बिहार के नालंदा जिले में राजगीर का ब्रह्मकुंड देश के सबसे चर्चित गर्म जलकुंडों में शुमार है, जहां सालभर पानी करीब 45 डिग्री सेल्सियस तापमान पर बना रहता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक इस कुंड का निर्माण खुद भगवान ब्रह्मा ने कराया था, ताकि देवी-देवता यहां स्नान कर सकें। सदियों बाद भी यह जगह आस्था और पर्यटन, दोनों के लिए बड़ा आकर्षण बनी हुई है।
राजा बसु के यज्ञ से जुड़ी कहानी
मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र राजा बसु ने राजगीर में एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया था। इतने बड़े आयोजन में शामिल हुए तमाम देवी-देवताओं के स्नान के लिए वहां पर्याप्त इंतजाम नहीं था। इस समस्या को दूर करने के लिए भगवान ब्रह्मा ने खुद राजगीर में 22 अलग-अलग कुंड बनवाए। इन्हीं 22 कुंडों में ब्रह्मकुंड को सबसे प्रमुख और पवित्र माना जाता है, और आज भी यही कुंड सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं को खींचता है।
पानी अपने आप गर्म कैसे रहता है
ब्रह्मकुंड की खासियत यह है कि इसका पानी बिना किसी बाहरी स्रोत के प्राकृतिक रूप से गर्म रहता है। मान्यता के अनुसार यह पानी वैभारगिरी पर्वत की सप्तकर्णी गुफाओं और भेलवाडोव तालाब से होकर कुंड तक पहुंचता है। रास्ते में पहाड़ के भीतर मौजूद सल्फर, गंधक और दूसरे खनिज तत्वों के संपर्क में आने से पानी का तापमान अपने आप बढ़ जाता है, और यही वजह है कि यह कुंड बारहों महीने गर्म बना रहता है।
मलमास मेले में उमड़ती है भीड़
राजगीर का मलमास मेला देशभर में जाना-पहचाना नाम है। सनातन परंपरा में आमतौर पर मलमास के दौरान शुभ काम करने से बचा जाता है, लेकिन राजगीर के मामले में मान्यता ठीक उलट है। कहा जाता है कि इसी अवधि में राजगीर सबसे ज्यादा पवित्र हो जाता है। अग्नि पुराण समेत कई पुराने ग्रंथों में जिक्र मिलता है कि मलमास के दौरान देवी-देवता खुद राजगीर में आकर रहते हैं और ब्रह्मकुंड में स्नान करते हैं। इसी वजह से इस दौरान ब्रह्मकुंड में स्नान करने को खास पुण्यदायी माना गया है। मेले के दिनों में तड़के चार बजे से ही हजारों श्रद्धालु स्नान के लिए कतार में लग जाते हैं, और पूरे महीने यहां धार्मिक कार्यक्रम चलते रहते हैं।
श्रद्धालुओं की आस्था और मनोकामनाएं
पौराणिक मान्यताओं पर भरोसा करने वाले लोगों का कहना है कि मलमास के दौरान सभी देवी-देवता राजगीर आकर बसते हैं और ब्रह्मकुंड में स्नान करते हैं। यही सोच लाखों श्रद्धालुओं को इस दौरान राजगीर खींच लाती है। लोग यहां पहुंचकर स्नान, पूजा-पाठ और दान-पुण्य करते हैं, और अपने जीवन में सुख-समृद्धि तथा शांति की कामना करते हैं।
राजगीर कैसे पहुंचें
राजगीर तक पहुंचना बहुत मुश्किल नहीं है। सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पटना में है, जो यहां से करीब 107 किलोमीटर दूर पड़ता है। रेल मार्ग से राजगीर सीधे पटना समेत देश के कई बड़े शहरों से जुड़ा है। इसके अलावा सड़क मार्ग से भी पटना, गया, नवादा और आसपास के शहरों से नियमित बस और टैक्सी सेवाएं मिलती हैं, जिससे श्रद्धालु और पर्यटक आसानी से यहां तक पहुंच सकते हैं।











