स्मार्टफोन की बैटरी पूरी चार्ज होते ही लोग फोन तो निकाल लेते हैं, लेकिन चार्जर का अडैप्टर दीवार के सॉकेट में ही लगा छोड़ देते हैं। कई घरों में ऐसी तस्वीर आम है जहां मोबाइल चार्जर दिन-रात बिजली के बोर्ड में बिना किसी फोन के जुड़ा रहता है। बहुत से लोगों के जेहन में अक्सर यह शंका रहती है कि क्या ऐसा खाली पड़ा चार्जर भी लगातार बिजली खींचता रहता है और महीने के बिल पर बोझ बढ़ाता है। तकनीकी हकीकत यह है कि खाली सॉकेट में लगा चार्जर बिजली खींचता जरूर है, लेकिन यह मात्रा इतनी मामूली होती है कि आपकी जेब पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ता। चार्जर के आंतरिक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट जब सीधे बिजली से जुड़े रहते हैं, तो वे थोड़ी स्टैंडबाय पावर लेते हैं, हालांकि आधुनिक और प्रमाणित चार्जर में यह खपत बेहद सीमित रखी जाती है।
स्टैंडबाय पावर और नो-लोड बिजली खपत का विज्ञान
जब भी कोई चार्जर सॉकेट में प्लग किया जाता है, तो उसके भीतर मौजूद ट्रांसफार्मर और कन्वर्टर सर्किट मेन बिजली सप्लाई से सीधे संपर्क में आ जाते हैं। भले ही चार्जर की केबल किसी फोन से न जुड़ी हो, उसका मुख्य पावर सर्किट पूरी तरह बंद नहीं होता। इसी स्थिति को तकनीकी भाषा में नो-लोड या स्टैंडबाय पावर कंजम्पशन कहा जाता है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि चार्जर उतनी ही ऊर्जा खींच रहा है जितनी वह बैटरी भरते वक्त लेता है। खाली रहने पर यह खपत बहुत ही सूक्ष्म स्तर पर होती है, इसलिए किसी एक चार्जर के चौबीसों घंटे लगे रहने से महीने के बिजली बिल में अचानक बड़ा उछाल आने का दावा पूरी तरह भ्रामक है।
गणित से समझिए: महीने भर में कितने पैसे की जलती है बिजली
यदि गणितीय गणना के आधार पर इसे समझें, तो तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाती है। मान लेते हैं कि एक सामान्य चार्जर खाली स्थिति में औसतन 0.1 वाट की दर से बिजली खींचता है और वह रोजाना 24 घंटे लगातार सॉकेट में लगा रहता है। इस स्थिति में 30 दिनों का कुल बिजली इस्तेमाल निकालने के लिए सूत्र कुछ इस तरह बनेगा
0.1 वाट × 24 घंटे × 30 दिन ÷ 1000 = 0.072 यूनिट
इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि पूरे एक महीने में वह चार्जर सिर्फ 0.072 यूनिट, यानी करीब 0.07 यूनिट बिजली ही इस्तेमाल करेगा। मान लें कि बिजली की दर औसतन ₹8 प्रति यूनिट है, तो पूरे तीस दिन का कुल खर्च लगभग ₹0.58 बैठता है। यानी एक चार्जर को महीने भर लगातार सॉकेट में छोड़ देने पर भी 1 रुपये के बराबर का खर्च नहीं आता। हालांकि यह एक सामान्य औसत आंकड़ा है, क्योंकि वास्तविक खपत चार्जर के मॉडल, उसकी बनावट और आंतरिक सर्किट की क्वालिटी पर भी निर्भर करती है।
अकेला चार्जर नहीं, मिलकर बढ़ता है स्टैंडबाय पावर का भार
जब एक चार्जर से बिल में कोई खास फर्क नहीं पड़ता, तो फिर विशेषज्ञ हर उपकरण का प्लग निकालने की सलाह क्यों देते हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि घरों में केवल एक फोन चार्जर ही खाली नहीं रहता। टेलीविजन, सेट-टॉप बॉक्स, इंटरनेट वाई-फाई राउटर, लैपटॉप का भारी अडैप्टर, स्मार्ट स्पीकर और दूसरे तमाम गैजेट्स दिन-रात प्लग में जुड़े रहते हैं और स्टैंडबाय पावर खींचते रहते हैं। जब इन सभी छोटे-बड़े उपकरणों की निष्क्रिय खपत को आपस में जोड़ दिया जाए, तो कुल बिजली का इस्तेमाल उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाता है। इसलिए गैर-जरूरी उपकरणों को सॉकेट से बंद करना या उनका प्लग निकाल देना बिजली की बचत करने की एक बेहद सुलझी हुई और प्रभावी आदत मानी जाती है।
बिजली बिल घटाने की असली तरकीब कहां छिपी है
यदि आपका असली मकसद बिजली के भारी-भरकम बिल को सचमुच कम करना है, तो छोटे चार्जर की चिंता करने के बजाय उन उपकरणों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो भारी मात्रा में वॉट खींचते हैं। घर में एयर कंडीशनर यानी AC, पानी गर्म करने वाला गीजर, रूम हीटर, बिजली की प्रेस, माइक्रोवेव ओवन, साथ ही लंबे समय तक चलने वाले कूलर और पंखे सबसे ज्यादा बिजली की खपत करते हैं। खाली पड़े फोन चार्जर को स्विच बोर्ड से हटाकर आप भले ही कुछ मिलीवाट बचा लें, लेकिन बिल में ठोस कटौती तभी दिखेगी जब इन भारी पावर वाले उपकरणों के चलने के घंटों में संयम बरता जाए।
पूरी रात फोन चार्जिंग पर लगे रहने का सच
अक्सर यह सवाल भी पूछा जाता है कि क्या रात भर फोन को चार्जिंग पर लगा छोड़ देने से बिजली बहुत ज्यादा जलती है। आधुनिक स्मार्टफोन का चार्जिंग सिस्टम इस तरह डिजाइन किया गया है कि बैटरी के 100 फीसदी तक भरते ही वह पावर सप्लाई को बेहद कम कर देता है या उसे पूरी तरह नियंत्रित कर लेता है। इसलिए रात में 8 घंटे तक फोन के लगे रहने का अर्थ यह कतई नहीं है कि चार्जर पूरी रात अपनी पूरी क्षमता से बिजली खींच रहा था। हालांकि फोन और चार्जर दोनों की लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए हमेशा प्रमाणित तथा अच्छी क्वालिटी का अडैप्टर और केबल ही इस्तेमाल करनी चाहिए, क्योंकि घटिया और नकली चार्जर सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते।
प्लग निकालना कितना जरूरी
वित्तीय दृष्टिकोण से देखें तो खाली मोबाइल चार्जर को सॉकेट में लगा छोड़ देने से बिजली बिल पर पड़ने वाला प्रभाव नगण्य है। इसे घर के बढ़े हुए बिल का मुख्य गुनहगार मानना किसी भी लिहाज से सही नहीं है। इसके बावजूद जब आप लंबे समय के लिए घर से बाहर जा रहे हों या चार्जर का कई दिनों तक इस्तेमाल न होना हो, तो स्विच बंद कर देना या प्लग निकाल देना एक बेहतरीन आदत है। यह कदम स्टैंडबाय बिजली की बर्बादी को पूरी तरह खत्म करता है और किसी भी अप्रत्याशित शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाओं से उपकरण को सुरक्षित भी रखता है।



















