सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आपत्तिजनक और नुकसानदेह सामग्री की निगरानी को लेकर केंद्र सरकार ने टेक दिग्गज मेटा के सामने सख्त रुख अपनाया है। सरकार का मानना है कि डिजिटल मंचों से ऐसी हानिकारक सामग्री को पूरी तरह हटाने के लिए केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित तकनीकों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इस प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप को बढ़ाना बेहद जरूरी है ताकि सामग्री की समीक्षा अधिक सटीक और प्रभावी ढंग से की जा सके।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सीमाओं पर सरकार का रुख
डिजिटल सुरक्षा समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई है कि AI एल्गोरिदम अक्सर भारतीय भाषाओं, बोलियों और स्थानीय सांस्कृतिक संदर्भों को सही तरीके से समझने में असमर्थ रहते हैं। इसी वजह से सरकार ने मेटा को निर्देश दिया है कि वह अपनी सामग्री समीक्षा टीम में ऐसे लोगों की संख्या में इजाफा करे, जो विभिन्न भारतीय भाषाओं और स्थानीय परिवेश को गहराई से समझते हों। केवल स्वचालन के भरोसे रहने से कई बार संवेदनशील या भ्रामक सामग्री ऑनलाइन बनी रहती है, जिससे सामाजिक माहौल पर असर पड़ता है।
मौजूदा तंत्र की समीक्षा और आगामी बैठक
हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में मेटा ने अपनी मौजूदा सामग्री प्रबंधन प्रणालियों और नियमों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट को हटाने के अपने मौजूदा तौर तरीकों का ब्योरा दिया। सरकार ने इस पूरे ढांचे का गहन विश्लेषण किया और इसमें सुधार के लिए कई व्यावहारिक सुझाव भी दिए। दोनों पक्षों के बीच सामग्री प्रबंधन से जुड़े बाकी अहम मुद्दों और नई व्यवस्था लागू करने की रूपरेखा पर चर्चा के लिए अगले सप्ताह एक और दौर की बैठक प्रस्तावित है।



















