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लिंडा नोस्कोवा की विंबलडन जीत और स्वर्ग की ओर देखा उनका भावनात्मक संदेशटेनिस
12 जुल॰ 2026, 2:24 am (45 दिन पहले)· 1

लिंडा नोस्कोवा की विंबलडन जीत और स्वर्ग की ओर देखा उनका भावनात्मक संदेश

विंबलडन के सेंटर कोर्ट पर एक संघर्षपूर्ण मुकाबले में जीत हासिल करने के बाद लिंडा नोस्कोवा ने अपनी स्वर्गीय मां को यह खिताब समर्पित किया। मैच के दौरान पांच चैंपियनशिप पॉइंट गंवाने के बावजूद, उन्होंने शानदार वापसी करते हुए कैरोलिना मुचोवा को मात दी।

जब लिंडा नोस्कोवा विंबलडन के सेंटर कोर्ट पर सर्विस करने के लिए बेसलाइन पर पहुंचीं, तो दर्शकों की सांसें थम सी गई थीं। एक समय ऐसा लग रहा था कि मैच पूरी तरह से उनके पक्ष में है। जब उन्होंने 6-2 और 5-2 की बढ़त बना ली थी और उनके पास जीत के लिए पांच चैंपियनशिप पॉइंट्स थे, तब तनाव हावी होने लगा और मुकाबला निर्णायक सेट तक खिंच गया। हालांकि, अंत में छठे चैंपियनशिप पॉइंट पर उन्होंने ऐसी दमदार सर्विस की कि कैरोलिना मुचोवा उसे मुश्किल से ही छू पाईं और गेंद घास पर लुढ़क गई।

मैदान पर अद्भुत संघर्ष

इस रोमांचक मोड़ से उबरकर जीत हासिल करना जॉन मैकेनरो जैसे दिग्गजों की नजर में इस कोर्ट पर देखा गया अब तक का सबसे बेहतरीन प्रयास माना गया। मैच के बाद 21 वर्षीय लिंडा नोस्कोवा के जहन में एक खास इंसान की यादें थीं। अपने परिवार को धन्यवाद देने के बाद, जहां उनके पिता ड्राहोस स्टैंड से उन्हें देख रहे थे, उन्होंने अपनी मां को याद किया। उन्होंने कहा कि वह अपनी मां के बिना आज यहां नहीं होतीं। आंखों में आंसू लिए उन्होंने अपने दाहिने हाथ को चूमा और आसमान की ओर उठाया, जिसके बाद दर्शकों ने खड़े होकर उनका उत्साहवर्धन किया।

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मां की प्रेरणा और मानसिक मजबूती

लिंडा नोस्कोवा की मां, इवाना का निधन विंबलडन 2024 की शुरुआत से ठीक पहले कैंसर के कारण हो गया था। उस समय 19 वर्ष की रहीं लिंडा ने अपनी मां के गुजरने के अगले सोमवार को ही मैच खेला और विंबलडन में अपनी पहली जीत दर्ज की थी। उनकी मां का मानना था कि लिंडा को किसी भी स्थिति से विचलित न होने का गुण अपने पिता से मिला है। चाहे मैच पॉइंट हो या ब्रेक पॉइंट, वह खुद को स्थिति से अलग कर शांत रहने में सक्षम थीं। शनिवार को इसी आंतरिक शक्ति ने उन्हें मुश्किल समय से बाहर निकाला।

तनावपूर्ण क्षण और वापसी

मैच के ज्यादातर समय लिंडा नोस्कोवा ने बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन कैरोलिना मुचोवा द्वारा तीन चैंपियनशिप पॉइंट्स बचाने के बाद दबाव साफ देखा जा सकता था। दूसरे सेट में दो बार डबल-फॉल्ट करने वाली लिंडा का खेल लड़खड़ा गया था। अपनी जीत के पहले प्रयास में असफल होने के बाद, वह काफी हताश दिखीं और उन्होंने अपने कान ढक लिए। दर्शक भी इस तनाव को महसूस कर रहे थे। हालांकि, सेट हारने के बाद कोर्ट से बाहर जाकर उन्होंने खुद को संभाला। लिंडा ने बताया कि बाथरूम में ठंडा पानी छिड़कने और दोबारा शुरुआत करने से उन्हें मदद मिली। वापसी के बाद उन्होंने अपनी सर्विस पर तीन ब्रेक पॉइंट्स बचाए और फिर मुचोवा की सर्विस तोड़कर शानदार जीत पक्की की।

चेक गणराज्य की टेनिस विरासत

पेट्रा क्वितोवा और मार्टिना नवरातिलोवा जैसे चेक दिग्गजों ने रॉयल बॉक्स से लिंडा नोस्कोवा की जीत को देखा और वे अपनी भावनाएं नहीं रोक पाईं। यह जीत लिंडा को 2011 में पेट्रा क्वितोवा के बाद सबसे युवा विंबलडन चैंपियन बनाती है। चेक गणराज्य की ओर से मार्केटा वोंद्रोउसोवा और बारबोरा क्रेजिकोवा के बाद, पिछले चार वर्षों में यह तीसरी बार है जब चेक खिलाड़ी ने यह खिताब जीता है। इस सफलता के पीछे कोई गुप्त नुस्खा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर मजबूत कोचिंग परंपराएं हैं। मार्टिना नवरातिलोवा ने बताया कि पूरे चेक गणराज्य में टेनिस क्लबों की भरमार है और युवा खिलाड़ियों को शुरुआत से ही सिंगल्स और डबल्स खेलने का सही प्रशिक्षण दिया जाता है। लिंडा नोस्कोवा भी इसी परंपरा से प्रेरित हैं और उनका मानना है कि जब उनके आदर्श खिलाड़ी इसे हासिल कर सकते हैं, तो वह क्यों नहीं।

सवाल-जवाब

लिंडा नोस्कोवा ने अपना विंबलडन खिताब किसे समर्पित किया?
उन्होंने अपना खिताब अपनी दिवंगत मां इवाना को समर्पित किया।
क्या लिंडा नोस्कोवा इस जीत के बाद सबसे कम उम्र की चैंपियन बनी हैं?
जी हां, वह 2011 में पेट्रा क्वितोवा के बाद विंबलडन की सबसे युवा चैंपियन हैं।
लिंडा नोस्कोवा के खिलाफ मैच में कौन था?
लिंडा नोस्कोवा का मुकाबला कैरोलिना मुचोवा से हुआ था।
क्या लिंडा नोस्कोवा विंबलडन देखने लायक है?
यह एक रोमांचक और भावनात्मक मैच रहा जो टेनिस प्रेमियों के लिए देखने लायक है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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