ब्रिटेन के आर्थर फेरी ने विंबलडन में इस टूर्नामेंट का सबसे रोमांचक मुकाबला जीतते हुए ग्रिगोर दिमित्रोव को पांच सेट तक चले संघर्ष में हराया और पहली बार करियर में किसी ग्रैंड स्लैम के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। यह जीत सेंटर कोर्ट पर दर्शकों के सामने बेहद नाटकीय अंदाज़ में पूरी हुई।
पांच सेट तक चला उतार-चढ़ाव भरा मुकाबला
मैच का स्कोर 7-5 3-6 4-6 6-4 7-6 (10-7) रहा, जो खुद बताता है कि यह मुकाबला कितनी बार करवट बदल चुका था। फेरी ने पहला सेट शानदार खेल दिखाते हुए अपने नाम किया, लेकिन इसके बाद दिमित्रोव ने वापसी करते हुए लगातार दो सेट जीतकर बढ़त बना ली। चौथे सेट में दिमित्रोव ने दो बार फेरी की सर्विस तोड़ी और बढ़त हासिल की, जिससे लग रहा था कि मुकाबला उन्हीं के पक्ष में जा रहा है। लेकिन फेरी ने पूरे टूर्नामेंट की तरह ही हार मानने से इनकार किया और दोनों बार वापसी करते हुए सेट बराबर किया, आखिरकार मुकाबले को पांचवें और निर्णायक सेट तक खींच लिया। निर्णायक सेट में फेरी ने अपना धैर्य नहीं खोया और टाईब्रेक में 10-7 से जीत दर्ज कर मैच अपने नाम किया। जीत की इस घड़ी में पूरा सेंटर कोर्ट खड़े होकर तालियां बजाने लगा।
जीत के बाद फेरी हाथ कमर पर रखे कुछ देर तक अविश्वास में सिर हिलाते रहे, मानो उन्हें खुद यकीन नहीं हो रहा हो कि उन्होंने क्या कर दिखाया है। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों में स्विट्ज़रलैंड के दिग्गज खिलाड़ी रोजर फेडरर भी शामिल थे, जो रॉयल बॉक्स से बैठकर मैच के आखिरी और सबसे रोमांचक पलों को देख रहे थे।
वाइल्डकार्ड खिलाड़ी ने रचा इतिहास
दुनिया के 114वें नंबर के खिलाड़ी फेरी को वाइल्डकार्ड के जरिए इस बार विंबलडन में एंट्री मिली थी और वह पहली बार टूर्नामेंट के सबसे बड़े कोर्ट पर उतरे थे, जो उनके बचपन के घर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। इस टूर्नामेंट से पहले फेरी कभी भी किसी ग्रैंड स्लैम में दूसरे दौर से आगे नहीं बढ़ पाए थे, इसलिए दिमित्रोव पर यह जीत अब तक के उनके करियर की सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है।
23 साल के फेरी की इस जीत ने कई रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिए हैं। वह ग्रैंड स्लैम के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाले पहले ब्रिटिश वाइल्डकार्ड खिलाड़ी बन गए हैं, और पिछले 12 साल में विंबलडन के पुरुष सिंगल्स के अंतिम आठ में पहुंचने वाले सबसे कम रैंकिंग वाले खिलाड़ी भी हैं। इसके अलावा वह ओपन एरा में विंबलडन के पुरुष सिंगल्स क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाले छठे ब्रिटिश खिलाड़ी बन गए हैं। दूसरे दौर के बाद से फेरी पुरुष और महिला दोनों सिंगल्स ड्रॉ में बचे इकलौते ब्रिटिश खिलाड़ी रहे हैं, और हर दौर में जीत दर्ज करके उन्होंने घरेलू दर्शकों की उम्मीदें ज़िंदा रखी हैं।
दिमित्रोव के लिए फिर लौटा वही दर्द
पूर्व विश्व नंबर तीन रहे दिमित्रोव के लिए यह हार इसी कोर्ट की पुरानी यादें ताज़ा कर गई। ठीक 12 महीने पहले इसी सेंटर कोर्ट पर उनका क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने का सपना चोट के चलते टूट गया था, जब वह बाद में चैंपियन बने यानिक सिनर के खिलाफ दो सेट की बढ़त लेने के बावजूद चोटिल होकर मुकाबले से हट गए थे। इस बार चौथे सेट में दो बार बढ़त लेने और मुकाबले पर पकड़ बनाने के बावजूद दिमित्रोव आखिर तक जीत को अंजाम तक नहीं पहुंचा सके, क्योंकि फेरी बार-बार वापसी करते हुए मुकाबले में डटे रहे।
अब आगे क्या
इस जीत के बाद फेरी का सामना क्वार्टर फाइनल में इटली के नौवें वरीयता प्राप्त खिलाड़ी फ्लाविओ कोबोली से होगा, जो बुधवार को सेमीफाइनल की टिकट के लिए खेला जाएगा। जो खिलाड़ी कुछ दिन पहले तक ग्रैंड स्लैम में दूसरे दौर से आगे कभी नहीं बढ़ पाया था, वह अब पुरुष सिंगल्स ड्रॉ के अंतिम आठ खिलाड़ियों में शामिल हो चुका है, और इस साल के विंबलडन में ब्रिटिश टेनिस के रिकॉर्ड बदल चुके इस सफर को आगे बढ़ाने के इरादे से उतरेगा।











