आगरा के कैलाश मार्ग पर घने जंगलों के बीच एक ऐसी इमारत स्थित है जो अपनी रहस्यमयी कहानियों और पुरानी दंतकथाओं के कारण हमेशा चर्चा का केंद्र बनी रहती है। इस स्थान को श्याम कुटी के नाम से जाना जाता है, जिसकी वर्तमान स्थिति काफी जर्जर हो चुकी है और इसके चारों तरफ एक अजीब सा सन्नाटा पसरा रहता है। स्थानीय स्तर पर इस जगह को लेकर कई प्रकार के डरावने किस्से गाहे-बगाहे सुने जाते हैं, जिनके कारण आम जनता शाम ढलने के बाद यहाँ कदम रखने से परहेज करती है।
इमारत का निर्माण और इतिहास
देवकी बाबा के मुताबिक, इस ऐतिहासिक इमारत का निर्माण अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान कराया गया था। इसे धौलपुर के एक राजा के यहाँ अपनी सेवाएँ देने वाले मंत्री श्याम ने बनवाया था। शुरुआती समय में यह एक आवासीय परिसर की तरह था, लेकिन समय बीतने के साथ यह वीरान हो गया। देवकी बाबा के अनुसार, इस भवन के वीरान होने के पीछे यह बात भी कही जाती है कि मंत्री श्याम की कोई अपनी संतान नहीं थी, जिसकी वजह से उनके जाने के बाद इस संपत्ति की देखभाल करने वाला कोई नहीं बचा और यह लंबे समय तक बंद हालत में पड़ा रहा।
रहस्यमयी आवाजें और डरावने दावे
आसपास के रहने वाले लोगों के बीच श्याम कुटी को लेकर अनगिनत भूतिया किस्से प्रचलित हैं। जानकारों और स्थानीय निवासियों का दावा है कि करीब 50 साल पहले इस परिसर के भीतर से तरह-तरह की अजीब आवाजें सुनाई देती थीं और लोगों को सफेद कपड़ों में कुछ रहस्यमयी आकृतियां भी दिखाई देती थीं। इस संबंध में देवकी बाबा ने भी साझा किया कि उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती दिनों में जब इस क्षेत्र में समय बिताया था, तब उन्हें भी इस तरह की अजीब आवाजें सुनाई देने और किसी अनहोनी या साए का अहसास होने की अनुभूति हुई थी।
दीवारों पर लिखे धार्मिक मंत्र
इस इमारत की सबसे बड़ी विशेषता इसके बीचों-बीच स्थित दीवारों पर अलग-अलग भाषाओं में उकेरी गई धार्मिक पंक्तियाँ हैं। देवकी बाबा के अनुसार, इन दीवारों पर हिंदी भाषा में सनातन धर्म से जुड़े हुए पवित्र मंत्र लिखे गए हैं, इसके अलावा अंग्रेजी में ईसाई धर्म की प्रार्थनाओं के अंश और उर्दू भाषा में कुरान शरीफ की आयतें भी दर्ज की गई हैं। इन पंक्तियों को लिखने के पीछे मुख्य उद्देश्य नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर भगाना और कथित तौर पर भटक रही आत्माओं को शांति व मुक्ति दिलाना बताया जाता है।
महात्मा का जीवन और संन्यास
श्याम कुटी के इतिहास से जुड़ी एक और दिलचस्प और रहस्यमयी कहानी एक महात्मा से जुड़ी हुई है। देवकी बाबा बताते हैं कि जब वह महात्मा मात्र 15 वर्ष की अल्प आयु के थे, तब वे इस वीरान स्थान पर आकर रहने लगे थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन इसी एकांत और रहस्यमयी जगह पर साधना करते हुए गुजार दिया। अंततः करीब 70 वर्ष की आयु में उनका इसी परिसर के भीतर निधन हो गया। बाबा के अनुसार, वे महात्मा भी अक्सर यह जिक्र किया करते थे कि उन्हें इस कुटी के भीतर अजीब आवाजें सुनाई देती हैं और विभिन्न प्रकार की आकृतियों के दर्शन होते हैं।
विज्ञान और स्थानीय मान्यताएँ
आज भी श्याम कुटी के आसपास घना जंगल होने, इसके लंबे समय तक सुनसान रहने और इससे जुड़ी तमाम कहानियों के कारण लोगों के दिलों में एक अनजाना डर समाया हुआ है। सूरज ढलने के बाद कोई भी व्यक्ति इस रास्ते पर या इसके परिसर के पास जाने का जोखिम नहीं उठाता है। हालांकि, इन सभी दावों और कथित भूत-प्रेत की घटनाओं को लेकर आज तक किसी भी प्रकार की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर प्रचलित किस्से इस पुरानी इमारत के रहस्य को आज भी पूरी तरह से बरकरार रखे हुए हैं।



















