अमेरिकी टेनिस खिलाड़ी एम्मा नवारो ने अपने खेल करियर के सबसे बेहतरीन दौर के पीछे छिपे गंभीर शारीरिक और मानसिक संघर्षों को साझा किया है। उन्होंने बताया कि कोर्ट पर अप्रत्याशित रूप से महसूस होने वाले अत्यधिक गुस्से, लगातार थकान, चक्कर आने और भारी वजन घटने की वजह से वह लंबे समय तक बेहद परेशान रहीं। इन जटिलताओं के बावजूद अब सही इलाज और पोषण मिलने पर उन्हें महसूस हो रहा है कि उन्होंने अपना सामान्य जीवन वापस पा लिया है।
सफलता के चरम पर छिपा था गहरा संकट
साल 2024 में 25 वर्षीय खिलाड़ी विश्व रैंकिंग में करियर के सर्वश्रेष्ठ आठवें पायदान तक पहुंची थीं। उसी सत्र में उन्होंने ग्रैंड स्लैम स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलियन ओपन और विंबलडन के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी, जबकि अपने घरेलू शहर न्यूयॉर्क में आयोजित यूएस ओपन में वह सेमीफाइनल तक का सफर तय करने में सफल रही थीं। बाहर से देखने पर सब कुछ बेहद सहज और ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा लग रहा था, लेकिन अंदरूनी तौर पर उनका शरीर लगातार कमजोर हो रहा था।
साल 2023 और 2024 के दौरान उनका वजन लगभग 14 किलोग्राम कम हो गया था। ऑस्ट्रेलिया में आयोजित होबार्ट इंटरनेशनल प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने डब्ल्यूटीए टूर पर अपनी पहली बड़ी खिताबी जीत दर्ज की, किंतु यह खुशी उनके लिए बेहद कड़वे अनुभवों से भरी साबित हुई। उस पूरे सप्ताह के दौरान उन्हें ऐसे असामान्य मानसिक उतार-चढ़ाव झेलने पड़े, जिनका उन्होंने पहले कभी अनुभव नहीं किया था।
कोर्ट पर अनियंत्रित झुंझलाहट और शारीरिक लक्षण
होबार्ट में मिली सफलता के समय के मानसिक हालात बयां करते हुए नवारो ने माना कि वह सामान्य स्थिति में नहीं थीं। उनके भीतर लगातार चिड़चिड़ापन, निराशा, परफेक्शन की सनक, बेचैनी और कोर्ट के भीतर असामान्य स्तर का गुस्सा उमड़ रहा था। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि उनका मन अपने बैग में रखे सारे रैकेट तोड़ देने का करता था, जबकि उन्होंने जीवन में पहले कभी ऐसा न तो किया था और न ही सोचा था।
नवारो के अनुसार, टीम का कोई भी सदस्य, आसपास के लोग, कोर्ट पर होने वाली छोटी सी चूक या गंवाया हुआ हर एक अंक उन्हें बुरी तरह उत्तेजित कर देता था। वह बाहरी दुनिया के सामने इन भावनाओं को दबाने और खुद को संयमित दिखाने की पूरी कोशिश करती थीं। इसके साथ ही शारीरिक स्तर पर वह दिन के हर घंटे तीव्र भूख से जूझ रही थीं, क्योंकि शरीर को बुनियादी जरूरतों के मुताबिक ईंधन नहीं मिल पा रहा था।
स्वास्थ्य संबंधी जांच और गंभीर निदान
साल 2025 में यह स्थिति और बिगड़ गई, जब उन्हें लगातार सिरदर्द, चक्कर आने, मानसिक धुंधलापन यानी ब्रेन फॉग, अत्यधिक सुस्ती, चिंता और अनियंत्रित मूड स्विंग्स का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों, पोषण विशेषज्ञों और विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लेने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि वह खेल में सापेक्ष ऊर्जा की कमी यानी रिलेटिव एनर्जी डेफिशिएंसी इन स्पोर्ट (आरईडी-एस) से जूझ रही थीं।
इसके तुरंत बाद जांच में यह भी सामने आया कि वह हाशिमोटो हाइपोथायरायडिज्म नामक ऑटोइम्यून विकार से पीड़ित हैं। इन दोनों समस्याओं के संयुक्त प्रभाव की वजह से साल 2026 के शुरुआती सत्र में उनका प्रदर्शन बुरी तरह प्रभावित हुआ, जहां उन्हें पहले 13 मुकाबलों में से 9 में हार का सामना करना पड़ा। नतीजतन मार्च के अंत में उन्हें चार्ल्सटन ओपन से हटने का कड़ा फैसला लेना पड़ा।
पुनर्प्राप्ति का मार्ग और भविष्य की तैयारी
शुरुआत में तीन साल तक इन शुरुआती संकेतों की अनदेखी करने की मुख्य वजह यह थी कि कोर्ट पर उनके नतीजे अपेक्षाओं से कहीं बेहतर आ रहे थे। रैंकिंग लगातार सुधर रही थी, उनकी फुर्ती और फिटनेस बाहर से बेहतरीन नजर आ रही थी, जिससे स्वास्थ्य से जुड़े खतरे छिप गए।
अगले सत्र की पूरी तैयारी के तहत उन्होंने एशियाई दौर से हटने का निर्णय लिया है ताकि स्वास्थ्य पूरी तरह पटरी पर लौट सके। शरीर में पर्याप्त पोषण और थोड़ा वजन बढ़ने के बाद अब उनके पास हर दिन अभ्यास करने, कड़ा मुकाबला करने और टेनिस से इतर एक संतुलित जीवन जीने के लिए पर्याप्त ऊर्जा मौजूद है।



















