दक्षिण-पश्चिम लंदन के घास के मैदानों ने खेल इतिहास की कई सबसे रोमांचक और यादगार कहानियों को अपने भीतर समेटा है, लेकिन हाल के वर्षों में स्थानीय वाइल्डकार्ड खिलाड़ी आर्थर फेरी की इस जादुई सफलता जैसी कहानी शायद ही कभी देखने को मिली हो। ऑल इंग्लैंड क्लब के सेंटर कोर्ट पर जब आर्थर फेरी ने शानदार खेल दिखाते हुए फ्लेवियो कोबोली को शिकस्त दी, तो वहां मौजूद हर एक दर्शक झूम उठा। ब्रिटिश टेनिस के लिए विंबलडन में ऐसे दिन बेहद दुर्लभ और अनमोल होते हैं, जिन्हें लंबे समय तक याद रखा जाता है। घरेलू मैदान पर खेल रहे आर्थर फेरी ने इस पूरे टूर्नामेंट में जिस तरह का जज्बा दिखाया है, उसने देश के खेल प्रेमियों को झूमने का एक और बड़ा मौका दे दिया है।
ब्रिटिश टेनिस के इतिहास में एक नया अध्याय
ब्रिटेन में विंबलडन को लेकर एक अलग ही जूनून देखने को मिलता है। साल 2013 में जब एंडी मरे ने देश के लिए पुरुषों के सिंगल्स खिताब के 77 साल के लंबे इंतजार को खत्म किया था, तब पूरे देश में उत्साह का माहौल था। इसके तीन साल बाद, 2016 में जब उन्होंने दोबारा चैंपियनशिप जीती, तब भी प्रशंसकों का उत्साह चरम पर था। हाल के वर्षों में जोहाना कोंटा और कैमरन नोरी ने भी विंबलडन के सेमीफाइनल तक का सफर तय करके ब्रिटिश प्रशंसकों के दिलों में बड़ी उम्मीदें जगाई थीं। हालांकि, उन सभी ऐतिहासिक जीतों और शानदार प्रदर्शनों के पीछे एक ठोस तर्क और उम्मीद मौजूद थी, क्योंकि वे सभी स्थापित खिलाड़ी थे। लेकिन इस बार एक वाइल्डकार्ड खिलाड़ी आर्थर फेरी का सेमीफाइनल तक का सफर तय करना पूरी तरह से अप्रत्याशित था। इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी और यही वजह है कि सेंटर कोर्ट पर मौजूद दर्शकों ने इस जीत का जश्न बेहद खास अंदाज में मनाया। कई प्रशंसक तो इस ऐतिहासिक दिन की खुशी में जश्न मनाने के लिए तुरंत सेंटर कोर्ट से बाहर निकलकर अपनी पसंदीदा ड्रिंक का लुत्फ उठाने चले गए। यह वाकई एक दशक पहले एंडी मरे के दूसरे खिताब के बाद से ब्रिटिश टेनिस के लिए सबसे बेहतरीन दिन माना जा रहा है।
ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के क्लब में आर्थर फेरी की एंट्री
आर्थर फेरी अभी से इस सफलता का जश्न मनाने के मूड में नहीं हैं, क्योंकि उनके सामने शुक्रवार को होने वाला एक बेहद कठिन सेमीफाइनल मुकाबला है, जहां उनका सामना जर्मनी के दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी और फ्रेंच ओपन चैंपियन एलेक्जेंडर ज्वेरेव से होगा। फ्लेवियो कोबोली के खिलाफ जीत दर्ज करने के बाद आर्थर फेरी ने अपने दिल की बात साझा की। उन्होंने बताया कि मैच के आखिरी गेम के दौरान उन्होंने ऐसी भावनाओं को महसूस किया जो उन्होंने अपने जीवन में पहले कभी नहीं अनुभव की थीं। उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि सेंटर कोर्ट पर मौजूद घरेलू दर्शकों का समर्थन उनके लिए एक बहुत बड़ी ताकत साबित हुआ। इस मुकाबले को देखने के लिए सेंटर कोर्ट पर 15,000 से अधिक घरेलू प्रशंसक मौजूद थे, जबकि हजारों की संख्या में लोग हेनमैन हिल पर जुटे हुए थे, जिसे अब प्रशंसकों ने मजाकिया तौर पर 'आर्थर सीट' नाम दे दिया है। पूरे देश में टीवी स्क्रीनों के सामने बैठे लोग भी इस मुकाबले से पूरी तरह बंधे हुए थे। आर्थर फेरी साल 1968 में ओपन एरा की शुरुआत के बाद से विंबलडन के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले केवल पांचवें ब्रिटिश पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। इसके अलावा, विंबलडन के इतिहास में वाइल्डकार्ड के रूप में पुरुष सिंगल्स के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले वे केवल दूसरे खिलाड़ी हैं। पूरे ग्रैंड स्लैम इतिहास की बात करें तो केवल चार पुरुष ही वाइल्डकार्ड के तौर पर सेमीफाइनल में पहुंचे हैं, जिनमें जिमी कोनर्स (1991 यूएस ओपन), हेनरी लेकोंटे (1992 फ्रेंच ओपन), और गोरान इवानिसेविच (2001 विंबलडन) के नाम शामिल हैं। इन महान खिलाड़ियों में से केवल गोरान इवानिसेविच ही आगे चलकर खिताब जीतने में सफल रहे थे।
रैंकिंग में छलांग और शानदार इनामी राशि
इस जादुई सफर के दम पर आर्थर फेरी अब विश्व रैंकिंग में 36वें स्थान पर पहुंच जाएंगे, जबकि इस टूर्नामेंट से पहले वे कभी भी टॉप 100 में भी जगह नहीं बना पाए थे। इस शानदार छलांग की बदौलत अब उन्हें भविष्य के सभी बड़े टेनिस टूर्नामेंटों में सीधे प्रवेश मिलना तय हो गया है। इसके अलावा, उन्हें इस सेमीफाइनल तक पहुंचने के लिए £900,000 (लगभग 9 लाख पाउंड) का बड़ा चेक मिलेगा, और अगर वे एलेक्जेंडर ज्वेरेव को हराने में सफल रहते हैं, तो यह राशि और अधिक बढ़ जाएगी। हालांकि, आर्थर फेरी पैसों को अपनी सफलता का पैमाना नहीं मानते। उन्होंने एक बार कहा था कि वे अपनी जीतों को मौद्रिक मूल्य के रूप में नहीं देखते, बल्कि इसे उन वर्षों की कड़ी मेहनत के परिणाम के रूप में देखते हैं जो उन्होंने कोर्ट पर पसीना बहाकर की है। मेलबर्न में ऑस्ट्रेलियन ओपन के दौरान उन्होंने अपने टेनिस करियर में इस पैसे को 'रीइन्वेस्ट' करने की बात कही थी, लेकिन असलियत यह है कि उनके लिए पैसा कभी भी कोई बड़ी समस्या नहीं रहा है। उनके पिता लोइक फेरी एक बड़े एसेट मैनेजर हैं जो फ्रांस के लीग 1 फुटबॉल क्लब लॉरिएंट के मालिक भी रहे हैं। वहीं उनकी मां ओलिविया भी फ्रांस की पूर्व फेड कप खिलाड़ी रह चुकी हैं, जिन्होंने बाद में LTA के लिए बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर के रूप में काम किया था।
जमीन से जुड़े आर्थर और उनका अनूठा व्यक्तित्व
आर्थर फेरी के इतने रसूखदार परिवार से आने के बावजूद, उनके करीबी लोग बताते हैं कि वे बेहद जमीन से जुड़े इंसान हैं और खुद अपने दम पर जीवन में अपनी राह बनाना चाहते हैं। उनके कोच जेरोम बेनार्ड उन्हें एक बेहद सामान्य 23 वर्षीय युवक के रूप में देखते हैं जो खेल में असाधारण रूप से अच्छा है। आर्थर फेरी के पुराने दोस्त और ब्रिटिश खिलाड़ी फेलिक्स गिल बताते हैं कि आर्थर उनके दोस्तों के समूह में सबसे मजाकिया और शरारती व्यक्ति हैं। उनके कोच ने बताया कि हर सुबह जब आर्थर फिजियोथेरेपी ट्रीटमेंट ले रहे होते हैं, तब वे दोनों मिलकर फुटबॉल वर्ल्ड कप के हाइलाइट्स देखते हैं और रोजमर्रा की सामान्य चीजों पर बातें करते हैं। उनके बीच का माहौल बिल्कुल वैसा ही रहता है, मानो वे क्रोएशिया में किसी छोटे चैलेंजर स्तर के टूर्नामेंट में खेल रहे हों। आर्थर फेरी का बचपन ऑल इंग्लैंड क्लब के बेहद करीब ही बीता था। वे हर गर्मियों में विंबलडन चैंपियनशिप देखने आया करते थे और जिन सितारों को वे कोर्ट पर खेलते हुए देखते थे, घर जाकर उन्हीं की तरह खेलने की कोशिश करते थे। आज वे खुद ऑल इंग्लैंड क्लब के सबसे बड़े स्टार बन चुके हैं और आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की पढ़ाई और चोटों से संघर्ष
आर्थर फेरी का जन्म फ्रांस के पेरिस में फ्रांसीसी माता-पिता के घर हुआ था, लेकिन जब वे छोटे थे तभी उनका परिवार विंबलडन में आकर बस गया था। ब्रिटिश टेनिस एसोसिएशन यानी LTA के सिस्टम में एक होनहार खिलाड़ी के रूप में उभरने के बाद, उन्होंने कैलिफोर्निया की प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी जाने का फैसला किया। उन्होंने वहां साइंस, टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी विषय में अपनी डिग्री पूरी की, ताकि अगर टेनिस में करियर सफल न हो, तो उनके पास एक मजबूत शैक्षणिक बैकग्राउंड रहे। वहां टेनिस स्कॉलरशिप पर खेलते हुए उन्होंने अपने खेल को और अधिक निखारा। उन्होंने पेशेवर एटीपी टूर पर पूरी तरह कदम रखने में थोड़ी देरी की, ताकि वे जॉन मैकेनरो और ब्रायन ब्रदर्स जैसे दिग्गजों के रास्ते पर चल सकें जिन्होंने कॉलेज टेनिस के जरिए बड़ी सफलताएं हासिल की थीं। हालांकि, उनका सफर इतना आसान नहीं रहा है। उनके हाथ की हड्डी में आई गंभीर चोट (बोन ब्रूज़िंग) के कारण उन्हें काफी समय तक कोर्ट से बाहर रहना पड़ा, जिसने उनके मन में कई संदेह और निराशा के क्षण पैदा किए थे। इस तरह की चोटों से उबरने के लिए अत्यधिक धैर्य की आवश्यकता होती है, क्योंकि इसमें पूरी तरह आराम करना ही एकमात्र इलाज होता है। पिछले दो सत्रों से लगातार बिना किसी रुकावट के खेलने के बाद अब उन्हें अपनी इस तपस्या का फल मिल रहा है।
कोर्ट पर शांत स्वभाव और शाही मुलाकात
कोर्ट पर खुद को पूरी तरह शांत, गंभीर और केंद्रित रखना ही आर्थर फेरी की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी रही है। खेल के दौरान वे बड़े से बड़े खिलाड़ियों या हस्तियों के सामने बिल्कुल भी विचलित नहीं होते। चौथे दौर में जब वे ग्रिगोर दिमित्रोव के खिलाफ खेल रहे थे, तब महान रोजर फेडरर भी स्टैंड में बैठकर उनका मैच देख रहे थे, लेकिन फेरी ने बिना किसी दबाव के वह मैच जीता। कोबोली के खिलाफ मुकाबले के दौरान क्वीन कैमिला भी स्टैंड में मौजूद थीं और मैच से पहले व बाद में फेरी ने उनसे मुलाकात भी की। इस मुलाकात को लेकर आर्थर ने बताया कि क्वीन कैमिला ने उन्हें बधाई दी और इसी तरह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन जारी रखने के लिए कहा। आर्थर ने क्वीन कैमिला से यह भी साझा किया कि आने वाले रविवार को उनका जन्मदिन है, और वे अपने जन्मदिन के दिन विंबलडन का फाइनल मैच खेलना चाहते हैं। एक ब्रिटिश वाइल्डकार्ड खिलाड़ी का अपने 24वें जन्मदिन पर विंबलडन के फाइनल में खेलना वाकई किसी परीकथा जैसा होगा, और खेल जगत को उम्मीद है कि फेरी की यह खूबसूरत कहानी इस बार सच साबित होगी।











