विंबलडन कोर्ट पर सभी की नज़रें खिलाड़ियों पर होती हैं, लेकिन मैचों को सही ढंग से संचालित करने के लिए कोर्ट के किनारे मौजूद अन्य लोगों की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। ऑल इंग्लैंड क्लब ने अंपायरों और बॉल बॉयज तथा गर्ल्स के कामकाज से संबंधित दर्शकों के कई सवालों के स्पष्ट जवाब दिए हैं।
अंपायरों के नियम और ब्रेक
अक्सर दर्शक यह जानना चाहते हैं कि क्या अंपायर मैच के दौरान ब्रेक ले सकते हैं। यदि कोई अंपायर एक दिन में कई मैचों में अंपायरिंग कर रहा है, तो उन्हें मैचों के बीच में पर्याप्त आराम दिया जाता है। मैच के बीच में यदि किसी अंपायर को अचानक टॉयलेट ब्रेक की जरूरत पड़ जाए, तो यह पूरी तरह वर्जित नहीं है और वे ऐसा कर सकते हैं, हालांकि वे कोशिश यही करते हैं कि मैच के दौरान उन्हें ऐसी नौबत न आए। जहाँ तक खाने-पीने की बात है, वे अपनी कुर्सी पर बैठकर ऑर्डर नहीं दे सकते, लेकिन उन्हें पानी जैसी आवश्यक चीजें साथ रखने की अनुमति होती है। इसके अलावा, उन्हें छोटे-मोटे खाद्य पदार्थ जैसे केले लाने की भी छूट रहती है।
तकनीकी निर्णय और उपकरणों का उपयोग
अंपायरों द्वारा उपयोग किए जाने वाले उपकरणों के बारे में भी काफी उत्सुकता रहती है। क्या वे हॉक-आई जैसे इलेक्ट्रॉनिक फैसलों को बदल सकते हैं? इसका जवाब है नहीं, हॉक-आई जैसे सिस्टम द्वारा दिए गए इलेक्ट्रॉनिक निर्णय अंतिम होते हैं। यहां तक कि खिलाड़ी भी इन फैसलों को चुनौती देने का अधिकार नहीं रखते। अंपायरों के पास मौजूद आईपैड या टैबलेट का उपयोग मुख्य रूप से टूर्नामेंट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर चलाने के लिए किया जाता है, जिससे स्कोरिंग और अन्य मैच संबंधी डेटा को प्रबंधित करना आसान हो जाता है।
बॉल बॉयज और गर्ल्स: चयन और प्रशिक्षण
बॉल बॉयज और गर्ल्स की नियुक्ति के संबंध में अक्सर सवाल उठते हैं। क्या उन्हें भुगतान मिलता है? स्पष्टीकरण यह है कि उन्हें कोई वेतन नहीं दिया जाता, बल्कि उन्हें दो सप्ताह के टूर्नामेंट के दौरान उनके खर्चों को पूरा करने के लिए एक स्टाइपेंड मिलता है। इनका चयन आसपास के स्कूलों से किया जाता है, और आयु सीमा 13 से 18 वर्ष (ईयर 9 से 13) के बीच होती है। हर साल लगभग 1600 आवेदकों में से करीब 280 को चुना जाता है।
प्रशिक्षण और ड्यूटी
इन युवाओं का प्रशिक्षण कार्यक्रम काफी व्यवस्थित है। फरवरी से जून के बीच वे सप्ताह में एक बार प्रशिक्षण लेते हैं, और फिर क्वालीफाइंग राउंड शुरू होने से पहले उन्हें एक पूरा सप्ताह सघन प्रशिक्षण दिया जाता है। एक अन्य आम सवाल यह है कि क्या वे अब भी फाइनलिस्ट खिलाड़ियों का बैग ले जाते हैं। यह परंपरा अभी भी कायम है, लेकिन खिलाड़ियों से पहले पूछा जाता है कि क्या वे अपना बैग ले जाने की सुविधा लेना चाहते हैं या नहीं। यदि खिलाड़ी मना कर देते हैं, तो उन्हें मजबूर नहीं किया जाता।











