प्रशांत महासागर के ऊपर सक्रिय मौसमी हलचलों ने हवाई द्वीप समूह के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। आने वाले 72 घंटों के भीतर मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिलेगा, जिसके चलते कई इलाकों में अत्यधिक वर्षा, भूस्खलन और जलभराव का खतरा गहरा गया है। मौसम विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह मौसमी तंत्र सीधे तट से टकराने के बजाय समुद्र से ही एक तीव्र मोड़ लेते हुए आगे निकल जाएगा। भले ही मुख्य चक्रवाती हवाएं जमीन पर सीधा हमला न करें, लेकिन इस प्रणाली से उठने वाली नमी की विशाल परत पूर्व की ओर मुड़कर पूरे द्वीप समूह पर भारी आफत बनकर टूट सकती है। इसके प्रभाव से गुरुवार की रात तक द्वीपों की पूरी श्रृंखला में मूसलाधार वर्षा और पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी खिसकने की गंभीर आशंका जताई गई है।
स्थानीय प्रशासन और वैज्ञानिकों ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के साथ पर्यटकों को भी पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश जारी किए हैं। समुद्र के किनारे घूमने और जल क्रीड़ाओं में शामिल होने वाले लोगों को अपनी गतिविधियों पर रोक लगाने की सलाह दी गई है। द्वीपों पर होने वाली यह अप्रत्याशित बारिश केवल सामान्य जनजीवन को ही नहीं थमाएगी, बल्कि संवेदनशील बुनियादी ढांचे और परिवहन व्यवस्था को भी बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर सकती है।
ओलाना की रफ्तार धीमी पड़ी, पर बारिश का खतरा बढ़ा
इस मौसमी हलचल की शुरुआत पिछले हफ्ते समुद्र के ऊपर घने बादलों के जमावड़े के रूप में देखी गई थी। सप्ताहांत के दौरान इस तंत्र ने तेजी से ऊर्जा सोखी और इसका दायरा विशाल होता चला गया। रविवार को यह प्रणाली शक्तिशाली होकर ट्रॉपिकल स्टॉर्म ओलाना के रूप में बदल गई। जैसे-जैसे यह चक्रवात आगे बढ़ा, इसके आंतरिक वायु दबाव और हवा की प्रचंड गति में थोड़ी कमी दर्ज की गई। हवाओं की रफ्तार धीमी पड़ने के कारण सोमवार की शाम को वैज्ञानिकों ने इसे ट्रॉपिकल रेनस्टॉर्म के स्तर पर वर्गीकृत किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि हवा की गति घटने का मतलब खतरे का टलना बिल्कुल नहीं है। कई बार चक्रवातों के कमजोर पड़ने के बाद उनकी नमी और बादलों का घनत्व जमीन पर अत्यधिक वर्षा के रूप में तबाही मचाता है। तेज हवाओं का अभाव लोगों को सुरक्षा का झूठा अहसास करा सकता है, जबकि असली खतरा पहाड़ों से बहने वाले सैलाब और नदियों के उफान से जुड़ा हुआ है। समुद्री पर्यटन, नौका संचालन और द्वीपों की यात्रा पर निकले लोगों के लिए आने वाले कुछ दिन अत्यधिक सावधानी बरतने के हैं। मौसम विशेषज्ञों ने इस तंत्र के खतरे को अपने रियलइम्पैक्ट स्केल पर रेटिंग 1 प्रदान की है। इस पैमाने पर रेटिंग 1 दर्शाती है कि भले ही तेज आंधी तटीय पेड़ों को न उखाड़े, लेकिन निरंतर बरसने वाला पानी और अचानक आने वाली बाढ़ आबादी, परिवहन नेटवर्क और द्वीप की समूची अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकती है।
होनोलूलू और मध्य द्वीपों में 30 इंच तक वर्षा का अनुमान
अगले दो से तीन दिनों के दौरान हवाई के मध्य और तटीय इलाकों में कई इंच बारिश होने की पुष्टि की गई है। सबसे विकट स्थिति ऊंचाई वाले और पहाड़ी ढलानों वाले इलाकों में बनने की आशंका है, जहां बादलों के घिरने से कम समय में ही भारी जलवृष्टि हो सकती है। अनुमानों के मुताबिक ओआहू, मोलोकाई और माउई जैसे मध्य द्वीपों में 2 से 8 इंच तक वर्षा दर्ज की जा सकती है। इसके विपरीत, पहाड़ी शिखरों और घाटियों में कुल वर्षा का पैमाना 30 इंच तक पहुंच सकता है। इतनी विशाल मात्रा में पानी बरसने से ढलानों पर मौजूद मिट्टी की पकड़ कमजोर होगी, जिससे भयानक लैंडस्लाइड का जोखिम पैदा हो जाएगा।
राजधानी होनोलूलू, जो मौजूदा चक्रवाती सत्र के दौरान अब तक किसी भी बड़ी प्राकृतिक आपदा से बची हुई थी, इस बार ओलाना के प्रभाव क्षेत्र में आ चुकी है। हरिकेन मामलों के प्रमुख विशेषज्ञ अलेक्जेंडर डासिल्वा के अनुसार, प्रशांत महासागर में एल नीनो के दौरान वायुमंडलीय परिस्थितियों में होने वाले बदलाव तूफानों के सामान्य मार्गों को बदल देते हैं। अलेक्जेंडर डासिल्वा ने रेखांकित किया कि ओलाना की सबसे असाधारण बात इसका पश्चिम दिशा से हवाई की तरफ बढ़ना है। आमतौर पर इस क्षेत्र में तूफान पूर्व या दक्षिण दिशा से आते हैं, इसलिए पश्चिमी छोर से किसी चक्रवाती प्रणाली का हवाई की ओर बढ़ना मौसम विज्ञान की दृष्टि से बेहद दुर्लभ और चिंताजनक घटना है।
1982 के इवा चक्रवात और दुर्लभ मौसमी इतिहास की याद
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में किसी मौसमी तूफान का पश्चिमी दिशा से आगे बढ़ना सामान्य वायुमंडलीय चक्र का हिस्सा नहीं माना जाता। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने मौसम के जानकारों को 44 साल पुराने उस दौर की याद दिला दी है, जब नवंबर 1982 में हरिकेन इवा ने हवाई में भारी तबाही मचाई थी। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, मुख्य हवाई द्वीपों पर नवंबर के महीने में सीधे प्रभाव डालने वाला इवा अब तक का अकेला चक्रवात रहा है।
अक्टूबर के महीने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड खंगालने पर पता चलता है कि मुख्य द्वीपों के 100 मील के दायरे में आने वाले केवल दो तूफान दर्ज किए गए हैं। पहला मामला वर्ष 1983 में तूफान रेमंड के समय देखा गया था, जबकि दूसरा मामला वर्ष 2014 में तूफान एना के दौरान सामने आया था। यही कारण है कि ओलाना के इस अनोखे पश्चिमी मार्ग और बादलों के भारी जमावड़े ने प्रशासनिक एजेंसियों और मौसम वैज्ञानिकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
वर्ष 2026 में तूफानों का असामान्य दौर और टूटे रिकॉर्ड
मौसमी घटनाओं के लिहाज से वर्ष 2026 हवाई द्वीप समूह के लिए अत्यंत विचित्र और चिंताजनक साबित हुआ है। इस एक ही वर्ष में अब तक 5 प्रमुख नामी तूफान हवाई के बेहद करीब से गुजर चुके हैं, जिसने पूरे क्षेत्र की जलवायु को बुरी तरह झकझोर दिया है।
इस वर्ष तूफानों की श्रृंखला का क्रम इस प्रकार रहा है
- 28 जुलाई: फाउस्टो नामक तूफान समुद्र में कमजोर होने के बाद द्वीपों के उत्तरी तट से मात्र 200 मील की दूरी से आगे निकल गया।
- 16 अगस्त: हरिकेन लाला 130 मील प्रति घंटे की भीषण रफ्तार के साथ बिग आइलैंड के अत्यंत निकट से गुजरा और तटवर्ती बस्तियों में भारी दहशत फैलाई।
- 8 सितंबर: हरिकेन लोवोल समुद्र में कैटेगरी 5 का प्रचंड रूप ले चुका था, जिसकी रफ्तार 258 किलोमीटर प्रति घंटा थी, और यह नीहाऊ द्वीप के पास से मुड़ गया।
- 23 सितंबर: मोके तूफान हवाई के दक्षिणी समुद्री हिस्से से होकर गुजरा।
- 26 सितंबर: हरिकेन नोलो, जिसने मैक्सिको से जापान तक 7,000 मील का अभूतपूर्व सफर तय किया, 155 मील प्रति घंटे की गति के साथ बिग आइलैंड के दक्षिण से होकर निकला।
लगातार गुजरने वाले इन तूफानी तंत्रों की वजह से हवाई में बारिश के पुराने सभी कीर्तिमान ध्वस्त हो चुके हैं। केवल अगस्त और सितंबर के दो महीनों के भीतर ही हिलो शहर में 37 इंच वर्षा दर्ज की गई, जो इस समयावधि के ऐतिहासिक सामान्य औसत से लगभग दोगुनी है। लगातार नम जमीन और भरे हुए जलस्रोतों के कारण नई बारिश का पानी सोखने की क्षमता खत्म हो चुकी है, जिससे बाढ़ का संकट और बड़ा रूप ले रहा है।
हैलोवीन पर कोना स्टॉर्म की नई चेतावनी
ओलाना के गुजरने के बाद भी हवाई के निवासियों को लंबे समय तक मौसमी राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। मौसम विज्ञानी ब्रैंडन बकिंघम ने आगाह किया है कि हैलोवीन के सप्ताहांत पर द्वीपों के पश्चिमी भाग में एक नया कोना स्टॉर्म आकार ले सकता है। यदि यह नया सिस्टम आगे बढ़ता है, तो नवंबर की शुरुआत तक लगातार मूसलाधार बारिश का दौर खिंच सकता है। मौसम विभाग और सुरक्षा एजेंसियों ने नागरिकों तथा आने वाले पर्यटकों को गैर-जरूरी यात्राएं स्थगित करने और मौसम की हर आधिकारिक चेतावनी पर कड़ी नजर रखने की हिदायत दी है।



















