्यावरण के लिए क्यों अहम

हर साल करोड़ों स्मार्टफोन इस्तेमाल लायक नहीं रह जाते और सीधे इलेक्ट्रॉनिक कचरे का हिस्सा बन जाते हैं। अगर Google का यह प्रयोग कामयाब रहा, तो इन्हीं फोन को नई जिंदगी मिल सकती है। इससे नए सर्वर बनाने की जरूरत घटेगी और तकनीक का पर्यावरण पर पड़ने वाला बोझ भी कम होगा। आसान शब्दों में कहें, तो आने वाले समय में आपके दराज में पड़ा पुराना फोन सिर्फ एक नाकारा डिवाइस नहीं, बल्कि किसी छोटे डेटा सेंटर का हिस्सा भी बन सकता है।

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