ब्रिटिश टेनिस खिलाड़ी एम्मा राडुकानु जब कोर्ट पर अपने पुराने गौरव को हासिल करने की कोशिश में जुटी हैं, तब उन्हें खेल के दिग्गज आंद्रे अगासी के सफर से नई राह और प्रेरणा मिल रही है। राडुकानु ने 2009 में प्रकाशित अगासी की आत्मकथा को पढ़ा है और उसमें दर्ज अनुभवों को अपने मौजूदा संघर्षों से काफी करीब पाया है। अमेरिकी दिग्गज अगासी खुद अपनी किशोरावस्था में विलक्षण प्रतिभा के धनी माने जाते थे और बाद में उन्होंने 1992 में 22 वर्ष की उम्र में विंबलडन के रूप में अपने करियर का पहला बड़ा सिंगल्स खिताब अपने नाम किया था। हालांकि, शीर्ष तक के सफर में उन्हें कई कठिन मोड़ों से गुजरना पड़ा था, जब वह लगातार चार साल तक कोई मेजर खिताब नहीं जीत सके और उनकी विश्व रैंकिंग गिरकर 141वें स्थान पर पहुंच गई थी।
राडुकानु ने यूनिक्लो से बातचीत करते हुए बताया कि वह अगासी की किताब के उस हिस्से से विशेष रूप से प्रभावित हुईं, जहां उन्होंने 1990 के दशक के उत्तरार्ध में अपनी खुद की ट्रेनिंग योजना बनाकर उस गिरावट के दौर से पार पाया और फिर से शीर्ष मुकाम हासिल किया। राडुकानु के अनुसार, वह किताब अगासी की शुरुआती कामयाबियों और शायद उन्हीं सफलताओं के चलते सामने आई मुश्किलों और गिरावटों के बारे में बेहद विस्तार से बात करती है। उन्होंने कहा कि किताब में लिखी बहुत सी बातें उनके अपने जीवन और करियर से बेहद मेल खाती हैं।
अगासी ने साझा किया आत्मकथा का असल मकसद
अगासी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी इस आत्मकथा का असल उद्देश्य ही यही था कि उनके जीवन के अनुभव दूसरे खिलाड़ियों को उनके करियर के मुश्किल पलों में सहारा दे सकें। अगासी ने कहा कि जब कोई यह कहता है कि वह इन अनुभवों से खुद को जोड़ पा रहा है, तो यह सुनना वाकई सुकून देता है। उनका मानना था कि अगर कोई एक व्यक्ति भी इसे पढ़कर उम्मीद हासिल करता है, अकेलेपन के अहसास से बाहर निकलने के साधन पाता है और टेनिस खेल के प्रति हताशा निकाले बिना एक स्वस्थ मानसिक स्थिति तक पहुंच पाता है, तो वह इस किताब को पूरी तरह सफल मानेंगे। 17 साल बाद भी किसी खिलाड़ी पर इस किताब का गहरा असर पड़ना उनके लिए खुशी की बात है।
चोटों की मार और रैंकिंग में भारी गिरावट का सामना
एम्मा राडुकानु ने ठीक पांच साल पहले न्यूयॉर्क में इतिहास रचा था, जब महज 18 साल की उम्र में उन्होंने ओपन युग में क्वालीफायर के तौर पर यूएस ओपन का ग्रैंड स्लैम खिताब जीतकर दुनिया को चौंका दिया था। इसके बाद जुलाई 2022 में वह अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ 10वीं रैंकिंग तक भी पहुंचीं। लेकिन अब 23 साल की हो चुकीं इस खिलाड़ी की विश्व रैंकिंग फिसलकर 98वें स्थान पर आ गई है। उनके आगे बढ़ने के सिलसिले में लगातार आ रही शारीरिक परेशानियां बड़ी बाधा साबित हुई हैं।
हाल ही में राडुकानु अपने निचले दाहिने पैर के स्ट्रेस फ्रैक्चर से उबरने की प्रक्रिया में होने की वजह से यूएस ओपन में हिस्सा नहीं ले पाई थीं। इस साल की शुरुआत में पैरों की चोट के कारण उनका प्री-सीजन अभ्यास प्रभावित हुआ था और इसके बाद एक पोस्ट-वायरल बीमारी की वजह से उन्हें ढाई महीने तक टेनिस कोर्ट से पूरी तरह दूर रहना पड़ा था। हालांकि, इन तमाम बाधाओं के बीच जून में क्वींस क्लब में उनका प्रदर्शन काफी शानदार रहा, जहां उन्होंने न्यूयॉर्क की अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद से सबसे बड़े फाइनल में जगह बनाई।
नतीजों से खुद को आंकने के बजाय दैनिक प्रयास पर जोर
अगासी ने अपने शानदार करियर में सभी चारों ग्रैंड स्लैम जीते हैं और 1996 के ओलंपिक खेलों में सिंगल्स का स्वर्ण पदक भी हासिल किया है। जब उनसे राडुकानु के लिए सलाह के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वह राडुकानु को हर दिन अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करेंगे, लेकिन खुद को सिर्फ नतीजों से न आंका जाए या यह न सोचा जाए कि हमेशा सौ प्रतिशत ही होना जरूरी है।
अगासी ने स्पष्ट किया कि किसी भी खिलाड़ी को उस दिन के अपने उपलब्ध सामर्थ्य का पूरा इस्तेमाल करना सीखना चाहिए, चाहे वह क्षमता किसी भी स्तर पर क्यों न हो, और लोगों की बातों की परवाह किए बिना अपनी पहचान में सहज महसूस करना चाहिए। अगासी ने दोनों दौर की तुलना करते हुए कहा कि उनके समय में अखबार को किनारे रखकर नकारात्मक बातों से बचा जा सकता था, लेकिन आज के युवा खिलाड़ियों के लिए ऐसे दबावों और चर्चाओं से खुद को बचा पाना कहीं अधिक मुश्किल हो चुका है।
बचपन का दबाव और खेल से दोबारा जुड़ाव की सीख
अगासी के लिए टेनिस कभी भी बचपन का शौक या जुनून नहीं रहा था। उनके पिता अपने बेटे को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनाने के लिए इतने उत्सुक थे कि वह बचपन में ही दूसरों के सामने उनका परिचय भविष्य के नंबर एक खिलाड़ी के रूप में कराया करते थे। अगासी का कहना है कि उस अतिरिक्त दबाव की वजह से वह हमेशा एक डर के साथ कोर्ट पर खेलते रहे। जब वह विश्व नंबर एक से फिसलकर 141वें पायदान पर आ गए, तभी वह वास्तव में इस खेल के साथ एक सच्चा और नया रिश्ता बना सके।
उस मंदी और संघर्ष के दौर में अगासी ने वंचित बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने के लिए एक फाउंडेशन की स्थापना भी की थी। अगासी ने कहा कि डर के साए में खेलने के मुकाबले उन्हें उस दौर के बाद कहीं अधिक वास्तविक सफलता और संतुष्टि हासिल हुई। माता-पिता को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि पहली बात यह समझनी चाहिए कि यह उनकी अपनी नहीं बल्कि उनके बच्चे की जिंदगी है। अगर बच्चे का पालन-पोषण उसके अपने स्वभाव और तरीके के अनुसार किया जाए तो वह कभी भटकता नहीं है, बस जरूरत उसके अपने रास्ते को पहचानने की होती है।
लंदन में लेवर कप की कप्तानी की तैयारी
अगासी 25 से 27 सितंबर के बीच लंदन के द ओ2 एरिना में आयोजित होने वाले लेवर कप में टीम यूएसए की कप्तानी करने जा रहे हैं। टूर्नामेंट को लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पेशेवर टेनिस एक तरह के पहिए की तरह लगातार चलता रहता है, ऐसे में इन खिलाड़ियों का इस शानदार आयोजन के लिए अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालना ही यह साबित करता है कि यह टूर्नामेंट कितना अहम है।
उन्होंने आगे कहा कि चूंकि उनकी टीम यूरोप में टीम यूरोप के खिलाफ खेलने जा रही है, इसलिए यह कह पाना मुश्किल है कि घरेलू दर्शक किसे अपना समर्थन देंगे। लेकिन अगासी ने यह भरोसा जरूर जताया कि दर्शकों को वहां असाधारण और रोमांचक टेनिस देखने को मिलेगा।



















