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मेघालय की उमंगोट नदी का पानी कांच जैसा पारदर्शी, देश भर में नदियों के प्रदूषण के बीच बनी मिसालयात्रा
30 सित॰ 2026, 11:22 pm (3 मिनट पहले)· 0

मेघालय की उमंगोट नदी का पानी कांच जैसा पारदर्शी, देश भर में नदियों के प्रदूषण के बीच बनी मिसाल

मेघालय के डावकी कस्बे में बहने वाली उमंगोट नदी अपने बेहद पारदर्शी पानी के लिए पहचानी जाती है, जहां नाव की सवारी करने पर हवा या कांच पर तैरने का एहसास होता है।

देश के तमाम हिस्सों में जहां कई नदियां प्रदूषण की गंभीर मार झेल रही हैं, वहीं पूर्वोत्तर के मेघालय में बहने वाली उमंगोट नदी स्वच्छता की एक बेहद सुखद तस्वीर पेश करती है। भारत की सबसे साफ नदी के रूप में विख्यात इस जलधारा को स्थानीय स्तर पर डावकी नदी भी कहा जाता है। इस नदी का जल इतना स्वच्छ और पारदर्शी है कि जब नावें इसकी सतह पर चलती हैं, तो ऐसा आभास होता है मानो वे पानी में नहीं बल्कि किसी पारदर्शी कांच की शीट पर तैर रही हों।

नदी के तल तक दिखता है पत्थरों और जीवों का संसार

उमंगोट नदी की प्राकृतिक बनावट और निर्मल पानी की वजह से सतह पर बैठे-बैठे ही नदी के गहरे तल तक आसानी से नजर पहुंच जाती है। तलहटी में मौजूद बहुरंगी कंकड़, पत्थर और तैरते जलीय जीव बिना किसी रुकावट के साफ नजर आते हैं। भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर इस शांत और पारदर्शी जल को देखना पर्यटकों के लिए मानसिक सुकून और राहत देने वाला अनुभव बन जाता है। इस स्थान की बेदाग सुंदरता को बनाए रखने के लिए यहां आने वाले हर सैलानी से उम्मीद की जाती है कि वे पर्यावरण का पूरा सम्मान करें और किसी भी प्रकार का कचरा या प्लास्टिक वहां न फेंके।

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राष्ट्रीय स्तर पर नदियों के प्रदूषण की चिंताजनक स्थिति

उमंगोट नदी का यह स्वच्छ स्वरूप देश की अन्य नदियों के मौजूदा हालात के बिल्कुल उलट है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, देश भर की 271 विभिन्न नदियों के अध्ययन में 296 नदी-खंड ऐसे पाए गए हैं जो अत्यधिक प्रदूषित हैं। निगरानी के दायरे में रखे गए कुल नदी-क्षेत्रों में से करीब 43% हिस्से सुरक्षित जल गुणवत्ता के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। नदियों के दूषित होने की सबसे बड़ी वजह शहरों से निकलने वाला सीवेज है, जिसका 60% से अधिक हिस्सा बिना किसी प्राथमिक उपचार के सीधे बहकर नदियों में गिरता है। इसके अतिरिक्त कारखानों से निकलने वाला औद्योगिक कचरा और खेती में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकयुक्त जल का बहाव भी जलस्रोतों को गहरा नुकसान पहुंचा रहा है।

सफर का सही मौसम और पहुंचने के आसान रास्ते

उमंगोट नदी की असली खूबसूरती को निहारने के लिए नवंबर से लेकर अप्रैल तक का समय सबसे मुफीद माना जाता है। सर्दियों और शुरुआती गर्मियों के इन महीनों में पानी सबसे ज्यादा पारदर्शी रहता है और नौकायन की गतिविधियां नियमित रूप से जारी रहती हैं। इसके विपरीत, मानसून के दौरान भारी बारिश की वजह से जल मटमैला हो जाता है, जिससे न तो पानी की पारदर्शिता दिखती है और न ही सुरक्षा कारणों से बोटिंग की अनुमति मिलती है।

भौगोलिक रूप से यह नदी मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग से लगभग 95 किलोमीटर की दूरी पर भारत और बांग्लादेश की सीमा के निकट स्थित डावकी कस्बे से होकर गुजरती है। बाहर से आने वाले यात्री गुवाहाटी या शिलॉन्ग तक रेल अथवा हवाई यात्रा करके पहुंच सकते हैं और वहां से टैक्सी के जरिए सड़क मार्ग से डावकी जा सकते हैं। डावकी के मुख्य पुल के आसपास पर्यटकों की भारी तादाद जुटती है। जो लोग भीड़भाड़ से बचकर शांत माहौल में इसी पारदर्शी पानी का दीदार करना चाहते हैं, वे नदी के किनारे लगभग 8 किलोमीटर आगे बसे श्नोंगपडेंग गांव का रुख कर सकते हैं, जहां सुकून के साथ नौकायन का आनंद लिया जा सकता है।

सवाल-जवाब

उमंगोट नदी किस राज्य में स्थित है और इसे अन्य किस नाम से जाना जाता है?
उमंगोट नदी मेघालय राज्य में बहती है और इसे स्थानीय रूप से डावकी नदी के नाम से भी जाना जाता है।
उमंगोट नदी घूमने और बोटिंग करने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
इस नदी पर घूमने और पारदर्शी पानी में बोटिंग का आनंद लेने के लिए नवंबर से अप्रैल तक का समय सबसे बेहतरीन माना जाता है।
बरसात के मौसम में यहां जाने की मनाही या सलाह क्यों दी जाती है?
मानसून के दौरान बारिश से नदी का पानी मटमैला हो जाता है और सुरक्षा कारणों से बोटिंग की सुविधा बंद कर दी जाती है।
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार देश की नदियों में प्रदूषण की क्या स्थिति है?
बोर्ड ने 271 नदियों में 296 प्रदूषित हिस्सों की पहचान की है, जहां निगरानी वाले लगभग 43% हिस्से सुरक्षित जल मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं।
शिलॉन्ग से डावकी की दूरी कितनी है और भीड़ से बचने के लिए कहां जाया जा सकता है?
डावकी शिलॉन्ग से 95 किलोमीटर दूर है, और मुख्य पुल की भीड़ से बचने के लिए सैलानी 8 किलोमीटर आगे श्नोंगपडेंग गांव जा सकते हैं।
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