प्रकृति में कुछ ऐसे अनोखे जीव मौजूद हैं जिनके बारे में जानकर विज्ञान भी हैरान रह जाता है। ऐसा ही एक जीव अमर जेलीफिश है जो उम्र के एक पड़ाव पर पहुंचकर मरने के बजाय अपनी शारीरिक अवस्था को उलटा कर देता है। जब भी इस जीव के सामने भोजन की कमी, बीमारी या किसी प्रकार का गंभीर खतरा आता है, तो यह हार नहीं मानता है। यह अपनी वयस्क शरीर रचना का त्याग कर देता है और कोशिकाओं के एक छोटे से गोले में परिवर्तित हो जाता है। महज एक से तीन दिनों के भीतर इस गोले से उसका शुरुआती रूप यानी पॉलीप बाहर निकल आता है और वह एक बिल्कुल नई जिंदगी की शुरुआत करता है।
दुर्घटना वश सामने आया था अमरता का यह रहस्य
इस अद्भुत खोज के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है। साल 1992 की बात है जब एक इतालवी वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशाला में इन जेलीफिश को रखना भूल गए थे और उन्हें कई दिनों तक कोई भी आहार नहीं मिला था। वैज्ञानिकों को लगा था कि अब तक सारी जेलीफिश दम तोड़ चुकी होंगी। लेकिन जब उन्होंने कंटेनर का ढक्कन खोलकर देखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जेलीफिश मरी नहीं थीं, बल्कि उन्होंने खुद को पूरी तरह बदल लिया था और वे दोबारा छोटे पॉलीप के रूप में जीवित थीं।
कोशिकाओं का कायापलट करने वाला मास्टरमाइंड
सामान्य तौर पर इंसानों या अन्य जीवों में जब हृदय या मस्तिष्क की कोशिकाएं पुरानी और कमजोर हो जाती हैं, तो वे हमेशा के लिए नष्ट हो जाती हैं। इसके विपरीत इस अमर जेलीफिश के शरीर में एक जादुई जैविक प्रक्रिया होती है जिसे ट्रांसडिफरेंशिएशन कहा जाता है। इसके माध्यम से इसकी थकी हुई और पुरानी कोशिकाएं वापस शुरुआती स्टेम सेल जैसी अवस्था में लौट जाती हैं। जरूरत पड़ने पर ये कोशिकाएं शरीर का कोई भी नया अंग दोबारा विकसित करने की क्षमता रखती हैं।
डीएनए की मजबूती और अमरता की पक्की चाबी
साल 2022 में हुए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शोध में यह खुलासा हुआ कि इस जेलीफिश के पास अपने क्षतिग्रस्त डीएनए को रिपेयर करने वाले जींस का बहुत बड़ा भंडार मौजूद है। इसके शरीर में टेलोमेयर्स यानी डीएनए की रक्षा करने वाली कैप हमेशा मजबूत स्थिति में बनी रहती हैं। यही वजह है कि लगातार उम्र बढ़ने के बावजूद इसका डीएनए कभी कमजोर या बूढ़ा नहीं होता है और इसकी जीवन प्रक्रिया चलती रहती है।
क्या इंसानों को भी मिल सकेगी सदाबहार जवानी
वैज्ञानिकों का स्पष्ट रूप से यह मानना है कि किसी इंसान को हॉलीवुड फिल्म बेंजामिन बटन की तरह जन्म लेने वाले बच्चे की स्थिति में वापस ले जाना केवल एक कोरी कल्पना है। हालांकि इस जेलीफिश के जैविक रहस्यों को समझकर इंसानी कोशिकाओं और ऊतकों को जरूर दोबारा जवान किया जा सकता है। यह तकनीक आने वाले समय में चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है।
चार बड़ी और गंभीर बीमारियों से मिल सकती है मुक्ति
यदि इस जेलीफिश की कोशिकाओं के फिर से जवान होने की इस खूबी को इंसानी चिकित्सा में सफलतापर्ूववक लागू कर दिया जाए, तो यह मानवता के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इसकी मदद से हार्ट अटैक, स्ट्रोक, अल्जाइमर और बढ़ती उम्र के कारण आंखों की रोशनी खो देने जैसी चार सबसे बड़ी लाइलाज बीमारियों का पक्का और स्थायी इलाज खोजा जा सकता है।
कागजों पर अमर लेकिन कुदरत के आगे नाजुक
भले ही नियंत्रित प्रयोगशाला की स्थितियों में यह जेलीफिश अमर नजर आती हो, लेकिन वास्तविक महासागर की दुनिया में यह बहुत ही संवेदनशील और कमजोर प्राणी है। समुद्र की बड़ी मछलियां इसे बहुत आसानी से अपना शिकार बना लेती हैं। इसके अलावा भोजन न मिलने की स्थिति में या शरीर के ऊपर एल्गी जम जाने से इसकी मौत हो जाती है। यह जीव हमें यह सिखाता है कि कोई भी प्राणी कितना भी अमर होने का दावा क्यों न करे, जन्म और मृत्यु प्रकृति के दो ऐसे शाश्वत नियम हैं जिनसे कोई नहीं बच सकता।





















