तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में नवजात बच्चों की अवैध खरीद और बिक्री पर नकेल कसने की दिशा में पुलिस को एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। बालापुर पुलिस स्टेशन की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए मात्र 4 दिन के एक मासूम बच्चे को बिकने से बचा लिया है। यह बच्चा कुछ ही दिन पहले दुनिया में आया था, जिसे चंद रुपयों के लालच में बेचने की योजना तैयार की गई थी। समय रहते मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने सटीक योजना बनाई और गिरोह के मंसूबों पर पानी फेरते हुए एक आरोपी महिला को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
सौदा तय करने के लिए बदला गया ठिकाना
इस पूरे मामले की शुरुआत चंद्रायनगुट्टा इलाके से हुई, जहां की निवासी वहीदा खातून ने बरकस क्षेत्र में रहने वाली मेहरुनिस्सा नाम की महिला से संपर्क साधा था। आरोप है कि वहीदा खातून उस नवजात बच्चे को बेचना चाहती थी। दोनों पक्षों के बीच बच्चे की बोली लगाने को लेकर बातचीत शुरू हुई। शुरुआती दौर में इस मासूम की कीमत 6 लाख रुपये मांगी गई थी, लेकिन बातचीत के बाद सौदा 5 लाख रुपये में पक्का कर लिया गया। लेन देन की जगह भी पहले से तय की गई थी। शुरुआत में शाहीन नगर में यह सौदा होना था, मगर बाद में संदिग्धों ने जगह बदलकर पहाड़ीशरीफ के पास स्थित जेजीआर फंक्शन हॉल का इलाका चुन लिया।
सामाजिक कार्यकर्ता की सूचना और पुलिस का बिछाया जाल
जैसे ही इस गैरकानूनी सौदे की भनक लगी, सामाजिक कार्यकर्ता सफिया माही ने तुरंत बालापुर पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ता ने मिलकर एक रणनीति बनाई ताकि आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा जा सके। जेजीआर फंक्शन हॉल के समीप पुलिस की टीम ने पहले से ही घेराबंदी कर रखी थी। जैसे ही पैसों का लेन देन और बच्चे को सौंपने की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी, ठीक उसी समय पुलिस ने मौके पर धावा बोल दिया। पुलिस बल ने तुरंत 4 दिन के मासूम को अपनी सुरक्षा में ले लिया और आरोपी वहीदा खातून को मौके से गिरफ्तार कर लिया।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के दिन से जुड़े तार
तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि मासूम की जैविक मां गोलकोंडा इलाके की रहने वाली है। उस महिला ने मंगलवार को ही एक बच्चे को जन्म दिया था। डिलीवरी के बाद उसी दिन उसे मलाकपेट स्थित अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के तुरंत बाद यह बच्चा किस तरह वहीदा खातून तक पहुंचा, पुलिस अब इस कड़ी को जोड़ने में जुटी है। पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि नवजात की मां की इस मामले में क्या भूमिका थी या उसे किसी दबाव में रखा गया था।
संगठित गिरोह के नेटवर्क पर पुलिस की नजर
बालापुर पुलिस ने इस गंभीर मामले में कानूनी धाराओं के तहत केस दर्ज कर व्यापक जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक इकलौती घटना है या इसके पीछे नवजात बच्चों की तस्करी करने वाला कोई बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय है, इसकी गहनता से जांच की जा रही है। मामले में शामिल अन्य संभावित आरोपियों, मध्यस्थों और संभावित खरीदारों की भूमिका को खंगाला जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को भी कानून के दायरे में लाया जाएगा।



















